Sunday, June 16, 2019 07:17 PM

सुन्नी में पानी के लिए हाहाकार

शिमला—नगर पंचायत सुन्नी में गर्मियों की दस्तक के साथ ही पानी के लिए हाहाकार मचना शुरू हो गया है। अभी गर्मियां ठीक से शुरू भी नहीं हुई हैं कि वहां पर पीने के पानी की कमी हो गई है, जिस पर यहां के लोग बेहद हैरान हैं। उनकी हैरानी इसलिए जायज है क्योंकि पिछले कई महीनों से अच्छी बारिश लगातार होती रही है। वहीं पहाड़ों पर बर्फ भी अच्छी खासी पड़ी है। बावजूद इसके नगर पंचायत में अभी से पानी की कमी हो चली है। एक तरफ सुन्नी के पास चाबा से सतलुज का पानी शिमला के लिए लाया जा रहा है वहीं, घराट नाला से शिमला के लिए एक बड़ी पेयजल योजना विश्व बैंक के माध्यम से प्रस्तावित है। ऐसे में जहां से राजधानी शिमला को पानी की सप्लाई होगी, वहीं पर पानी की कमी है। पिछले एक सप्ताह से लोगों के घरों में पानी की आपूर्ति में कमी आई है, जिस पर आईपीएच विभाग के अफसरों का कहना है कि यहां पर काफी ज्यादा निर्माण कार्य हो चुके हैं, जबकि पेयजल की व्यवस्था सालों पुरानी एक ही योजना से चल रही है। यहां की आबादी काफी ज्यादा बढ़़ चुकी है, लेकिन यहां पर पेयजल योजना का विस्तार नहीं किया गया है। सालों पुरानी बैंसुआ पेयजल योजना से ही पानी आ रहा है जो कि अपर्याप्त है। आलम यह हो गया है कि लोगों की टंकियों तक तो क्या नलकों में भी पानी पूरा नहीं आ रहा है। इससे क्षेत्र के लोगांें में भारी नाराजगी है और रोजाना आईपीएच के अफसरों को शिकायतें कर रहे हैं। इस समस्या का समाधान निकालने के बारे में कुछ भी नहीं सोचा जा रहा। एक ही पेयजल योजना की बात अधिकारी सालों से कहते आ रहे हैं, मगर इसका समाधान किसी ने नहीं किया।

आईपीएच डिवीजन में कर्मचारियों की कमी

सुन्नी के आईपीएच डिविजन में कर्मचारियों की भी भारी कमी चल रही है, जिस कारण बेलदारों व प्लंबरों से दफतर का काम लिया जा रहा है। बताते हैं कि यहां पर फील्ड के लिए लगाए गए कर्मचारी दफ्तरों में काम निकाल रहे हैं वहीं, पानी के बिलों के वितरण तक को कर्मचारी नहीं हैं। इस तरह की खस्ताहाल व्यवस्था से नगर पंचायत में बेहद कठिनाइयों का दौर चल रहा है, जबकि नगर पंचायत भी लोगों से पूरा टैक्स वसूल कर रही है। वहीं, आईपीएच विभाग ने भी पानी के मीटर लगा रखे हैं। चिंता इस बात की है कि वर्तमान में ऐसी स्थिति है तो जब गर्मी का मौसम चरम पर होगा तो क्या हालत होगी। इस क्षेत्र में सतलुज की वजह से गर्मी भी अत्यधिक पड़ती है।