Thursday, November 14, 2019 02:19 PM

सुविधाओं को तरसा अंब शहर

सड़कों की हालत खस्ता; जाम से नहीं मिला छुटकारा, लोग परेशान

अंब -शहर का रूप धारण कर चुकी अंब पंचायत आबादी के लिहाज से खंड अंब की सबसे बड़ी पंचायत कहलाती है। लेकिन दुःख का विषय है कि मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को आज भी तरसना पड़ रहा है। अपनी रोजमर्रा वस्तुओं को खरीदने के लिए अंब पंचायत के 13 वार्ड के लोगों के साथ-साथ सात लगती दो दर्जन पंचायतों के लोग अंब मुख्यालय में आते हैं। अंब मुख्यालय का छोटे आकार का चौक व बस अड्डा यातायात की कठिनाइयों का पोल खोलता दिखाई देता है। यहां यातायात की भगदड़ कई दुर्घटनाओं का कारण बनकर कई मानवीय जिंदगियों को लील कर चुकी है। यहां प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए मिनी सचिवालय की मांग ठंडे बस्ते में चल रही है। पर्यटन की अपार संभावनाएं संजोए अंब उपमंडल चिंतपूर्णी विधानसभा चुनाप क्षेत्र की जद में आता है। यहां पर चिंतपूर्णी माता, बाबा बड़भाग सिंह कई ऐसे सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। जिनके दर्शन करने के लिए पंजाब सहित अन्य राज्यों के श्रद्धालु भारी संख्या में पहंुचते हैं। माता चिंतपूर्णी के लिए वैकल्पिक बाइपास और अंब-मुबारिकपुर में आये दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम भी जस के तस है। अंब उपमंडल में सैनिक कंटीन और सैनिक स्कूल खोलने की मांग भी बहुत पुरानी है। इतने बड़े अंब उपमंडल में कोई भी तहसील पुस्तकालय भी नहीं खोला जा सका। नगर नियोजन तो शायद आने वाले सौ सालों में भी साकार नहीं हो पाएगा। पानी निकासी की नालियां और पुरानी पानी की पाइपलाइन, बिजली के पुराने जर्जर खंभें आमजीवन की सबसे बड़ी दयनीय अवस्थाओं की पोल खोल देती है। सीवरेज प्रणाली और फ्लाई ओवर ब्रिज समय की पुकार है, ताकि यहां सर्व सुलभ सुचारू जीवन यापन करवाया जा सके। यहां के लोगों की समस्यायों की लंबी फेहरिस्त है। जिसमें लोहारा, सूरी में कई पंचायतों की छात्राओं को कालेज की पढ़ाई करने के लिए अंब, चिंतपूर्णी अथवा चौकीमन्यार महाविद्यालयों का जंगलों-जंगल अपने घरों से ग्रामीण बस स्टाप तक बसों का काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। आशा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार और केंद्रीय सरकार के मंत्री अंब उपमंडल के चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र को समग्र विकास क्रांति की मुख्य धारा से जोड़कर भारत के मानचित्र पर प्रतिस्थापित करवाएंगे।