Tuesday, June 02, 2020 11:47 AM

सेना और शहादत

कर्नल (रि.) मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक

पिछले दिनों भारतीय सेना के पांच जांबाज सैनिक कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए, उसी के अगले दिन उसी जगह पर तीन और जवान शहीद हो गए। पिछले कुछ वर्षों से अगर सैनिकों के शहीद होने के आंकड़ों का आकलन करें तो पता चलता है कि हर दूसरे दिन एक सैनिक शहीद होता है। हर सैनिक एवं देशवासी को इस तरह की खबर की अब आदत सी हो गई है। अकसर देखा जाता है कि सैनिक की शहादत की खबर जानकर बहुत सारे लोग ‘बहुत बुरा हुआ’ कहकर आगे बढ़ जाते हैं। पिछले हफ्ते 5 सैनिकों की शहादत के समय ही फिल्मी जगत के दो बड़े सितारे भी भगवान को प्यारे हो गए। असली हीरो  और पर्दे के हीरो की इस खबर का आकलन किया जाए तो देश का हर नागरिक, अखबार एवं मीडिया पर्दे के हीरो के दुख में कंपेरेटिवली ज्यादा गमगीन दिखे। कोविड योद्धा एक महिला स्वास्थ्यकर्मी जो लगातार 20 दिन काम करने के बाद अपने घर लौटी तो लोगों ने उसका फूलों के साथ स्वागत किया। एक प्रशासनिक अधिकारी का कोविड-19 में व्यस्तता के कारण अपने बच्चे के जन्मदिन में शामिल न हो पाने पर लोगों की सहानुभूति दिखाने के वीडियो  सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण चर्चा में हैं। मेरा मानना है कि फिल्मी परदे के हीरो की अंतिम विदाई पर गमगीन होना, 20 दिन परिवार से दूर रहकर घर लौटे स्वास्थ्य कर्मी का फूलों से स्वागत करना तथा प्रशासनिक अधिकारी का अपने बच्चे के जन्मदिन में शामिल न होने पर सहानुभूति जाहिर करना सब जायज है, पर एक फौजी की जिंदगी में 20 दिन तो क्या, करीब 6 महीने तक घर-परिवार से दूर रहना, अपने बच्चों के जन्मदिन या किसी सगे संबंधी की शादी-ब्याह या किसी और महोत्सव में शामिल न होना और बड़े त्योहार भी अपने परिवार के साथ न मनाना एक फौजी के लिए आम बात है। पर फिर भी इस तरह की बातों पर ज्यादा ध्यान न देते हुए सैनिक अपने काम में मशगूल हैं। इसका प्रमाण हम देखते हैं कि कश्मीर में धारा 370 के हटने के बाद लगातार बंद और उसके बाद बर्फ  का गिरना, फिर कोरोना वायरस का लॉकडाउन, इस दौरान कश्मीर के आम आवाम को सेना के बारे में अच्छी तरह जानने का मौका मिला है और उसी का नतीजा है कि बर्फ  पिघलने के बाद सेना ने लोकल लोगों के सहयोग से घाटी में सक्रिय ज्यादातर आतंकवादियों का सफाया कर दिया है। इनमें कई बड़े आतंकवादी भी शामिल हैं। मेरा मानना है कि सेना को समझने के लिए एक कानून बनना चाहिए कि देश का हर नागरिक किसी भी विभाग में नौकरी या काम करने से पहले कुछ वर्ष सेना में सेवाएं दे। उससे हर किसी को सेना को समझने का अच्छा मौका मिलेगा।