Wednesday, August 12, 2020 06:49 AM

सेना का ‘सिंधु सुदर्शन-2’

कर्नल मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक

पिछले कल यानी 29 नवंबर से भारतीय सेना द्वारा थार मरुस्थल में युद्ध अभ्यास सिंधु सुदर्शन-2, की शुरूआत की गई। इस अभ्यास के दौरान सेना की दुश्मन की सरहद के अंदर जाकर हमला बोलने की क्षमता को जांचा जाएगा, इस अभ्यास को वायु एवं थल सेना मिलकर अंजाम देंगी। अभ्यास के दौरान भारतीय सेना के करीब 40,000 सैनिक, मुख्य युद्ध टैंक जैसे टी-90 एवं टी-72, के साथ-साथ डिवीजन और ब्रिगेड लेवल में लड़ाई के दौरान इस्तेमाल होने वाले हथियारों को युद्ध के पैमाने पर परखा जाएगा। मरुस्थल में होने वाले इस अभ्यास में भारत के उम्दा किस्म के हथियार जैसे पिनाका, मल्टी बैरल राकेट लांचर के अलावा समर्च, राकेट लांचिंग सिस्टम,155 एमएम गन, के-9, बज्र आदि की शूट और स्कूट की क्षमता का भी प्रदर्शन किया जाएगा। थल एवं वायु सेना के साझे अभ्यास के दौरान पश्चिमी सरहद में दुश्मन के इलाके में अंदर तक जाकर लड़ने की तकनीक को मजबूत किया जाएगा इसके अलावा वायु सेना, पैदल सैनिकों के पहुंचने से पहले ही टारगेट बर्बाद करने का तथा सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह पर हवाई रास्ते से ले जाने का अभ्यास करेगी। इस अभ्यास के दौरान युद्ध क्षेत्र को बिलकुल हकीकत के तौर पर तैयार किया जाएगा। इससे पहले 2011 में ‘सुदर्शन शक्ति ’ के नाम से युद्ध अभ्यास किया गया था, सेना में ऐसे अभ्यास एक  निश्चित अवधि के बाद किए जाते हैं जिसमें उस समय में भारतीय सेना में कमीशन किए गए सभी नए हथियारों की क्षमता की जांच तथा युद्ध के लिए तैयारी का निरीक्षण किया जाता है। सामान्यता इन हथियारों को लड़ाकू दस्ते अपनी-अपनी यूनिट में जरूरी देख-रेख के साथ संभाल कर रखते हैं। परंतु युद्ध के लिए तैयारी हेतु ऐसे अभ्यास में फायर आदि करके निरीक्षण किया जाता है। सारे हथियारों की ताकत के इकट्ठे प्रदर्शन से  इनकी सर्विसेबिलिटी की जांच के साथ-साथ  शक्ति का प्रदर्शन भी होता है और इनकी उम्दा ताकत को देख सैनिकों का हौसला और जोश भी बढ़ता है, जिसको सही समय आने पर या युद्ध के दौरान सैनिक पूरे जोश-खरोश और बल के साथ इस्तेमाल करते हैं। 29 नवंबर से चार दिसंबर तक चलने वाले ‘सिंधु सुदर्शन शक्ति-2, युद्धाभ्यास का भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और सेना अध्यक्ष विपिन रावत पोखरण जैसलमेर में जाकर जायजा लेंगे।