Tuesday, March 31, 2020 01:21 PM

सेना में तेजस

कर्नल (रि.) मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक

कुछ दिनों से सिर्फ  गिने चुने देशों में असर दिखाने वाली कोरोना या कोविड-19 जैसी भयानक संक्रामक बीमारी ने पिछले सप्ताह लगभग पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके चलते हर देश के मुखिया अपने देशवासियों को संबोधित करते हुए अपने घरों तक ही सीमित रहने की बात कर रहे हैं। कई देशों ने सेना के माध्यम से देशवासियों को घर में रहने के लिए मजबूर किया है। हमारे प्रधानमंत्री जी ने भी अपने विदेशी दौरे बंद कर राष्ट्र के संबोधन के दौरान जनता कर्फ्यू लगाने की बात कही है। शिक्षण संस्थान, धार्मिक संस्थान तथा हर  स्थान जहां पर भीड़ का अंदेशा है उनको बंद करने के आदेश दिए गए हैं। इसी दौरान एक पूर्व न्यायाधीश जिन्होंने हाल ही में देश के लिए बड़े फैसले दिए थे उनको संसद के उच्च सदन में बैठा दिया गया और वेंटिलेटर पर चल रही एक राज्य की सरकार का सियासी युद्ध भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खत्म हो गया। इस सबके बीच पिछले सप्ताह एक और महत्त्वपूर्ण फैसला रक्षा मंत्रालय की तरफ  से आया जिसमें 38 हजार करोड़ रुपए से नेकस्ट जनरेशन यानी अगली पीढ़ी के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ‘तेजस’ तैयार करने का फैसला लिया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी के नेतृत्व में बनाई गई काउंसिल ने 83 नए एयरक्राफ्ट खरीदने की  मंजूरी दे दी और इसी आधार पर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी भी बड़ी जल्दी ही आने की संभावना है। तेजस लड़ाकू जहाज को हिंदुस्तान एरोनॉटिक लिमिटेड एचएएल यानी ‘हाल’ ही बनाएगा। इस संस्थान को पिछले दिनों ‘राफेल’ एक उच्च दर्जे एवं आधुनिक तकनीक वाले  लड़ाकू विमान की भारत में की जाने वाली तैयारी से दूर रखा गया था तथा वह मुद्दा पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान काफी चर्चा में रहा था। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ‘एलसीए’ ‘तेजस’ भविष्य में भारतीय वायु सेना की रीढ़ की हड्डी का काम करेगा। यह भी कहा गया कि एलसीए मार्क-2,  किस्म के 200 लड़ाकू  विमान भारतीय वायु सेना का हिस्सा बनेंगे और इन लड़ाकू विमानों को बनाने का जिम्मा भी एचएएल यानी हाल को दिया जाएगा। जो करीब 100,000 करोड़ से भी ज्यादा का आर्डर होगा। एचएएल भी इतनी बड़ी जिम्मेदारी को समय से पूरा करने के लिए प्राइवेट सेक्टर यानी निजी क्षेत्र से भी कुछ सहायता लेने की योजना बना रहा है। एचएएल को मिलने वाले इतने बड़े ऑर्डर से निश्चित तौर पर ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजैक्ट को तो प्रोत्साहन मिलेगा ही, पर इतनी बड़ी संख्या में नए और आधुनिक तकनीक से लैस लड़ाकू विमानों के वायुसेना में शामिल होने से सेना की ताकत में इजाफा होगा जिससे भारत का अपनी सैन्य संख्या एवं हथियारों के बल पर दुनिया के ताकतवर देशों की अग्रणी श्रेणी में शामिल रहने का दावा और भी मजबूत होगा।