सेना में ‘सांड की आंख’

कर्नल मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक

पिछले एक सप्ताह से दिवाली, भैया दूज त्योहार, हरियाणा एवं महाराष्ट्र की राजनीतिक गतिविधियों, यूरोपीय सांसदों का कश्मीर दौरा व आईएसआई कमांडर बगदादी के मारे जाने के साथ एक और विषय जो सर्वाधिक चर्चा में रहा वह था भूमि पेडणेकर और तापसी पन्नू जैसी वालीवुड की योग्य अदाकारा द्वारा अभिनीत फिल्म  का शीर्षक ‘सांड की आंख’। चंद्रो और प्रकाशी तोमर शूटर दादीयों की सच्ची कहानी पर बनी यह फिल्म, ऐसी दो देहाती औरतों की है जिन्होंने 60 साल की उम्र के बाद वैपन फायरिंग या शूटिंग करना सीखा और जमाने की अनेकों बाधाओं के बावजूद फायरिंग रेंज पर दिन-रात मेहनत से अपनी प्रतिभा को मजबूत किया तथा अनेकों कंपटीशन में बड़े योग्य और प्रोफेशनल शूटरों को पस्त कर मेडल जीते। कहानी बड़ी ही मोटिवेशनल, इंस्पायरिंग और रोचक है, पर शीर्षक कुछ अजीब सा है। आखिर शूटिंग और सांड की आंख का क्या नाता है? जिस तरह महाभारत में द्रोपदी स्वयंवर के प्रसंग के अनुसार मछली की आंख को निशाने का पर्यायवाची माना जाता है, उसी तरह सांड की आंख और निशानेबाजी का रिश्ता सेना में फायरिंग क्लास में सूबेदार का नए सैनिक को शूटिंग के नुक्ते समझाने के तरीके से पता चलता है। सैनिक जब फायरिंग रेंज पर अभ्यास या किसी कंपीटीशन में फायर करते हैं तो उसमें दिए गए टारगेट्स पर अलग-अलग दूरी पर या सेंटीमीटर पर कुछ चक्कर या सर्कल बनाए गए होते हैं। आउटर सर्कल, इन्नर सर्कल, क्लोजर सर्कल और बुल। आउटर सर्कल के बाहर लगने वाली बुलेट को गिनती में नहीं लिया जाता है, जबकि आउटर सर्कल से अंदर की तरफ  आने वाले हर चक्कर को बढ़ती गिनती के हिसाब से नंबर दिए जाते हैं, टारगेट के सेंटर यानी बुल पर निशाना साधने से मैक्सिमम नंबर काउंट किए जाते हैं। बेसिकली नंबर कांउट करने की तकनीक अंग्रेजी शैली की है। भारतीय सेना में ज्यादातर सैनिक गांव, देहात के होने से उनको हर हथियार से फायर करना एवं  निशाना बुल पर लगाना आसान और सरल भाषा में सिखाया जाता है। इसी को अच्छी तरह देहाती भाषा में समझने के लिए ‘बुल’ एक अंग्रेजी शब्द जिसका हिंदी में मतलब सांड तथा शूटिंग का पर्यायवाची, मछली की आंख से आंख लेकर, टारगेट के सेंटर यानी बुल में गोली मारने को सांड की आंख फोड़ना कहा जाता है। फायरिंग रेंज पर उस्ताद को अकसर आदेश देते सुन सकते हैं कि हर सैनिक वैपन को पूरी चुस्ती और मजबूती से पकड़ फोर साइट नोंब, अप्रचर होल तथा टारगेट के सेंटर यानी बुल को एक सीधी लाइन में मिलाकर, फायर के हुकम पर लंबी सांस लेते हुए ट्रिगर दबाएगा और सांड की आंख को फोड़ेगा।