Monday, April 06, 2020 05:56 PM

सेब करेगा बागबानों को मालामाल

इस साल सर्दियों में हुई बर्फबारी-बारिश को देखते हुए बागबानों को उम्मीद, पौधों के चिलिंग आवर्स पूरे

नौहराधार -इस वर्ष जिस तरह से बर्फबारी व बारिश का दौर सर्दियों के शुरुआती दौर में क्षेत्रों को मिला इसका सबसे अधिक फायदा आने वाले समय में सेब उत्पादन पर देखने को मिल सकता है। दो वर्षो से जिला के उंचाई वाले क्षेत्र में लोगों ने बागबानी के ऊपर काफी दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है। इस वर्ष बागबानी मिशन के तहत नौहराधार, संगड़ाह में उद्यान विभाग ने सात हजार, बागबानी विशेषज्ञों का मानना है कि सेब के पौधों में चिलिंग आवर्स की प्रक्रिया का पूरा होना आवश्यक होता है, जिससे कि आने वाले समय में सेब की पैदावार पर इसका असर देखने को मिलता है।  बता दें कि 2019 में भी सेब का उत्पादन बहुत अच्छा हुआ था। इस वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष और ज्यादा सेब का उत्पादन होने की आशंका जताई जा रही है। बेहतर फसल के लिए सर्दियों में 1200 से 1600 घंटे में तापमान सात से आठ डिग्री होना जरूरी होता है। जबकि नई प्रजातियों के लिए पांच हजार घंटे में चिलिंग आवर्स पूरे हो जाते हैं। बागबानी विशेषज्ञ रमेश ने बताया कि सेब को सही सेटिंग के लिए चिलिंग आवर्स का पूरा होना आवश्यक होता है, जिसके लिए तापमान सात से आठ डिग्री तक होना चाहिए, जो इस बार पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि  सेब के पौधे दिसंबर महीने में सुताव्स्था में होते हंै। इस अवस्था में बाहर लाने के लिए सात डिग्री का तापमान औसतन 1200 से 1600 घंटे तक चाहिए होता है।  इस वर्ष भी मौसम को देखते हुए अच्छी पैदावार होने की संभावना बन रही है। गौरतलब है कि जिला के ऊपरी क्षेत्र नौहराधार, दियूडी खडाह, गताधार व कैंथा आदि में सेब की अच्छी फसल होती है इन क्षेत्रों में 60 फीसदी बागबान सेब की फसल पर निर्भर रहते हंै। इन क्षेत्रों में आजकल नई प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं। एसएमस उद्यान विभाग राजगढ़ यूएस तोमर ने बताया कि दो-तीन वर्षों से लोग बागबानी के ऊपर काफी ध्यान दे रहे हंै इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में विभाग ने संगडाह,  राजगढ़, पच्छाद में साढ़े 18 हजार पौधे वितरित किए हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष आवर्स पूरे हो चुके हैं। इस वर्ष अच्छी पैदावार होने की संभावना जताई जा रही है।