Monday, August 10, 2020 02:08 PM

सेब की पू्रनिंग को लेकर बागबान सयाने

बागों में कामकाज तेज, पू्रनिंग के काम को हल्के में न लेकर इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

ठियोग-प्रदेश के ज्यादातर बागबान अभी भी पू्रनिंग को ज्यादा महत्त्व नहीं देते हैं। उनके लिए यह काम रूटीन की तरह हो गया है। हर साल पतझड़ के बाद पौधों की काट-छांट कर जल्दी से इस काम को निपटाना है और अगला काम शुरू करना है। जबकि पू्रनिंग सिस्टम पर ही बेहतर फसल, पौधे का सही विकास और बेहतर फू्रट क्वालिटी जैसी चीजें निर्भर करती हैं। ऐसे में पू्रनिंग के काम को हल्के में न लेकर इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ठियोग में उद्यान विभाग के विषय विशेषज्ञ मदन ठाकुर ने बताया कि वैसे तो सेब व अन्य फलों में पू्रनिंग के लिए लेट विंटर यानी जनवरी का आखिरी सप्ताह और फरवरी महीना सही समय माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि फरवरी के बाद पौधे सुप्तवस्था से बाहर निकलते है और उनमें रस संचार (सैप फ्लो) की प्रक्रिया शुरू हो जाती हैं। ऐसे में पू्रनिंग के दौरान पौधों को लगने वाले घाव जल्दी भर जाते है। जबकि जल्दी पू्रनिंग करने से पौधों के घाव ज्यादा देर तक खुले रहते हैं। जिससे कैंकर जैसी बीमारियां पौधों में लग जाती है। ऐसे में लेट विंटर ही पू्रनिंग के लिए सही समय माना जाता है। लेकिन अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में जहां सार्दियों में अधिक हिमपात के कारण पौधों को क्षति पहुंचती है वहां पौधो में सुप्तावस्था शुरू होते ही काट छांट का कार्य आरंभ कर सकते है। उन्होंने बताया कि पू्रनिंग के बारे में अधिक विस्तृत बात की जाए तो यह प्रक्रिया पौधों को सही आकार व क्वालिटी फू्रस प्राप्त करने के लिए अमल में लाई जाती है। पू्रनिंग करने का मुख्य उद्देश्य पौंधों की मृत, बीमारीयों से ग्रसित व अवांछित शाखाओं को हटाना होता है, ताकि पौंधे को स्वस्थ रखा जा सके। इस प्रक्रिया में पौधे के भीतरी भाग में अंदर की तरफ  उगने वाली टहनियों को काटा जाता है, ताकि सीजन की नई ग्रोथ को इच्छानुसार रोक कर हवा व धूप के पौधे के भीतरी भाग तक प्रवेश को संभव किया जा सके। धूप व हवा के निरंतर प्रसार के लिए ओपन कैनोपी होना बेहद जरूरी है इसके कारण बेहतर क्वालिटी का फल उत्पादन संभव होता है। इसके अलावा फल देने वाली तीन से पांच साल पुरानी छोटी टहनियों की छंटाई की जाती है। पुराने बीमों की छंटाई करके नए बीमों को उचित दूरी पर रखना चाहिए जिससे फल लगने की स्थिति में बेहतर आकार का क्वालिटी फू्रट प्राप्त किया जा सके। बीमे की छंटाई करते समय फू्रट बड और वेजिटेटिव बड में फर्क समझना जरूरी है। गहरे रंग का सिकुड़ा हुआ बीमा फू्रट बड होता है। वेजिटेटिव बड़ भी फू्रट बड जैसा ही होता है मगर उसमें सिकुड़न और गहरा रंग नहीं होता। इसके अलावा एक फलदार पौधे में एक सेंट्रल लीडर होना जरूरी है। दो अथवा अधिक लीडर होने पर पौधा कमजोर हो जाता है। लंबी और मजबूत टहनी का चयन लीडर के तौर पर किया जाना चाहिऐ और कमजोर टहनी को हटा देना चाहिए। सेब व अन्य फलों के पौधों में पू्रनिंग का विशेष महत्व है। इसलिए काट छांट का कार्य ऐसे व्यक्ति से करवाना चाहिए ये जो इस कार्य में दक्ष हो क्योंकि सही पू्रनिंग तकनीक ही है बेहतर फसल का आधार।