Thursday, July 02, 2020 02:16 PM

सेब बागीचों में ‘माइट’ प्रबंधन जरूरी

सेब ठंडे क्षेत्रों में रहने वाले बागबानों की आय का मुख्य स्रोत है। आजकल सेब मंडियों में पहुंचने लगा है। ऊपरी क्षेत्रों में अभी सेब के तुड़ान के लिए कुछ समय बाकी है। सेब के बागीचों में आजकल माइट का प्रकोप हो जाता है तथा बागबान यदि समय पर प्रबंधन के उपाय न अपनाएं, तो काफी क्षति हो जाती है। इस वर्ष पिछले वर्षों की अपेक्षा उत्पादन कम होने के संकेत हैं तथा यदि माइट आक्रमण का प्रबंधन न किया जाए, तो गुणवत्ता भी प्रभावित हो जाती है। बागबान विशेषज्ञों के पास  उस समय पहुंचते हैं, जब काफी नुकसान हो गया हो,तब प्रबंधन भी ठीक से नहीं हो पाता। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि बागबान समस्या के बारे में पहले से अवगत हों, ताकि उस समस्या का सफल समाधान किया जा सके। उनकी जानकारी हेतु पहचान एवं लक्षण तथा प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जा रही है।

पहचान एवं लक्षण : माइट आठ टांग वाली मकड़ी प्रजाति से संबंधित सूक्ष्म जीव है। बागीचों में मुख्यतः दो प्रकार की माइट यूरोपियन रेड माइट तथा टू स्पॉटिड स्पाइडर माइट पाई जाती हैं। यूरोपियन रेड माइट चाकलेट रंग की होती है, जबकि टू स्पॉटिड माइट हरे-पीले रंग की होती है। दोनों प्रकार की माइट पत्तियों पर मुख्यतः निचली तरफ अंडे देती हैं, जिनमें से कुछ दिन बाद शिशु निकलकर पत्तियों से रस चूसना प्रारंभ कर देते हैं। यह अपना जीवन चक्र 10-15 दिन में पूर्ण कर लेती हैं तथा पुनः अंडे दे देती हैं। एक वर्ष में यह माइट कई जीवन चक्र पूर्ण कर लेती हैं। जुलाई-अगस्त में इनका आक्रमण काफी बढ़ जाता है। प्रभावित पत्तियां शुरू में हल्की हरी तथा बाद में पीली पड़ जाती हैं तथा अंत में तांबे के रंग की होकर वृक्ष से गिर जाती हैं। प्रभावित वृक्ष अपना भोजन ठीक से नहीं बना पाते तथा वृक्ष की वृद्धि प्रभावित हो जाती है, इसके अतिरिक्त फलों की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ता है, फलस्वरूप बागबानों को फल का उचित दाम नहीं मिल पाता। इन सूक्ष्म जीवों को फील्ड लैंस (10) की मदद से देखा जा सकता है।

प्रबंधन : यदि बागबानों ने हार्टिकल्चरल मिनरल 5:45 आयल का छिड़काव शुरू की अवस्था में किया हो तो, आगे की अवस्थाओं में माइट संख्या कम रहती है, क्योंकि आजकल का समय माइट वृद्धि के लिए उपयुक्त है, इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि इन्हें माइटी साइट द्वारा नियंत्रण में लाया जाए। इनके प्रबंधन हेतु फैनजाकिवन (मैजिस्टर या मैजिस्टिक 10 ईसी 50 मिली) या प्रापरजाइट या (ओमाइट। सिंबा 5ईसी 200 मिली) या हैक्सी  यायजॉक्स (मेडन 3.45 ईसी 200 मिली) या स्पाइरोमैसीफेन (ओबेरॉन 240 एससी 60 मिली) प्रति 200 लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। आवश्यकता पड़ने पर 20 दिन के उपरांत एक छिड़काव और किया जा सकता है। ध्यान रहे कि एक ही जीवनाशक का बार-बार छिड़काव न करें।

फल तोड़ने के उपरांत भी यह जीव वृक्षों को नुकसान पहुंचाता रहता है। शीत काल में यह सुशुप्तावस्था में चला जाता है, जब वृक्ष के पत्ते झड़ जाते हैं। बागबान को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र के नजदीक उद्यान अधिकारियों के संपर्क में रहें तथा उद्यान विभाग एवं विश्वविद्यालय द्वारा सुझाई गई छिड़काव सारिणी का प्रयोग करें।

-डा.दिवेंद्र गुप्ता, कीट विज्ञान विभाग यूएचएफ, नौणी