Tuesday, September 29, 2020 04:20 PM

सैंज की 15 पंचायतों में शोपीस बनीं सोलर लाइट्स

सैंज -देश को रोशन करने के मकसद से बनाई गई पार्वती जल विद्युत परियोजना में कार्यरत मुख्य कंपनी एनएचपीसी ने स्थानीय विकास के लिए ग्राम पंचायतों को जिला प्रशासन के माध्यम से करोड़ों रुपए की धनराशि जारी की और ग्राम पंचायतों ने लाडा फंड की इस राशि से पंचायत के गांवों को रोशन करने के लिए सोलर लाइट्स लगाने का बीड़ा उठाया तथा ग्राम पंचायतों ने लाडा के पैसों से गांव को रोशन करने के लिए सैकड़ों सोलर लाइट्स खरीदीं, लेकिन घाटी के विभिन्न गांवों में ये सोलर लाइट्स अब शोपीस बन गई हैं। लिहाजा मरम्मत एवं रखरखाव न होने के चलते विभिन्न गांवों की सोलर लाइट की बत्ती गुल हो गई है। बताया जा रहा है कि सैंज घाटी की 15 पंचायतों में लाडा के फंड से 700 से अधिक सोलर लाइट पंचायती राज विभाग ने स्थापित की है तथा पंचायती राज विभाग ने ग्राम पंचायतों के अनुरोध पर विभिन्न कंपनियों से निविदाएं मांगी, लेकिन टेंडर के दौरान सोलर कंपनियों से मरम्मत के लिए कोई भी नियम व शर्त नहीं रखी, जिस कारण जहां विभिन्न सोलर कंपनियां करोड़ों रुपए हड़प गई। वहीं, इसमें घपले की भी बू रही है।  रैला पंचायत के पूर्व प्रधान प्रीतम सिंह ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को लपेटे में लेते हुए कहा कि सैकड़ों सोलर लाइट पर करोड़ों रुपए की राशि खर्च करने पर भी ग्रामीण अंधेरे में है। उन्होंने कहा कि घाटी की 15 पंचायतों में करीब पांच वर्ष पहले रात्रि प्रकाश के लिए गांव व प्रमुख मार्गों पर सोलर लाइट लगाई थीं, लेकिन गांव की सरकार इन सोलर लाइट की मरम्मत करना भूल गई है और घाटी में अधिकांश सोलर लाइट खराब होकर धूल फांक रही हैं, जिससे गांव में शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। बताया जा रहा है कि पंचायती राज विभाग ने एक सोलर ऊर्जा लाइट पर करीब 22 हजार रुपए खर्च किए थे, लेकिन गांव की सरकार ने लाइट लगाने के बाद मरम्मत पर अभी तक एक  रुपए खर्च नहीं किया है, जिस कारण अधिकांश सोलर लाइट की बत्ती गुल हो गई है। सैंज घाटी की ग्राम पंचायत लारजी, कनौन, कोटला, धाऊगी, दुशाहड़, बनोगी, सुचेहण, शांघड, शैंशर, गाडापारली, देऊरीधार, रैला, तलाडा, देवगढ़, गोही व भलाण आदि ग्राम पंचायतों में 700 से अधिक सोलर लाइट पंचायती राज विभाग द्वारा लगाई गई है, जिसमें अधिकांश खराब पड़ी हुई है।

विभाग से लगाई मरम्मत की गुहार

रैला पंचायत के पूर्व प्रधान प्रीतम सिंह ने बताया कि रैला पंचायत में ही 300 से अधिक सोलर लाइट स्थापित की गई हैं, जो इन दिनों शोपीस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन सोलर लाइट के खराब होने से शाम ढलते ही गांव में अंधेरा छा जाता है, जिससे बुजुर्गों को ऊबड़-खाबड़ रास्तों से आवागमन में खासी परेशानी झेलनी पड़ती है और कई बार तो लोग चोटिल तक हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कई बार पंचायती राज विभाग से गुहार लगाई जा चुकी है कि इन सोलर लाइट्स की मरम्मत कराई जाए, लेकिन विभाग ग्रामीणों की मांग पर कोई भी सुनवाई नहीं कर रहा है, जिस कारण उपतहसील सैंज के अंतर्गत आने वाली पंचायतों में सैकड़ों सोलर लाइट शोपीस बनी हुई हैं। विभाग द्वारा पंचायतों में स्थापित की गई एक-एक सोलर लाइट की कीमत तकरीबन 20 से 22 हजार रुपए बताई जा रही है। उधर, जिला पंचायत अधिकारी विमला भट्टी ने बताया कि यह मामला ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में है तथा पंचायतों में निविदाएं मांग कर एजेंसी के साथ अनुबंध किया है और ग्राम पंचायत इसके लिए प्राधिकृत हैं।