सैंया लाए प्याज, सखी आरती उतारो

नवेंदु उन्मेष

 स्वतंत्र लेखक

मेरे पड़ोसी के यहां वंदनवार सजा था और उत्सव मनाया जा रहा था। यहां तक कि औरतों के द्वारा सोहर गाया जा रहा था। मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उनसे पूछा क्या आपके घर में कोई नया मेहमान आया है। उन्होंने मुझे डपटते हुए कहा चुप भी रहो, आज मेरे घर में प्याज आया है। औरतें गाए जा रही थीं, सैया लाए, प्याज, सखी आरती उतरो। इससे मेरी जिज्ञासा और बढ़ी। मैंने पूछा कि प्याज घर पर आने पर उत्सव मनाने की क्या जरूरत है। पड़ोसी ने कहा इन दिनों बाजार में प्याज बाहुबली हो चुका है। इसे खरीदने के लिए भी पैसों की ताकत चाहिए। घर में प्याज उत्सव उससे कम पैसे में मन जाएगा, लेकिन एक किलो प्याज तुम खरीदकर नहीं ला सकते। मैंने उनसे कहा मैं जानता हूं कि इन दिनों बाजार में प्याज मूंछें ऐंठकर इतरा रहा है, लेकिन मैं भी कम नहीं हूं। एक किलो क्या, एक बोरी प्याज घर में ला सकता हूूं। उसने फिर पूछा यह कैसे संभव है। मैंने उसे बताया कि आने वाले दिनों में बैंक प्याज खरीदने के लिए भी लोन देंगे। तब मैं एक बोरी प्याज खरीदकर घर में ला सकूंगा। इतना ही नहीं अगर इसी तरह से प्याज की कीमत बाजार में बढ़ती गई तो आने वाले दिनों में सरकारी कर्मचारी प्याज भत्ता की भी मांग कर सकते हैं। तब सरकार को अपने कर्मचारियों को प्याज भत्ता भी देना पड़ सकता है। इसी तरह आम जनता की मांग पर सरकार को प्याज राहत कोष की स्थापना करनी पड़ेगी और प्याज की खरीददारी से दूर रहने वालों को इस कोष से राहत का पैसा भी दिया जाएगा ताकि वह प्याज खरीद सके। वे बोले-तुम तो ऐसी बातें कर रहे हो जैसे तुम्हें सरकार ने बता दिया हो कि देश में प्याज राहत कोष की स्थापना होने वाली है और तुम इसके लिए थैला लेकर खड़े हो। मैंने उनसे कहा देश में यही होता रहा है। जनता जब किसी चीज से ज्यादा पीडि़त होती है तो वह सरकार से राहत की मांग करती है और सरकार लोगों की मांग पर राहत कोष की स्थापना करती है। इस तरह से वह दिन दूर नहीं है जब सरकार प्याज राहत कोष की स्थापना करेगी। बात चल ही रही थी कि एक और सज्जन वहां आ गए और बोले-प्याज कई सरकारों को रुला चुका है। अगर इस सरकार को भी रुला रहा है तो इसमें नया क्या है। अभी कम से कम प्याज के नाम पर सरकार नहीं गिरने वाली है। बहुत होगा तो सरकार नोटबंदी की तरह प्याजबंदी भी कर सकती है। तब लोगों को कहा जाएगा कि वे बैंकों में लाइन लगाकर एक किलो प्याज कम कीमत पर खरीद सकते हैं। इन सबके बावजूद मेरे पड़ोसी के घर पर प्याज उत्सव मन रहा था। पड़ोसी मूंछ पर ताव दिए एक किलो प्याज खरीदकर लाने का जश्न मना रहा था और हम जैसे लोगों को चिढ़ा भी रहा था। मुहल्ले में इसकी खूब चर्चा हो रही थी। पड़ोसी को डर इस बात का भी था कि कहीं उसके घर पर आयकर विभाग के लोग छापेमारी न कर दें। उसके घर पर आकर यह न पूछ बैठें कि वर्तमान समय में जब प्याज की कीमत बढ़ गई है तो तुम्हारी हैसियत इसे खरीदने की कैसे हो गई। जरूर तुमने भ्रष्टाचार का हथकंडा अपनाया होगा। इसी बीच मुहल्ले के एक और घर से औरतों के गाने की आवाज आ रही थी। ‘सखी सैया तो खूब ही कमात हैं मगर प्याज डायन खाए जात है’। मैं समझ गया कि अब महंगाई के बाजार में प्याज भी डायन बनकर उठ खड़ा हुआ है। वैसे खबर यह है कि बाजार में मुर्गे बहुत खुश हैं क्यों कि उन्हें तत्काल मिलने वाली फांसी की सजा उम्रकैद में बदल चुकी है। इसके लिए वे प्याज को बधाई दे रहे हैं।