सोरहिया मेला

16 दिनों तक होती है भगवती मां लक्ष्मीजी की विशेष पूजा-अर्चना...

भारतीय संस्कृति के सनातन धर्म में देवी-देवताओं का व्रत उपवास रखकर पूजा-अर्चना करने की धार्मिक व पौराणिक मान्यता है। इसी क्रम में भाद्रपद शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि से भगवती मां लक्ष्मी की उपासना का विशेष पर्व प्रारंभ हो जाता है, जो कि आश्विन कृष्णपक्ष की अष्टमी पर्यंत प्रतिदिन 16 दिनों तक चलता है।  भगवती लक्ष्मीजी की उपासना का पर्व इस बार  22 सितंबर तक चलेगा। काशी में यह ‘सोरहिया मेला’ के नाम से प्रसिद्ध है, श्रीलक्ष्मी कुंड में स्नान का विधान है। लक्सा स्थित लक्ष्मी कुंड और महालक्ष्मी मंदिर पर 16 दिनों के सोरहिया मेले का शुभारंभ हो गया। सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति के लिए रखे जाने वाले इस व्रत के साथ लाखों लोगों की श्रद्धा जुड़ी हुई है। इसकी गिनती भी काशी के आठ लक्खी मेलों में होती है। यहां 16 अंक का विशेष महत्त्व है।

16 दिन का मेला, 16 अंकों का विशेष महत्त्व

जानकार बताते हैं कि महालक्ष्मी के पूजन और व्रत का नाम सोरहिया इसीलिए पड़ा क्योंकि यहां 16 अंक का विशेष महत्त्व है। 16 दिन के व्रत और पूजन में स्नान और 16 आचमन के पश्चात देवी विग्रह की 16 परिक्रमा की जाती है। माता को 16 चावल के दाने, 16 दुर्वा और 16 पल्लव अर्पित किए जाते हैं। व्रत के लिए 16 गांठ का धागा धारण किया जाता है और कथा सुनी जाती है, जिसमें 16 शब्द होते हैं। 16वें दिन जीवितपुत्रिका या ज्यूतिया के निर्जला व्रत के साथ पूजन का समापन होता है।

राजा ज्यूत की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि अगस्त्य ने इस कुंड की स्थापना की थी। पुरातन काल में राजा ज्यूत थे जिनकी कोई संतान न थी। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर मां लक्ष्मी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिया और लक्ष्मी कुंड पर पूजन और व्रत करने की प्रेरणा दी। देवी की प्रेरणा पर राजा ने 16 दिन का व्रत रखा। उन्हें संतान प्राप्ति हुई साथ ही उनके सुख और वैभव में भी बढ़ोतरी हुई।

उमड़ती है व्रती महिलाओं की भीड़

सोरहिया मेले के पहले दिन लक्ष्मी कुंड पर व्रती महिलाओं की भीड़ उमड़ती है। बड़ी संख्या में लोग कुंड में स्नान और मां महालक्ष्मी के दर्शन पूजन करते हैं। मंंदिर में सुबह की आरती के दौरान भी भारी भीड़ उमड़ी रहती है। दोपहर तक यहां दर्शनार्थियों की अटूट कतार लग जाती है। देखरेख और सुरक्षा के लिए भारी पुलिस फोर्स भी तैनात की गई जाती है।

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