Tuesday, October 15, 2019 03:17 PM

स्टोन क्रशरों पर शिकंजा कसेगी सरकार

घटिया सामग्री की शिकायतों के बाद पीडब्ल्यूडी-उद्योग विभाग को कार्रवाई के निर्देश

शिमला - सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता के निर्धारण को लेकर अब सरकार सख्त कदम उठाएगी। ऐसे में सरकार की नजर स्टोन क्रशरों पर है। इन पर मानकों के अनुरूप सामग्री न देने को लेकर शिकंजा कसा जाएगा, जिसके लिए लोक निर्माण विभाग के साथ उद्योग विभाग को निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार के गुणवत्ता नियंत्रण दस्ते ने घटिया सामग्री की शिकायतों पर जांच करवाई है, जिसमें कई तरह की कमियां पाई गईं। ऐसे में अब स्टोन क्रशरों पर नियमों के अनुरूप काम करने को लेकर सख्ती बरती जाएगी। राज्य सरकार ने उद्योग विभाग को स्टोन क्रशरों पर शिकंजा कसने को कहा है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुंडू द्वारा उद्योग विभाग को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि तय मानकों के हिसाब से बजरी न देने वाले क्रशरों पर कार्रवाई की जाए। बता दें कि घटिया किस्म की बजरी के कारण सड़कों की टायरिंग जल्दी उखड़ रही है। सिविल वर्क्स में भी गुणवत्ता गिर रही है। उद्योग विभाग को यह सुनिश्चित बनाने को कहा गया है कि इंडियन रोड कांग्रेस, ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय ने निर्माण कार्यों के लिए बजरी के जो मापदंड तय कर रखे हैं, उसके अनुसार बजरी तैयार की जाए। इसके लिए प्रत्येक स्टोन क्रशरपर 63 एमएम, 40 एमएम, 20 एमएम, 13.2 एमएम, 4.75 एमएम, 2.36 एमएम तथा 75 माइक्रोन की जालियां लगानी होंगी, ताकि इनके जरिए बजरी से रेत व मिट्टी को अलग किया जा सके। बजरी में रेत व मिट्टी के मिले होने से सड़कों की टायरिंग जल्द उखड़ जाती है। क्वालिटी को लेकर मुख्यमंत्री की हिदायत के बाद पीडब्ल्यूडी महकमा भी उन्हीं स्टोन क्रशरों से बजरी खरीदेगा, जिनकी बजरी मानकों पर खरा उतरेगी। मानकों के हिसाब से बजरी तैयार करने वाले क्रशरों को पीडब्ल्यूडी महकमा ई-पैनल करेगा। पीडब्ल्यूडी ने भी उद्योग विभाग को ऐसा करने के लिए पत्राचार किया है, लेकिन इस पर विभाग ने गौर नहीं किया। अब मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजने की हिदायत के साथ इन निर्देशों पर अमल करने को कहा है। उद्योग विभाग को लिखे पत्र में हवाला दिया गया है कि हिमाचल भूकंप की दृष्टि से सिसमिक जोन-4 व जोन-5, यानी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील है। इसलिए निर्माण में गुणवत्ता होनी बेहद जरूरी है।