Monday, April 06, 2020 04:55 PM

स्नोव्हाइट और सात बौने

खाना खा चुकने के बाद सबसे बुजुर्ग बौने ने राजकुमारी स्नोव्हाइट को धन्यवाद दिया और बोला- ‘मैं कोई झूठी प्रशंसा नहीं कर रहा हूं। सचमुच ही हमने ऐसा स्वादिष्ट खाना जीवन में पहली बार खाया है। दूसरी बात मैं यह कहना चाहूंगा कि हम कल एक और कुर्सी व बिस्तरा ले आएंगे। अब आज रात तो किसी तरह गुजारा चलाना ही पड़ेगा। मजबूरी है।’ ‘तुम सब बेकार मेरी इतनी चिंता कर रहे हो। मैं रात काट लूंगी। सब ठीक है।’ राजकुमारी ने आश्वासन दिया व सबसे सोने का निवेदन किया। सामान्यतः राजकुमारी को फर्श पर नींद न आती, परंतु उस दिन वह इतनी थक चुकी थी कि लेटते ही निद्रालोक में पहुंच गई...

-गतांक से आगे...

बौनों ने स्नोव्हाइट से भी निवेदन किया कि वह भी उनके साथ बैठकर भोजन करे। पर कुर्सियां तो केवल सात थीं। स्नोव्हाइट कहां बैठती? एक बौने ने अपनी कुर्सी उसके लिए खाली कर दी और स्वयं फर्श पर बैठकर खाने लगा। खाना खा चुकने के बाद सबसे बुजुर्ग बौने ने राजकुमारी स्नोव्हाइट को धन्यवाद दिया और बोला- ‘मैं कोई झूठी प्रशंसा नहीं कर रहा हूं। सचमुच ही हमने ऐसा स्वादिष्ट खाना जीवन में पहली बार खाया है। दूसरी बात मैं यह कहना चाहूंगा कि हम कल एक और कुर्सी व बिस्तरा ले आएंगे। अब आज रात तो किसी तरह गुजारा चलाना ही पड़ेगा। मजबूरी है।’ ‘तुम सब बेकार मेरी इतनी चिंता कर रहे हो। मैं रात काट लूंगी। सब ठीक है।’ राजकुमारी ने आश्वासन दिया व सबसे सोने का निवेदन किया। सामान्यतः राजकुमारी को फर्श पर नींद न आती, परंतु उस दिन वह इतनी थक चुकी थी कि लेटते ही निद्रालोक में पहुंच गई। दूसरे दिन प्रातः जब बौने काम पर जाने के लिए तैयार हो रहे थे तो उन्होंने राजकुमारी स्नोव्हाइट को भी तैयार होते देखा। बौनों ने उसे समझाने का प्रयत्न किया कि उनका कार्य परिश्रम भरा है, जिसे वह नहीं झेल पाएगी। परंतु राजकुमारी उनके साथ जाने की जिद पर अड़ी रही। वह बोली- ‘ठीक है, जहां तुम लोग जाकर काम करोगे, वहीं मैं पास में कहीं खेलकर समय काट लूंगी।’ इस बात पर बौने उसे साथ ले जाने को राजी हो गए। काम के स्थान पर सातों बौने अपने-अपने काम में लग गए। उन्होंने देखा कि स्नोव्हाइट छोटे जीवों व पक्षियों के साथ खेल रही है। यह दृश्य देखकर बौने इतने पुलकित हुए कि उत्साहित होकर दुगने जोश से काम निपटाने लगे। परिणाम यह हुआ कि उस दिन का उनका काम और दिनों की अपेक्षा शीघ्र ही समाप्त हो गया और वे सब साथ-साथ घर लौट आए। फिर स्नोव्हाइट ने पकवान पकाए और सबने मिलकर बड़े प्रेम से भोजन किया। दूसरी सुबह स्नोव्हाइट ने देखा कि काम पर जाने की जल्दी में बौने ठीक से खाना खाए बिना ही उठ रहे हैं। वे दिन का खाना प्रातः ही खाकर काम पर चले जाते थे। जल्दबाजी में खाना भी पका-अधपका रह जाता था। स्नोव्हाइट ने कहा कि वह घर पर रहेगी और ढंग से खाना बनाकर दोपहर को बौनों को उनके काम के स्थान पर ले जाकर देगी। बौनों को भी यह सुझाव पसंद आया।