Monday, December 16, 2019 06:07 AM

स्मार्ट सिटी की स्मार्ट स्टडी

1912 के बाद से स्मार्ट सिटी धर्मशाला शिक्षा के क्षेत्र में हर रोज नई बुलंदियां छू रही है। 202 स्कूलों में 29396 छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहे धर्मशाला ने इस अरसे में एक ऐसी क्रांति लाई कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों का कल संवार रहे धर्मशाला में क्या है शिक्षा की स्थिति, बता रहे हैं हमारे संवाददाता              नरेन कुमार, विनोद कुमार

हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहर धर्मशाला की आज पर्यटन, खेल एवं बौद्ध नगरी के रूप में विश्व भर में पहचान है, लेकिन पहाड़ में शिक्षा की नई लौ जलाने का कार्य धर्मशाला शहर में आजादी से पहले ब्रिटिशकालीन समय से हो रहा है। धर्मशाला शिक्षा का एक ऐसा केंद्र रहा है, जहां देश-प्रदेश ही नहीं, बल्कि बाहरी देशों से भी छात्र बड़ी संख्या में आकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। उस समय का दौर अब अपने गोल्डन ईरा में प्रवेश कर चुका है और अब शहर में कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कूल हैं, जहां देश-विदेश से छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहुंचते हैं। धर्मशाला में निजी स्कूल खुलने का दौर 1970 से भी पहले से शुरू हो गया था, जिसके बाद कुछ समय के लिए विराम भी रहा। 1995 के बाद फिर से प्राइवेट स्कूल खुलने शुरू हुए। तीन दशक में शहर में निजी स्कूलों की सुनामी आ गई है, जिसमें कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्कूल भी खोले गए। इतना ही नहीं, आज के दौर में धर्मशाला शहर प्ले स्कूलों की एक बड़ी नर्सरी के रूप में उभर रहा है, जो सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

शिक्षा का इतिहास

धर्मशाला प्राचीन समय से ही तपोस्थली रही है। राजा-महाराजाओं के समय से धर्मशाला सहित जिला कांगड़ा की धरती कांगड़ा पेंटिंग सहित अन्य विद्याओं के लिए जानी जाती है। साथ ही बौद्ध व जैन धर्म के भी कई शिक्षा के मठ शहर में मौजूद हैं। ब्रिटिशकाल के दौरान वर्ष 1912 में नींव और 1926 में अध्ययन के लिए धर्मशाला में शुरू हुए इंटरमिडिएट कालेज ने शिक्षा की पहली लौ जलाई, जिसमें देश सहित पड़ोसी राज्यों के छात्रों ने भी शिक्षा ग्रहण की। धर्मशाला में 1970 से पहले निजी स्कूल खुलने का दौर शुरू हुआ। इसके बाद लगातार सरकारी शिक्षण संस्थानों, सरकारी स्कूलों और निजी स्कूलों की संख्या में इजाफा होता गया।

202 स्कूलों में 29396 छात्र संवार रहे भविष्य

कुल स्कूल                  202      

सरकारी स्कूल                   132

सरकारी स्कूलों में छात्र          9,000

प्राइवेट स्कूल                     70

प्राइवेट स्कूलों में छात्र           20,396

सरकारी स्कूलों के आंकड़े

सरकारी प्राइमरी स्कूल           92

सरकारी मिडल स्कूल            10

सरकारी हाई स्कूल                09

सरकारी सीनियर स्कूल          15

बोर्ड           कितने स्कूल

आईसीएसई          03

सीबीएसई             11

एचपी बोर्ड            45

प्ले वे स्कूल           10

...इन संस्थानों से हैं शान

धर्मशाला में शिक्षण संस्थान और प्राइवेट स्कूल शिक्षा के लिए किए गए बेहतरीन कार्य के चलते शहर ही नहीं, प्रदेश और देश भर में अपना नाम रोशन कर गए। धर्मशाला में शिक्षा का नाम लेने पर सबसे पहले पीजी कालेज धर्मशाला, बीएड कालेज धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला, राजकीय शिक्षा महाविद्यालय धर्मशाला, जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान डाइट, तिबेतन अर्काइव एंड लाइब्रेरी, तिबेतन चिल्ड्रन विलेज टीसीवी, ब्वायज और गर्ल्ज स्कूल धर्मशाला, सेक्रेड हार्ट पब्लिक स्कूल सिद्धपुर धर्मशाला, इंटरनेशनल सहज पब्लिक स्कूल, केंद्रीय विद्यालय योल कैंट व धर्मशाला, बीडी डीएवी धर्मशाला, डीएवी टंग नरवाणा, आधुनिक पब्लिक स्कूल सिद्धबाड़ी, अचीवर्स हब पब्लिक स्कूल, दयानंद मॉडल पब्लिक स्कूल, कांगड़ा वैली, रेनबो इंग्लिश स्कूल भटेहड़ दाड़ी, धौलाधार पब्लिक स्कूल श्यामनगर, सेंट मैरी स्कूल सिद्धपुर, हाइलैंड स्कूल सुधेड़ और गुरुकुल ने शहर की शान बढ़ाई है। शिक्षण संस्थानों और स्कूलों से धर्मशाला शहर शिक्षा के क्षेत्र में सितारे की तरह जगमगा रहा है।

आधुनिक शिक्षा के उद्देश्य से खुले स्कूल हुए सफल

धर्मशाला शहर में सरकारी शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक और हाईटेक शिक्षा प्रदान करने के लिए लगातार निजी स्कूल खुलते रहे। निजी स्कूलों का शुरुआत में उद्देश्य पहाड़ की प्रतिभाओं को निखार कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना रहा। इसमें धर्मशाला में खुले अधिकतर स्कूल कामयाब भी रहे, लेकिन आज के दौर में स्कूलों को व्यावसायिक दृष्टि से अधिक देखा जा रहा है, जिसके चलते स्कूलों में कंपीटीशन की भावना भी अधिक देखने को मिल रही है। इसमें कोई संदेह नहीं, कि धर्मशाला के स्कूलों की एजुकेशन क्वालिटी में बढ़ोतरी हो रही है।

प्ले-वे स्कूल दे रहे बेसिक एजुकेशन

प्रदेश भर में सबसे महत्त्वपूर्ण शिक्षा का हब बने स्मार्ट शहर धर्मशाला में 70 से अधिक निजी स्कूल चल रहे हैं। इसके साथ ही अब धर्मशाला प्ले स्कूलों को एक नए हब के रूप में उबरा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्ले स्कूल शुरू किए गए हैं, जिनमें बच्चों को बेसिक एजुकेशन सिखाई जा रही है। इसके अलावा धर्मशाला एजुकेशन ब्लॉक के तहत ही 126 सरकारी स्कूल, जिनमें प्राइमरी, मिडल और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक भी शामिल हैं।

अध्यापकों की स्थिति

शहर के प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की अच्छी खासी फौज शिक्षा प्रदान करने के लिए रखी गई है। निजी स्कूलों में कक्षाओं व प्रति विषय के हिसाब से शिक्षक रखे गए हैं, जिससे छात्रों को अधिक सक्रिय होकर सीखने का मौका मिल पाता है, जबकि सरकारी स्कूलों में उच्च शिक्षा में तो शिक्षकों की अधिक कमी नहीं है, लेकिन प्रारंभिक शिक्षा में कई स्कूल नाममात्र शिक्षकों के सहारे ही चल रहे हैं। सरकारी ग्रामीण स्कूलों की हालत को इतनी दयनीय बनी हुई है कि प्रति विषय तो क्या मात्र एक व दो शिक्षकों के सहारे ही पांच-पांच कक्षाएं चल रही हैं। हालांकि कई सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या भी नाम मात्र ही रह गई है।

धर्मशाला के शहरी स्कूल स्मार्ट, गांव वालों का बुरा हाल

स्मार्ट सिटी धर्मशाला के शहरों के निजी व सरकारी स्कूल तो काफी हद तक स्मार्ट बनने की ओर अग्रसर हैं, जबकि गांवों के सरकारी स्कूलों की हालत अति दयनीय बनी हुई है। कई स्कूलों के भवन अब तक दुरुस्त नहीं हो पाए हैं, जबकि कई स्कूलों में लगातार छात्र संख्या कम होने से हालात खराब चल रहे हैं। वहीं, धर्मशाला में एक दर्जन से अधिक निजी स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे हैं, लेकिन उनमें इन्फास्ट्रक्चर सहित अन्य सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जा रही है। ग्रामीण परिवेश में खुले वातावरण में चलने वाले स्कूल लोगों को अपनी ओर ज्यादा आकर्षित कर रहे हैं।

अभिभावकों से बातचीत

उतना बेहतर नहीं कइयों का स्तर

धर्मशाला के सभी शहरी स्कूलों में शिक्षा का स्तर उतना बेहतर नहीं है, जितना दिखाया जाता है,  लेकिन शहर के कुछेक स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। इनमें बच्चों व अभिभावकों पर अधिक दबाव की बजाय सभी गतिविधियां सुचारू रूप से चलाई जा रही हैं                             ज्योति गुप्ता, अभिभावक, धर्मशाला

सुधार की जरूरत तो अभी भी है

धर्मशाला शहर के स्कूलों ने शिक्षा के स्तर में नए आयाम स्थापित किए हैं। धर्मशाला में हर प्रकार की शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा छात्रों को मिल रही है, जिससे नींव मजबूत बनने से वे उज्ज्वल भविष्य बना रहे हैं। हालांकि निजी और ग्रामीण सरकारी स्कूलों में सुधार की भी जरूरत है      ओंकार तारा, अभिभावक, मकलोडगंज

सरकारी स्कूलों में तो शिक्षक ही नहीं

शहर के स्कूलों में बेसिक एजुकेशन पर अब विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए कई प्ले स्कूल खुले हैं, जिसके बाद बच्चों के लिए उच्च एजुकेशन के लिए तो पहले से ही काफी अधिक स्कूल चल रहे हैं। इससे छात्रों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिल रहा है। सरकारी स्कूलों में तो कई जगह शिक्षक ही नहीं हैं और उनकी लापरवाही भविष्य पर भारी पड़ रही है       सुनीता कपूर, अभिभावक, धर्मशाला

एक से बढ़कर एक अच्छे संस्थान

धर्मशाला शहर के निजी स्कूलों ने शिक्षा को नई ऊंचाइयों में पहुंचाया है। अब शहर में एक से बढ़कर एक अच्छे शिक्षण संस्थान हैं। इतना ही नहीं, निजी के साथ-साथ अच्छे सरकारी मॉडल स्कूल भी विकसित हो रहे हैं। हालांकि निजी स्कूलों की कुछेक बातों की मनमानी, कई बार परेशान करती है

सरिता देवी, अभिभावक, धर्मशाला

बच्चों के सर्वांगीण विकास पर फोकस

धर्मशाला शहर के स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता लगातार बढ़ा रहे हैं। साथ ही बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियां भी समय-समय पर आयोजित की जा रही है, जिससे बच्चों सर्वांगीण विकास हो रहा है                                          शमशेर सिंह, अभिभावक, धर्मशाला

निजी स्कूलों ने बदला इतिहास

धर्मशाला में सबसे प्रतिष्ठित व पुरातन राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला है, जहां कई महान पुरुषों ने शिक्षा ग्रहण की है। इसके साथ ही अन्य शिक्षण संस्थान और फिर शुरू हुए निजी स्कूलों ने धर्मशाला का इतिहास ही बदलकर रख दिया है। अब धर्मशाला शिक्षा का स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है

डा. युगल डोगरा, शिक्षाविद एवं साहित्यकार, धर्मशाला

महान अभिनेता भी यहां पढ़े

धर्मशाला नगर शिक्षा का केंद्र इसलिए बन कर उभरा, क्योंकि यहां का कालेज उत्तर भारत का सबसे पुराना महाविद्यालय है। यहां के पढा़ई कर गए विद्यार्थी बहुत ऊंचे पदों पर रहे हैं, अपने समय के सदाबहार अभिनेता देवानंद ने भी यहीं पढ़ाई की है। धीरे-धीरे धर्मशाला नगर शिक्षा का केंद्र बन गया है, अब केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित अनेक बड़े स्कूल भी यहां खुले हैं

डा. विजय शर्मा, रिटायर्ड प्राचार्य, कालेज

कालेज का रोल सबसे अहम

आज शिक्षा और शिक्षण का विस्तार इतना अधिक और इतने अनेक स्तरों पर हो चुका है कि यह कहना कठिन हो जाता है कि धर्मशाला सचमुच हर प्रकार की शिक्षा का केंद्र बन चुका है या नहीं। निःसंदेह यहां शैशविक, प्राथमिक, माध्यमिक, उत्तरमाध्यमिक आदि दर्जों के लिए अच्छे दर्जे के नए-पुराने सरकारी-गैरसरकारी और पब्लिक स्कूल मौजूद हैं। हिमाचल को सुशिक्षित राज्यों की श्रेणी के ऊंचे पायदान पर रखने में इनका योगदान भी कम नहीं है। 1946-47 में डिग्री कालेज बनते ही दूरदराज से शिक्षार्थी यहां आते थे

डा. ओम अवस्थी, शिक्षाविद एवं साहित्यकार

तिब्बती भी यहीं बना रहे फ्यूचर

स्कूल शिक्षा बोर्ड का कार्यालय भी 1983-84 से धर्मशाला में ही कार्यरत है। कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के निजी विद्यालय भी धर्मशाला व उसके आसपास के क्षेत्रों में कार्यरत हैं। यहां के स्थानीय निवासियों के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों से आकर भी यहां के जिलों के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। धर्मशाला में ही तिबेतन बच्चे भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अतः धर्मशाला शिक्षा ग्रहण करने के लिए एक उपयुक्त स्थान है। यहां पढ़ने का पूरा सहज वातावरण है प्रभात शर्मा, एचएएस रिटायर्डह्य व पूर्व सचिव, स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला प्राइवेट स्कूलों ने बदल दिया स्तर धर्मशाला शिक्षा की लो जलाने वाला एक ऐसा स्थान है, जहां प्राइमरी से लेकर हायर एजुकेशन प्राप्त करने के लिए आज से लगभग 50 वर्ष पूर्व ही लड़कों व लड़कियों के लिए अलग स्कूल थे। इसके बाद बाद डिग्री व पीजी करने के लिए पीजी कालेज धर्मशाला साथ ही शिक्षक बनने के लिए बीएड व डाइट भी मौजूद है। धर्मशाला में सरकारी के साथ-साथ धीरे-धीरे कई नामी प्राइवेट स्कूलों ने शिक्षा का स्तर ही बदलकर रख दिया है

चंद्ररेखा डढवाल, शिक्षाविद एवं साहित्यकार, धर्मशाला

रिजल्ट में सरकारी से आगे निजी स्कूल

धर्मशाला शहर के प्राइवेट स्कूल परिणाम देने में सरकारी स्कूलों के मुकाबले कई गुणा आगे हैं। हालांकि धर्मशाला शहर के कई सरकारी स्कूल भी बेहतरीन एजुकेशन के चलते निजी स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं, लेकिन धर्मशाला के बेहतरीन प्राइवेट स्कूल अच्छे परिणाम से प्रदेश ही नहीं, देश भर में अपना व क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। हालांकि सरकारी स्कूलों का परिणाम भी कुछ हद तक सुधरा हुआ नज़र आता है, लेकिन अभी प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देने की हालत में नहीं पहुंच पाए हैं, जिसके कारण सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल उठ रहे हैं। सरकारी स्कूलों में हर वर्ष करोड़ों रुपए का बजट खर्च किया जा रहा हैं, जिसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर, भवनों, शिक्षकों और छात्रों को हर सुविधा प्रदान की जा रही है। बावजूद इसके सरकारी स्कूल रिजल्ट में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। हालांकि सरकारी स्कूलों के छात्र खेलकूद-सांस्कृतिक सहित अन्य गतिविधियों में काफी आगे निकल रहे हैं, जिसमें निजी स्कूल कुछेक गतिविधियों को छोड़कर पिछड़ते हुए नजर आ रहे हैं।

भवनों में कहीं निजी, तो कहीं सरकारी पिछड़े

धर्मशाला शहर में प्राइवेट और निजी स्कूलों के भवनों में मिलाजुला असर देखने को मिलता है। धर्मशाला शहर के कुछ सरकारी स्कूलों में अव्वल दर्जे के भवन निर्मित किए गए हैं, जबकि निजी स्कूलों को घरों व भीड़-भाड़ भरी जगह में बदहाली से चलाया जा रहा है। इसके अलावा घरों और दुकानों में भी कई स्कूल चल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों के भवनों की हालत दयनीय बनी हुई है, जबकि कई प्राइवेट स्कूलों के भवन अत्याधुनिक तरीके से तैयार किए गए हैं, जिसमें छात्रों की सभी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।