Thursday, October 17, 2019 01:39 AM

स्मार्ट सिटी पर एनजीटी का ग्रहण

अगले माह साफ होगी तस्वीर; प्रोजेक्ट में बाधा दूर करेगी कैबिनेट सब कमेटी, अगली सुनवाई से पहले तैयार होगी रिपोर्ट

शिमला -एनजीटी के आदेशों के बाद स्मार्ट शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर लगे ग्रहण से अगले महीने असली तस्वीर सामने आएगी। यानी अक्तूबर माह में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इसके साथ-साथ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में बाधा को दूर करने के लिए कैबिनेट सब कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। कैबिनेट सब कमेटी की अब तक दो बार हुई बैठकों में रिपोर्ट तैयार करने की बात कही थी। हालांकि अभी रिपोर्ट तैयार होने में समय लगेंगे, लेकिन अगले महीने सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले इस मसले पर प्रारूप तैयार होगा। हालंाकि शिमला के कोर एरिया और ग्रीन एरिया में भवनों के निर्माण पर एनजीटी ने रोक लगाई है, जिससे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का काम इस क्षेत्र में नहीं हो सकते। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार की कैबिनेट सब कमेटी सभी कानूनी पहलुओं को देखते हुए पूरी रिपोर्ट तैयार कर देगी। प्लानिंग एरिया नगर निगम शिमला के दायरे में ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट तैयार होना है, जिस पर एनजीटी के आदेश पूरी तरह भारी पड़ पड़ रहा है। केंद्र की मोदी सरकार ने दो वर्ष पूर्व शिमला को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया, लेकिन यहां बहुमंजिला भवन निर्माण सहित कई आधुनिक तकनीक से होने वाले विकास कार्यों पर एनजीटी की तलवार लटक गई है। ऐसे में जब तक एनजीटी के आदेश रद्द नहीं होते, तब तक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकेगा। एनजीटी के उन आदेशों को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें अढ़ाई मंजिला से अधिक भवन निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। बताया गया कि जब तक एनजीटी के आदेश लागू हैं, तब तक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर काम होना संभव नहीं हैं।

कोर एरिया में लटक सकता है स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट

एनजीटी ने 16 नवंबर 2017 को शिमला में भवन निर्माण मामले पर जो फैसला सुनाया था उसी को ही अंतिम फैसला करार दिया। ऐसे में अब शिमला के कोर एरिया में भवन निर्माण नहीं हो सकेंगे और कोर एरिया के बाहर क्षेत्रों में सिर्फ अढ़ाई मंजिला भवनों का ही निर्माण हो सकेंगे। इसके साथ-साथ शिमला कोर एरिया में अवैध तरीके से जो भवन निर्माण हो चुके हैं उन पर जेसीबी चलेगी।

13 नवंबर 2017 से पहले के भवन होंगे रेगुलर

पिछले साल एनजीटी ने प्रदेश के अन्य भागों में हर तरह के अवैध निर्माणों को नियमित करने पर प्रतिबंध लगाते हुए साफ  किया था कि यदि किसी ने शिमला के कोर, ग्रीन व फोरेस्ट एरिया से बाहर अवैध निर्माण को नियमित करने का आवेदन 13 नवंबर 2017 से पहले कर रखा है तो ही वह नियमित हो सकेगा। इसके लिए नियमितिकरण शुल्क के साथ पांच हजार प्रति वर्ग फुट और व्यवसायिक भवन के अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए 10 हजार प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पर्यावरण मुआवजा देना होगा। यह शुल्क अन्य प्रकार के शुल्क से अलग होगा। प्रदेश में 13 नवंबर 2017 के पश्चात किए किसी भी अनाधिकृत निर्माण को नियमित नहीं किया जाएगा।