Monday, August 10, 2020 10:14 AM

हत्यारों की मौत का जश्न

सुरेश शर्मा

लेखक, नगरोटा बगवां से हैं

हैदराबाद के साइबराबाद में डाक्टर दिशा के साथ हुए बलात्कार तथा जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार देने के जघन्य अपराध ने पिछले दस दिनों से प्रशासनिक, सामाजिक तथा राजनीतिक दायरे में पूरे देश को हिला कर रख दिया है। तेलंगाना में हुए इस जघन्य व घृणित अपराध ने पूरे देश के लोगों, महिलाओं तथा गैर सरकारी संगठनों को डाक्टर दिशा के साथ घटित मामले में न्याय के लिए लामबंद कर दिया। लोकसभा व राज्यसभा में इस मामले की आग की आंच और तेज हो गई। पूरा देश शिवा, नवीन, केशवुलू और मोहम्मद आरिफ  इन चार बलात्कारियों व हत्यारों को फांसी देने की मांग करने लगा। इस मामले में तेलंगाना सरकार तथा प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी थू-थू होने लगी। पूरे देश में राजनीतिक चूलें हिलने लगी। इस बलात्कार एवं हत्याकांड की भयावहता ने पूरे देश भर की महिलाओं में अपराधियों के विरोध में तथा महिला अपराधों को लेकर रोष व आक्रोश व्याप्त होने लगा। शुक्रवार सुबह-सुबह साइबराबाद पुलिस जब चारों आरोपित अपराधियों को लेकर डाक्टर दिशा के मोबाइल तथा पावर बैंक को खोजने के लिए वारदात की जगह पर जांच के लिए ले गई तो आरोपियों ने भागने की कोशिश की तथा पुलिस पर पथराव कर डंडे व गोलियां चलाना शुरू कर दीं। इस पर पुलिस ने इन चारों आरोपित अपराधियों को एनकाउंटर कर मौत के घाट उतार दिया।

यह समाचार पूरे देश में आग की तरह फैल गया और बलात्कारियों तथा हत्यारों की मौत का जश्न मनाया जाने लगा। 27 नवंबर की रात हैदराबाद की एक बाहरी इलाके में टोल प्लाजा के पास एक महिला पशु चिकित्सक के साथ हैवानियत को अंजाम देने वाले इन चारों आरोपियों ने बलात्कार कर उसे जिंदा जला कर मार दिया था। यह पूरा प्रकरण मीडिया में आने के बाद सड़क से संसद तक उबाल आ गया। आरोपित अपराधियों को पुलिस एनकाउंटर में मौत के घाट उतार देने के बाद पूरे देश में उत्सव सा माहौल बन गया। महिला संगठनों ने इस समाचार पर जश्न मना कर पुलिस को मिठाइयां खिलाकर एनकाउंटर के लिए उनका धन्यवाद किया। जहां इस प्रकरण पर पूरा देश प्रसन्नता व्यक्त कर रहा है वहीं पर मुठभेड़ होने के उपरांत अपराधियों को मौत के घाट उतार देने की घटना सरकार, प्रशासन, पुलिस तथा न्याय प्रणाली पर बहुत से प्रश्न उठ खड़े होते हैं। मानवाधिकार, न्यायप्रिय, संविधान व न्याय प्रक्रिया का सम्मान करने वाले लोगों को यह तरीका गले नहीं उतर रहा। शीघ्र अतिशीघ्र न्याय चाहने वाले लोगों ने इस मुठभेड़ व आरोपियों को मौत के घाट उतार देने वाले पुलिसकर्मियों के इस कार्य का स्वागत किया है। ऐसी घटनाएं देश में भय का वातावरण तथा अराजकता फैलाती हैं। हमें अपने घर के बेटों को बेटियों युवतियों व महिलाओं के लिए तमीज और तहजीब सिखानी पड़ेगी। देश के राजनेताओं, कानून निर्माणकों तथा न्यायव्यवस्था को शीघ्र समाधान निकालना पड़ेगा अन्यथा लोग अपने हाथ से गोली बंदूक डंडों व पत्थरों से नए देना शुरू कर देंगे। अगर पुलिस की गोली से मौत अच्छी नहीं लगती तो डाक्टर दिशा के शीलहरण, बलात्कार तथा जिंदा जलाने की अनुमति अपराधियों को किसने दी? अगर हमारी न्याय प्रणाली व कानून व्यवस्था में परिवर्तन नहीं हुआ तो लोग अपने जख्मों व बदले की आग का बदला लेने के लिए इस तरह कानून को हाथ में लेना शुरू कर देंगे। कानून का डर सभी को होना अत्यंत आवश्यक है। यह वहशीपन मानवता के लिए अत्यंत खतरनाक है इसे कानून के डंडे से डर पैदा कर रोका जाना अति आवश्यक है।