Thursday, August 22, 2019 05:27 PM

हफ्ते का खास दिन

भारतीय स्वतंत्रता दिवस

 15 अगस्त 1947

यह ऐसा दिन है जब हम अपने महान राष्ट्रीय नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को अपनी श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने विदेशी नियंत्रण से भारत को आजाद कराने के लिए अनेक बलिदान दिए और अपने जीवन न्यौछावर कर दिए। 15 अगस्त 1947 को भारत के निवासियों ने लाखों कुर्बानियां देकर ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की थी। यह राष्ट्रीय पर्व भारत के गौरव का प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को सरकारी बिल्डिंगों पर तिरंगा झंडा फहराया जाता है तथा रोशनी की जाती है।

प्रधानमंत्री प्रातः 7 बजे लाल किले पर झंडा फहराते हैं और अपने देशवासियों को अपने देश की नीति पर भाषण देते हैं। हजारों लोग उनका भाषण सुनने के लिए लाल किले पर जाते हैं। स्कूलों में भी स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है और बच्चों में मिठाइयां भी बांटी जाती हैं। 14 अगस्त को रात्रि 8 बजे राष्ट्रपति अपने देश वासियों को संदेश देते हैं, जिसका रेडियो तथा टेलीविजन पर प्रसारण किया जाता है।  सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महायज्ञ का प्रारंभ महर्षि दयानंद सरस्वती ने प्रारंभ किया और अपने प्राणों को भारत माता पर मंगल पांडे ने न्यौछावर किया और देखते ही देखते यह चिंगारी एक महासंग्राम में बदल गई,  जिसमें झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, तांत्या टोपे, नाना साहेब, ‘सरफरोशी की तमन्ना’ लिए रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि देश के लिए शहीद हो गए। तिलक ने स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है का सिंहनाद किया और सुभाष चंद्र बोस ने कहा ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’। ‘अहिंसा’ और ‘असहयोग’ लेकर महात्मा गांधी और गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए ‘लौह पुरुष’ सरदार पटेल जैसे महापुरुषों ने कमर कस ली। 90 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त, 1947 को ‘भारत को स्वतंत्रता’ का वरदान मिला। भारत की आजादी का संग्राम बल से नहीं वरन सत्य और अहिंसा के सिद्धांत के आधार पर विजित किया गया। इतिहास में स्वतंत्रता के संघर्ष का एक अनोखा और अनूठा अभियान था जिसे विश्व भर में प्रशंसा मिली। मई, 1857 में दिल्ली के कुछ समाचार पत्रों में यह भविष्यवाणी छपी कि प्लासी के युद्ध के पश्चात 23 जून, 1757 ई. को भारत में जो अंग्रेजी राज्य स्थापित हुआ था, वह 23 जून , 1857 ई. तक समाप्त हो जाएगा। यह भविष्यवाणी सारे देश में फैल गई और लोगों में स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए जोश की लहर दौड़ गई।