हफ्ते का खास दिन

स्वर्गीय जगजीत सिंह

जन्मदिवस

8 फरवरी, 1941

जगजीत जी का जन्म 8 फरवरी, 1941  को राजस्थान के गंगानगर में हुआ था। पिता सरदार अमर सिंह धमानी भारत सरकार के कर्मचारी थे। जगजीत जी का परिवार मूलतः  भारत के पंजाब के रोपड़ जिला के दल्ला गांव का रहने वाला है।  जगजीत का बचपन का नाम जीत था। जगजीत का नाम बेहद लोकप्रिय गजल गायकों में शुमार है। शुरुआती शिक्षा गंगानगर के खालसा स्कूल में हुई और बाद पढ़ने के लिए जालंधर आ गए। डीएवी कालेज से स्नातक की डिग्री ली और इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया। उनका संगीत अत्यंत मधुर है और उनकी आवाज संगीत के साथ खूबसूरती से घुल-मिल जाती है।  जगजीत सिंह को सन 2003 में भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।  फरवरी 2014 में आपके सम्मान व स्मृति में दो डाक टिकट भी जारी किए गए। करोड़ों सुनने वालों के चलते सिंह साहब कुछ ही दशकों में जग को जीतने वाले जगजीत बन गए।  पिता की ख्वाहिश थी कि उनका बेटा भारतीय प्रशासनिक सेवा आईएएस में जाए, लेकिन जगजीत पर गायक बनने की धुन सवार थी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान संगीत मे उनकी दिलचस्पी देखकर कुलपति प्रोफेसर सूरजभान ने जगजीत सिंह जी को काफी प्रोत्साहित किया। उनके ही कहने पर वह 1965 में मुंबई आ गए। यहां से संघर्ष का दौर शुरू हुआ। जगजीत सिंह फिल्मी दुनिया में पार्श्वगायन का सपना लेकर आए थे। तब पेट पालने के लिए कालेज और ऊंचे लोगों की पार्टियों में अपनी पेशकश दिया करते थे। उन दिनों तलत महमूद, मोहम्मद रफी साहब जैसों के गीत लोगों की पसंद हुआ करते थे। रफी, किशोर, मन्नाडे जैसे महारथियों के दौर में पार्श्व गायन का मौका मिलना बहुत दूर था। जगजीत जी को संघर्ष के दिनों में कालेज के लड़कों को खुश करने के लिए तरह-तरह के गाने गाने पड़ते थे क्योंकि शास्त्रीय गानों पर लड़के हूट कर देते थे। जगजीत जी ने वही किया और पहला एलबम ‘द अनफॉरगेटेबल्स 1976, हिट रहा। जगजीत जी उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं, उन दिनों किसी सिंगर को एल पी लॉग प्ले डिस्क मिलना बहुत फख्र की बात हुआ करती थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि सरदार जगजीत सिंह धीमान इसी एलबम के रिलीज के पहले जगजीत सिंह बन चुके थे। बाल कटाकर असरदार जगजीत सिंह बनने की राह पकड़ चुके थे। जगजीत ने इस एलबम की कामयाबी के बाद मुंबई में पहला फ्लैट खरीदा था। इतना ही नहीं, जगजीत जी ने क्लासिकी शायरी के अलावा साधारण शब्दों में ढली आम-आदमी की जिंदगी को भी सुर दिए। अब मैं राशन की दुकानों पर नजर आता हूं, मैं रोया परदेस में, मां सुनाओ मुझे वह कहानी। जैसी रचनाओं ने गजल न सुनने वालों को भी अपनी ओर खींचा। शायर निदा फाजली, बशीर बद्र, गुलजार, जावेद अख्तर जगजीत सिंह जी के पसंदीदा शायरों में रहे। निदा फाजली के दोहों का एलबम इनसाइट कर चुके हैं। गजल के बादशाह कहे जानेवाले जगजीत सिंह का 10 अक्तूबर 2011 की सुबह 8 बजे मुंबई में देहांत हो गया। उन्हें ब्रेन हैमरेज होने के कारण 23 सितंबर को मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। ब्रेन हैमरेज होने के बाद जगजीत सिंह की सर्जरी की गई, जिसके बाद से ही उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। वह तब से आईसीयू वॉर्ड में ही भर्ती थे। जिस दिन उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ, उस दिन वह सुप्रसिद्ध गजल गायक गुलाम अली के साथ एक शो की तैयारी कर रहे थे।