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विश्व पोलियो दिवस : ‘24 अक्तूबर’

बीमारी का शिकार अधिकांश बच्चे होते हैं। पोलियो को पोलियोमाइलाइटिस’ या शिशु अंगघात’ भी कहा जाता है। यह ऐसी बीमारी है, जिससे कई राष्ट्र बुरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं। हालांकि विश्व के अधिकतर देशों से पोलियो का खात्मा पूरी तरह से हो चुका है, लेकिन अभी भी विश्व के कई देशों से यह बीमारी जड़ से खत्म नहीं हो पाई है...

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ ने 2012 के प्रारंभ में भारत को पोलियो ग्रसित देशों की सूची से हटा दिया। भारत में पोलियो के एकमात्र मामले की सूचना 13 जनवरी, 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा से प्राप्त हुई थी जबकि 2010 में इसी अवधि के दौरान 39 मामले प्रकाश में आए थे। विश्व पोलियो दिवस प्रत्येक वर्ष ‘24 अक्तूबर’ को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य पोलियो जैसी बीमारी के विषय में लोगों में जागरूकता फैलाना है। पोलियो एक संक्रामक बीमारी है, जो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इस बीमारी का शिकार अधिकांश बच्चे होते हैं। पोलियो को ‘पोलियोमाइलाइटिस’ या शिशु अंगघात’ भी कहा जाता है। यह ऐसी बीमारी है, जिससे कई राष्ट्र बुरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं। हालांकि विश्व के अधिकतर देशों से पोलियो का खात्मा पूरी तरह से हो चुका है, लेकिन अभी भी विश्व के कई देशों से यह बीमारी जड़ से खत्म नहीं हो पाई है।

पोलियो क्या है?

पोलियोमाइलाइटिस अथवा पोलियो एक संक्रामक रोग है, जो वायरस के द्वारा फैलता है। यह लक्षण सामान्य से तीव्र हो सकते हैं और इसमें आम तौर पर टांगों में लकवा हो जाता है। पोलियो का वायरस मुंह के रास्ते शरीर में प्रविष्ट होता है और आंतों को प्रभावित करता है। वायरय के शरीर में प्रवेश करने के कुछ ही घंटों बाद इससे पक्षाघात तक हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि यह लक्षण तीन से पांच दिनों में प्रदर्शित हों।

लक्षण

पोलियो की बीमारी में मरीज की स्थिति वायरस की तीव्रता पर निर्भर करती है। अधिकतर स्थितियों में पोलियो के लक्षण ‘फ्लू’ जैसे होते हैं।  इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार होते हैं:-

पेट में दर्द होना, उल्टियां आना, गले में दर्द,  सिर में तेज दर्द,  तेज बुखार,  खाना निगलने में कठिनाई होना आदि।

वैक्सीन का आविष्कार

प्रति वर्ष ‘24 अक्तूबर’ को ‘विश्व पोलियो दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इसी महीने में जोनास सॉक का जन्म हुआ था। जोनास सॉक वर्ष 1955 में पहली पोलियो वैक्सीन का आविष्कार करने वाली टीम के प्रमुख थे। पोलियो रोधक दवा की कुछ बूंदे बच्चों को पिलाई जाती हैं। कई देशों में पोलियो से निजात दिलाने के लिए यह वैक्सीन बहुत महत्त्वपूर्ण साबित हुई है।

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