Saturday, January 25, 2020 11:39 PM

हमीरपुर में बनेगा लैंड बैंक

सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रशासन ने निकाला तोड़

हमीरपुर  - वर्षों से सरकारी जमीनों पर कुंडली मारकर बैठे अवैध कब्जाधारियों से उस भूमि को छुड़ाने का जिला प्रशासन ने तोड़ निकाल लिया है। जिला प्रशासन के प्रयासों से हमीरपुर में लैंड बैंक बनाने की तैयारी की जा रही है। इस लैंड बैंक में विभिन्न प्रयोजनों के लिए उपलब्ध सरकारी व गैर-सरकारी भूमि की जानकारी शामिल की जाएगी। इसका एक लाभ तो यह होगा कि सरकारी जमीन अवैध कब्जाधारियों के चंगुल से छूट सकेगी। दूसरा जिला प्रशासन को यह अंदाजा लग पाएगा कि उनके पास कितनी और कहां-कहां ऐसी सरकारी जमीन है, जिसे सरकारी इस्तेमाल में लाया जा सकता है जिससे जनता को भी फायदा हो सके। जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन ने प्रारंभिक चरण में हमीरपुर जिला मुख्यालय के आसपास पांच किलोमीटर की परिधि में यह भूमि चिह्नित करने का निर्णय लिया है। लैंड बैंक का डाटा तैयार करने के लिए कलर कोडिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा, ताकि उपलब्ध सरकारी व निजी भूमि की पहचान आसानी से हो सके। जिला प्रशासन की ओर से 15 जनवरी, 2020 तक का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें सरकारी और निजी भूमि की पहचान की जाएगी। रेवन्यू डिपार्टमेंट के अलावा अन्य विभाग भी इस काम में जिला प्रशासन की मदद करेंगे। बाद में उपलब्ध भूमि का नक्शा तैयार होते ही इसे जिला प्रशासन की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। जानकारों की मानें तो जब प्रशासन के पास लैंड बैंक में जमीन की पूरी जानकारी आ जाएगी तो शहर और इसके आसपास के इलाकों में प्रशासन आसानी से विकास के कार्य करवा सकेगा।

हमीरपुर में अवैध कब्जों की भरमार

जिला मुख्यालय हमीरपुर की बात करें तो छोटे से इस शहर में अवैध कब्जों की भरमार है। शहर की गलियां इतनी तंग हो चुकी हैं कि जहां की जीप योग्य मार्ग थे, वहां अब दो राहगीरों को एक साथ पैदल निकलना मुश्किल हो जाता है। गलियों में मकानों के छज्जे इतने आगे तक बढ़ा दिए गए हैं कि पता ही नहीं लगता कि यह आम रास्ता है या घर के बीचोंबीच रास्ता बना दिया गया है। कोई भी शहरवासी खुलकर सामने नहीं आना चाहता कुछ लोग पड़ोस से बिगाड़ना नहीं चाहते तो कुछ खुद डिफाल्टरों की श्रेणी में हैं।

अभी शहर की मुख्य सड़क के किनारे बन रहे फुटपाथ

हमीरपुर शहर में कुछ समय पहले जहां राहगीरों को चलने के लिए जगह नहीं मिलती थी। आज वहां जिला प्रशासन के प्रयासों से फुटपाथ बनकर तैयार हो रहे हैं। जहां पहले सड़कों के किनारे दुकानदार अपनी दुकानों के आगे भी दुकानदारी सजाकर रखते थे, वहां जब निशानदेही हुई तो लगभग तीन से चार फुट जगह सरकारी निकली। थोड़ा-बहुत विरोध भी हुआ, लेकिन प्रशासन ने अपनी मुहिम जारी रखी और काम होता रहा। आज शहर में फुटपाथ बनकर तैयार हो रहे हैं और शहर खूबसूरत भी लगने लगा है।