Tuesday, July 16, 2019 10:05 PM

हर जिला में बनाएंगे पशु अभ्यारण्य

सरकार ने कोर्ट में दिया शपथपत्र, लावारिस पशुओं की समस्या होगी दूर

शिमला - हिमाचल सरकार ने शपथपत्र के माध्यम से गुरुवार को अदालत को बताया कि लावारिस पशुओं के रख-रखाव के लिए हिमाचल प्रदेश गौवंश संरक्षण औऱ संवर्द्धन अधिनियम-2018 बनाया गया है। इस अधिनियम के तहत प्रदेश के हरेक जिला में ‘पशु अभ्यारण्य’ स्थापित किया जाएगा, जहां पर लावारिस पशुओं, खासतौर पर गाय को सुरक्षित रखा जाएगा। अदालत को बताया गया कि अधिनियम के नियमों के अनुसार सिरमौर, सोलन, ऊना और हमीरपुर में ‘पशु अभ्यारण्य’ बनाए जाने के लिए उचित राशि जारी कर दी गई है और प्रदेश के अन्य जिलों में ‘पशु अभ्यारण्य’ बनाए जाने के लिए भूमि तलाशने बारे प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। जनहित याचिका की सुनवाई के पश्चात न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की  खंडपीठ ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वह शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि सिरमौर, सोलन, ऊना, और हमीरपुर में ‘पशु अभ्यारण्य’ बनाए जाने बारे कितनी प्रोग्रेस है तथा कितनी राशि खर्च की जा चुकी है और बाकी जिलो में पशु अभ्यारण्य स्थापित करने बारे क्या कदम उठाए गए हैं। हाई कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों में राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह सुनिश्चित करे कि हरेक ‘पशु अभ्यारण्य’ में सारी मूलभूत सुविधाएं हों, जैसे पशु औषधालय, पैरा वेटरनरी स्टाफ, पशुओं की समय-समय पर जांच के लिए डाक्टर, दवाइयां और औजार, जिनसे जख्मी पशुओं की चिकित्सा की जा सके। हाई कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा था कि पशु अभ्यारण में विपरीत मौसम के लिए पशुओं को शेड बनाया जाए और उनके चारे के लिए उचित प्रबंध किया जाए। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह आम जनता को जागरूक करे, ताकि लोग लावारिस पशुओं को पशु अभ्यारण में चारा दान करें। ज्ञात रहे कि वर्ष 2014 में न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने प्रार्थी भारतीय गौवंश रक्षण परिषद हिमाचल प्रदेश द्वारा जनहित में दायर याचिका पर राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि प्रदेश की सभी सड़कों को 31 दिसंबर, 2014 तक लावारिस पशु मुक्त बनाया जाए। अदालत ने राज्य सरकार, नगर परिषद, नगर पंचायत, नगर पालिका और ग्राम पंचायतों को लावारिस पशुओं के लिए गोसदन और गोशाला बनाए जाने के भी आदेश दिए थे। अदालत ने पूरे प्रदेश में गोहत्या और गोमांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। अदालत ने पशु पालन विभाग को आदेश दिए थे कि पशुओं को टैग लगाए जाएं और पुलिस से पूछा था कि  पशुओं से कू्ररता के कितने मामले दर्ज किए गए और क्या कार्रवाई की गई। अदालत ने इन आदेशों की अक्षरशः अनुपालना के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव को जिम्मेदार ठहराया था। हाई कोर्ट के इस निर्णय को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी और सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेशों पर स्थगन आदेश पारित किए थे। प्रार्थी ने हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेशों की अनुपालना के लिए जनहित में याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2014 में पारित आदेशों की अनुपालना करने में राज्य सरकार नाकाम रही है। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए मामले बारे अदालत को बताए। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट को बताया गया कि  लावारिस पशुओं के रख-रखाव बारे राज्य सरकार द्वारा पॉलिसी बनाई जा रही है। इस पॉलिसी के तहत प्रदेश के हरेक जिला में ‘पशु अभ्यारण्य’ स्थापित किए जाएंगे, जहां पर लावारिस पशु, खासतौर पर गाय को सुरक्षित रखा जाएगा। मामले की सुनवाई 14 अगस्त को निर्धारित की गई है।