Tuesday, September 17, 2019 01:46 PM

हर बार टीजीटी कैडर को डंडा क्यों

सरकार-शिक्षा विभाग की अनदेखी पर बिफरे, 29 साल बाद भी एक बार प्रोमोशन नहीं

हमीरपुर -25 हजार की विशाल संख्या वाले टीजीटी कैडर ने मुख्याध्यापकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षा उपनिदेशकों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों और कोटेे के संदर्भ में किए जा रहे भ्रामक प्रचार पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। समूचे टीजीटी कैडर ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि वह तथ्यों की वास्तविकता, सेवा नियमों व परिस्थितियों के गंभीर और संवेदनशील आकलन के बाद ही कोई अंतिम निर्णय ले कि किसका कोटा बढ़ना चाहिए या घटना चाहिए। विज्ञान अध्यापक संघ के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष मनोज पाल सिंह परिहार ने कहा कि 2005-06 में सरकार एक तबके के भ्रामक प्रचार और झूठे आंकड़ों से प्रभावित होकर टीजीटी कोटे को 60 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी कर चुकी है। जब इस अन्यायपूर्ण निर्णय का टीजीटी कैडर के शिक्षकों ने कड़ा विरोध दर्ज कर सड़कों पर निकले, तो उनके न्यायोजित विरोध को देखते हुए तत्कालीन सरकार ने गतिरोध को दूर करने के लिए उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस उच्च स्तरीय बैठक में सक्षम अधिकारियों द्वारा परिस्थितियों का जायजा लेने के बाद माना और अपनी गलती स्वीकारते हुए कहा कि टीजीटी कोटे को घटाने के संदर्भ में तथ्यों को व्यापक पुष्टि और उनके आंकलन एवं मूल्यांकन करने में गंभीर चूक की गई है। उन्होंने कहा कि हर बार सरकारों और विभाग का डंडा टीजीटी कैडर के विरुद्ध ही क्यों चलता है। मुख्याध्यापकों के पद 1459 से 822 पदों तक सिमट गए हैं। मुख्याध्यापकों के पदों के कम होने के कारण टीजीटी जो पहले से ही पोस्ट ग्रेजुएट हैं, लेकिन कमीशन पास कर और स्थायी नौकरी पाने के चक्कर में टीजीटी बने थे। मजबूरी में लेक्चरर के पद पर परिस्थितियों को कोसते हुए टीजीटी कैडर छोड़ रहे हैं। भेदभाव और गलत नीतियों के कारण पांच-पांच कक्षाओं के दो-दो बोर्ड विषयों को पढ़ाने वाले आज 29 वर्ष के कार्यकाल के

बाद भी पहली पदोन्नति को तरस रहे हैं।

ऐसे में 50ः50 के निर्धारित कोटे में छेड़छाड़ बड़े अन्यायपूर्ण विवाद की शुरुआत बन सकती है। अतः मुख्याध्यापक अधिकारी संवर्ग संघ के प्रदेशाध्यक्ष विजय गौतम, प्रदेश पदोन्नत प्रवक्ता संघ के प्रदेशाध्यक्ष रतनेश्वर सलारिया, केवल ठाकुर, यशवीर पटियाल, विज्ञान अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय शर्मा, अमृत महाजन, राजीव राठौर सहित समूची कार्यकारिणी ने सरकार से न्याय से गुहार लगाई है।