Tuesday, February 18, 2020 07:43 PM

हांफने लगी परिवार नियोजन योजना

शिमला - जनसंख्या पर काबू पाने के लिए हम दो हमारे दो के तहत परिवार नियोजन योजना अब प्रदेश में फिर से हांफने लगी है। जानकारी के मुताबिक अस्पतालों में कई केस ऐसे आ रहे हैं जो ये शिकायत कर रहे हैं कि दो से तीन वर्ष हो गए हैं लेकिन उन्हें परिवार नियोजन के बाद सरकारी योजना से मिलने वाला आर्थिक लाभ ही नहीं मिल पा रहा है। इसका कारण बजट की कमी बताया रहा है, लेकिन ऐसा होने से योजना पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कई जिलों में वर्ष 2018 के मामले भी क्लीयर नहीं किए गए हैं। परिवार नियोजन में एनएसबी के तहत 1100 रुपए नियोजन और दो सौ रुपए काउंसलिंग को लेकर दिए जाते हैं। वहीं लेपरोस्कोपी के तहत परिवार नियोजन करवाने के लिए छह सौ रुपए अर्थिक मदद और 150 रुपए कांउसलिंग के लिए दिए जाते हैं। बताया जा रहा है कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ये राशि देय होती है, लेकिन कई जिलों से ये शिकायतें आ रही है कि ये राशि कईयों को वर्षों से नहीं मिल पा रही है। इसमें ये आर्थिक लाभ दंपतियों को आरटीजीएस के तहत किया जाता है जो उन्हें वर्षो के बाद मिल पा रहा है। प्रदेश में जनसंख्या गणना पर गौर करें तो वर्ष 2011 गणना के तहत प्रदेश कर आबादी 68 लाख 64 हजा़र 602 है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि ये ग्राफ भी तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसमें परिवार नियोजन पर राष्ट्रीय स्तर पर फोकस किया जा रहा है। ऐसे में हिमाचल में ये पैसा ही लोगों को मिलने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर सवाल तो ये उठने लगे है कि जब सरकार इस योजना को स्वास्थ्य के अपने बेहतर कार्यक्रमों में गिनती है, लेकिन इसकी असल तस्वीर सामने आने लगी है, जिसमें पुरूष वर्ग ही नहीं बल्कि महिला वर्ग को भी परिवार नियोजन की राशि मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ा है। ये भी आवाज़ उठी है कि एक बच्चे के बाद परिवार नियोजन करवाने के बाद भी यही आर्थिक लाभ दंपति को मिलता है। वहीं दो बच्चों के बाद अपनाए जाने वाले परविर नियोजन के बाद दंपति को यही लाभ मिल रहा है।