हाईटेक एजुकेशन की पटरी पर मां की नगरी कांगड़ा

बेहतर कल के लिए हाईटेक शिक्षा की पटरी पर दौड़ रही मां बज्रेश्वरी की नगरी कांगड़ा एजुकेशन हब बनकर उभरी है। लाखों छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहे कांगड़ा के स्कूलों ने ऐसी क्रांति लाई कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचल ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों का कल संवार रहे कांगड़ा में क्या है शिक्षा की कहानी, बता रहे हैं हमारे संवाददाता

— राकेश कथूरिया

माता
बजे्रश्वरी देवी की नगरी कांगड़ा व इसके आसपास के दायरे में मौजूदा समय में करीब एक दर्जन निजी स्कूल शिक्षा मुहैया करवा रहे हैं। यहां इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं का आंकड़ा 7000 पार कर गया है। 1905 के बाद जीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल कांगड़ा ने निजी क्षेत्र में अपनी गतिविधियां शुरू की थीं। अब करीब एक शताब्दी बाद यहां निजी स्कूलों की बाढ़ सी आ गई है। साल 1918 में यह हाई स्कूल अपग्रेड हुआ और 1920 में इसे स्थायी मान्यता हासिल हुई। मौजूदा समय में कांगड़ा व इसके आसपास के क्षेत्र में करीब एक दर्जन से भी ऊपर स्कूल निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं, जिनमें मॉडर्न पब्लिक स्कूल कांगड़ा, डीएवी स्कूल, जीएवी पब्लिक स्कूल, महर्षि विद्या मंदिर स्कूल, न्यू मॉडल पब्लिक स्कूल, रेनबो इंटरनेशनल स्कूल घुरकड़ी, आदर्श पब्लिक स्कूल मटौर, मंगतराम मेमोरियल पब्लिक स्कूल, एवरेस्ट पब्लिक स्कूल, स्कॉलर्ज इंटरनेशनल स्कूल मटौर, माउंट व्यू पब्लिक स्कूल इच्छी, माउंट कार्मल स्कूल गगल, सहित कई स्कूल यहां शिक्षा सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं।

200 छात्रों के लिए 26 शिक्षक

सरकारी स्कूल के साथ प्राइवेट स्कूलों की तुलना की जाए, तो राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कछियारी में छात्र-छात्राओं की संख्या मात्र 200 है, लेकिन अध्यापकों की संख्या 26 है और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मटौर में छात्रों की संख्या 276 है और यहां टीचर 24 उपलब्ध हैं।

शेड्यूल में ही हैं एक्स्ट्रा एक्टीविटीज़

आधुनिक युग में प्राइवेट स्कूलों के बच्चों के स्कूल बैग्स का वजन नियमों को दरकिनार कर भारी हुआ है, तो उसके पीछे व्यवस्था भी कहीं न कहीं जिम्मेदार है। अन्य गतिविधियों की बात की जाए, तो स्कूलों के शेड्यूल में यह शामिल है, पर हकीकत से कोसों दूर। कुछ प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की भीड़ बढ़ी है, तो पढ़ाई पूरी करने के लिए बच्चों को ट्यूशन का सहारा भी लेना पड़ रहा है। कुछ स्कूलों में खेलकूद गतिविधियां चलाने के लिए मैदान इत्यादि के अलावा अन्य इंतजाम भी किए गए हैं। बावजूद इसके कई स्कूलों में ऐसी सुविधाएं मुहैया नहीं हैं। शहर के कई स्कूल बेहतरीन शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य पर खरा उतरे हैं। इन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चे डाक्टर, इंजीनियर व प्रशासनिक पदों तक पहुंचने में कामयाब हुए हैं।

प्रशासन से बॉलीवुड तक सितारे

जीएवी ने हर क्षेत्र में बनाई जगह

जिला कांगड़ा में सीबीएसई की गतिविधियों के संचालन को बखूबी अंजाम दिया जा रहा है। अब तक असंख्य डाक्टर व इंजीनियर देश को प्रदान कर चुका जीएवी पब्लिक स्कूल जहां सेना में भी अपनी जड़ें जमा चुका है, वहीं दो पूर्व छात्र बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री कर चुके हैं। एक छात्र आईएएस कर देश का रेवेन्यू संभाल रहा है, तो एक हिमाचल प्रशासन में जीएवी का नाम रोशन कर रही हैं। भविष्य की योजनाएं गिनाते हुए श्री सिंह ने बताया कि स्कूल में सेटेलाइजर के माध्यम से कक्षाएं शुरू की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त स्मार्ट क्लासरूम की स्मार्ट स्क्रीन द्वारा विद्यार्थी नवीन तकनीकों की जानकारी पाते हैं। इंग्लैंड के क्राशा स्कूल के साथ  ग्लोबल पार्टनरशिप करने वाला जीएवी प्रदेश का पहला स्कूल है और 14 शिक्षक व छह छात्र इंग्लैंड का भ्रमण कर चुके हैं। वर्ष 1987 से आरंभ जीएवी पब्लिक स्कूल ने तीन दशकों में जो मुकाम हासिल किया है, वह शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल है। नर्सरी से जमा दो कक्षा तक की संपूर्ण शिक्षा अंग्रेजी माध्यम में दी जाती है। नर्सरी व यूकेजी कक्षाओं में प्ले-वे मैथड अपनाया जाता है। छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए उन्हें वीडियो कैसेट्स द्वारा रुचिकर कार्यक्रम दिखाए जाते हैं। बड़े छात्रों को आर्मी, नेवी व एयरफोर्स मोटिवेशनल कैंप, वर्कशाप व देश के प्रतिष्ठित संस्थानों का भ्रमण करवाया जा रहा है। जीएवी में जिला कांगड़ा के शिक्षकों की सहायता के लिए समय समय पर वर्कशॉप  लगाई जा रही हैं। स्वच्छ भारत अभियान में योगदान देकर स्कूल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसा पत्र से अविभूत हुआ। स्कूल की उपलब्धियों पर गर्व करते हुए प्रधानाचार्य सुनील कांत चड्ढा कहते हैं कि अभी तो उन्नति की मात्र शुरुआत है, मंजिल तक पहुंचने के लिए संकल्प व विश्वास की जरूरत है और अविरल तरक्की के लिए शिक्षक, छात्र व अभिभावक तपस्यारत हैं।

किस स्कूल में कितने छात्र

जीएवी पब्लिक स्कूल कांगड़ा (1987) —छात्र 1567, टीचर 65

जीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (1905) —छात्र 600, टीचर 40

डीएवी पब्लिक स्कूल (2001) — छात्र 700, टीचर 32

स्कॉलर्ज इंटरनेशनल स्कूल (2005) — छात्र 1000, टीचर 60

एवरेस्ट पब्लिक स्कूल — छात्र 85, टीचर सात

मॉडर्न पब्लिक स्कूल कांगड़ा (1977) — छात्र 450, टीचर 30

महर्षि विद्या मंदिर पब्लिक स्कूल (1990) — छात्र 239, टीचर 15

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला — छात्र 280, टीचर 27

जीएसएस कछियारी — छात्र 200, टीचर 26

जीएसएस मटौर — छात्र 276, टीचर 24

टीएमसी-निफ्ट-पोलिटेक्नीक कालेज से पहचान

उच्च शिक्षा के लिए कांगड़ा की पहचान डीएवी कालेज से भी है। यह कालेज हिमाचल प्रदेश का आदर्श संस्थान रहा है। वर्षों तक यही कालेज शहर व गांवों के बच्चों की पहली पसंद रहा है। यहां दूरदराज गांवों के बच्चे अच्छी शिक्षा के लिए आते हैं। निफ्ट जैसे प्रशिक्षण संस्थान भी लोगों की पहली पसंद हैं।आजकल हर कोई हर तरह की सहूलियत चाहता है और ग्रामीण और शहरी लोगों को कांगड़ा शहर सारी सुविधाएं देने में सक्षम है। लोगों में बढ़ती जागरूकता और कांगड़ा शहर द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में प्रदान करवाई गई सुविधाओं ने कांगड़ा जैसे शहर को शिक्षा का केंद्र बनकर उभरने में मदद की है। कुछ साल से स्कूली स्तर की पढ़ाई के लिए भी कांगड़ा अपनी पहचान बनाने लगा है।यहां इस शहर में कई कोचिंग सेंटर भी खुल गए हैं। निजी क्षेत्र में भी अच्छे संस्थान यहां खुले हैं, जो स्तरीय शिक्षा दे रहे हैं। पोलिटेक्नीक कालेज का भी शिक्षा के क्षेत्र में काफी योगदान रहा है। कांगड़ा में ही आसपास के कस्बों में भी कई संस्थान शुरू हो गए हैं। इन्ही संस्थानों में स्कॉलर्स इंटरनेशनल स्कूल व शरण कालेज ऑफ एजुकेशन भी शामिल हैं। इसके अलावा टांडा मेडिकल कालेज से भी शहर की पहचान है।

प्राइवेट स्कूल में ही दाखिला चाहते हैं पेरेंट्स

अभिभावक प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए तवज्जो दे रहे हैं और सीबीएसई की पढ़ाई करवाना भी अभिभावकों की इच्छाओं में शुमार है। जीएवी पब्लिक स्कूल कांगड़ा की बात करें, तो यहां छात्र-छात्राओं की संख्या 1567 है, जबकि अध्यापक 65 मौजूद हैं। बावजूद इसके जीएवी पब्लिक स्कूल कांगड़ा में छात्र-छात्राओं की भीड़ बढ़ रही है और यहां बच्चों को पढ़ाने से अभिभावक फख्र महसूस करते हैं। इसी साल कांगड़ा में खुले एवरेस्ट पब्लिक स्कूल में जमा एक और जमा दो की कक्षाएं चल रही हैं और छात्रों की संख्या भी 85 है।

ईको फ्रेंडली हैं सरकारी स्कूल

जहां तक सरकारी स्कूलों की बात करें, तो राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कांगड़ा में पौधारोपण को तवज्जो देकर पर्यावरण को शुद्ध रखने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा भी अनेक गतिविधियां चलाई गई हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कछियारी में हालांकि छात्र-छात्राओं की संख्या कम है, लेकिन यहां खुले हवादार क्लासरूम के अलावा लैब एनएसएस स्काउट एंड गाइड, लिटरेसी क्लब, ईको क्लब और पौधों को तवज्जो दी गई है। जहां तक मटौर स्थित वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का सवाल है, तो यहां भी स्मार्ट क्लासरूम बनाए गए हैं खेलने के लिए बाकायदा ग्राउंड छात्र-छात्राओं के लिए है। इसके अलावा भी अन्य एक्टिविटी यहां चलाई जाती हैं। यहां डिग्री कालेज खोलने की वजह से टायलट की समस्या से छात्र-छात्राओं को दो-चार होना पड़ता है।

80 के दशक में हुई नए शिक्षा केंद्र की शुरुआत

मां बज्रेश्वरी की पावन नगरी कांगड़ा, जिसकी पहचान हिमाचल प्रदेश के एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र से भी रही है, आज एक नए शिक्षा केंद्र के रूप में उभरा है। वैसे इसकी शुरुआत 80 के दशक में हो गई थी, जब डीएवी कालेज ने हिमाचल के एक अग्रणी संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। तब न केवल पूरे हिमाचल, बल्कि पंजाब के भी कुछ क्षेत्रों के विद्यार्थी कांगड़ा का रुख करते थे। डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज, निफ्ट, बहुतकनीकी संस्थान जैसे संस्थानों ने यह परंपरा आगे बढ़ाई है। कांगड़ा में इसके अतिरिक्त कई निजी शिक्षण संस्थान, जिसमें बीएड कालेज, नर्सिंग कालेज, स्कूल और कोचिंग संस्थान हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में सहयोग दे रहे हैं। कांगड़ा के व्यापारिक केंद्र होने से यहां का सस्ता रहन-सहन भी विद्यार्थियों को लुभाता है।

कांगड़ा सरकारी कालेज में देरी करती है हैरान

कांगड़ा में हालांकि सरकारी महाविद्यालय का इतना देरी से स्थापित होना हैरान करता है। घोषणा के बावजूद इंजीनियरिंग कालेज यहां न खोलकर शिफ्ट कर देना आज भी कांगड़ा के लोगों को टीस दे जाता है। अगर बहुतकनीकी संस्थान को सेंट्रल यूनिवर्सिटी के साथ जोड़कर एक बेहतर इंजीनियरिंग कालेज में बदल दिया जाए, तो लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा का दंश झेल रहे कांगड़ा को एक राहत दी जा सकती है। क्षेत्र में अच्छे संस्थानों के खुलने से न केवल व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, बल्कि युवाओं को भी अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण कई सालों में मेडिकल कालेज और निफ्ट जैसे संस्थानों में कांगड़ा के आसपास के विद्यार्थियों की बढ़ती हुई संख्या से मिलता है

— नीरज सूद, शिक्षाविद

जितना संवारा, स्कूलों-कालेजों ने ही संवारा

अगर वर्तमान में कांगड़ा शहर शिक्षा के क्षेत्र में प्रसिद्ध हुआ है, तो इसका सारा श्रेय यहां के स्कूलों और कालेजों में दी जा रही उच्चकोटि की शिक्षा को जाता है। उन अध्यापकों को जाता है, जिन्होंने छात्र-छात्राओं को उनके लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की। दूसरा लोगों के दिमाग में यह धारणा भी बन चुकी है कि कांगड़ा शहर में बहुत अच्छे स्कूल और कालेज हैं, जो हीरे तराशते हैं। लोगों की इसी सोच के आधार पर आज कांगड़ा शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है

— अंजना शर्मा, शिक्षाविद

कई जिलों के छात्रों को मिलेगा फायदा

नव हिमाचल प्रदेश के केंद्र बिंदू में स्थित कांगड़ा नगर एक उभरते हुए शिक्षा केंद्र के रूप में अपने संलग्न हमीरपुर, मंडी, चंबा और ऊना जिलों के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंजिल हो सकता है। बशर्ते यहां का बुद्धिजीवी वर्ग और राजनेता अपनी-अपनी महत्त्वाकांक्षाओं का परित्याग कर एक ईमानदार प्रयास करें। नव हिमाचल का केंद्र बिंदू होने के कारण कांगड़ा नगर सलंग्न जिलों के विद्यार्थी वर्ग के लिए न केवल एक आसान पहुंच है, बल्कि साथ ही इस क्षेत्र का नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य इसे अध्ययन संबंधी कार्यों हेतु एक बहुत ही उम्दा पृष्ठभूमि से भी  अलंकृत करता है। यही कारण है कि आज कांगड़ा नगर एक महत्त्वपूर्ण शिक्षा हब के रूप में न केवल उभर रहा है, बल्कि नगर की खुली शांत वादियां इस क्षेत्र के शिक्षा के एक विशाल हब के रूप में विकसित होने की तमाम खूबियां और संभावनाएं भी प्रदान करती हैं

— अशोक गौतम, शिक्षाविद

आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ रहा शहर

जिला कांगड़ा में शिक्षा का स्तर दिन-प्रतिदिन बढ़ता  जा रहा है। आज कांगड़ा में आधुनिक तकनीक की वजह से शिक्षा का काफी विस्तार हुआ है। कांगड़ा में बहुतकनीकी संस्थान, निफ्ट, जीएवी पब्लिक स्कूल तथा एमसीएम डीएवी कालेज अन्य ऐसे संस्थान हैं, जो शिक्षा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं और छात्रों को यहां उच्च व आधुनिक तकनीक द्वारा शिक्षा प्राप्त हो रही हैं। यहां हजारों की संख्या में छात्र हर वर्ष शिक्षा प्राप्त कर भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। यही कारण है कि कुछ सालों में कांगड़ा शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख स्थान बनकर उभरा है और पूरे प्रदेश के लिए यह गर्व की बात है। यहां सभी सरकारी व गैर सरकारी शिक्षक बच्चों का सही सन्मार्ग करते हुए उन्हें उच्च पदों पर पहुंचा रहे हैं, जिसमें मुख्य रूप से टांडा मेडिकल कालेज में कई डाक्टर भी शामिल हैं। अतः वह दिन दूर नहीं, जब कांगड़ा एक आधुनिक शिक्षा का परिपूर्ण केंद्र बन जाएगा

— रीना कुमारी, शिक्षाविद

खेलकूद में भी आगे हैं शहर के स्कूल

शहर के स्कूलों में स्वस्थ प्रतियोगिता स्कूलों के स्तर में सुधार ला रही है। ऐसे स्कूलों में अध्यापकों के लिए वर्कशॉप का आयोजन हो रहा है, जिससे शिक्षकों के ज्ञान का स्तर बढ़ता है। शहरी स्कूल अन्य स्कूलों से इसलिए बेहतर हैं, क्योंकि इनमें अधिक से अधिक सुविधाएं दी जाती हैं। मसलन स्वास्थ्य सुविधाएं, खेलकूद से संबंधित सुविधाएं बच्चों का जीवन स्तर सुधारती हैं। खेलों के क्षेत्र में भी ऐसे स्कूल प्रदेश में अग्रणी हैं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में बच्चे हिस्सा लेते हैं, तो अभिभावकों को खुशी मिलती है

ईशा गुप्ता, अभिभावक

सरकारी स्कूलों में प्राइमरी एजुकेशन कमजोर

आजकल अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी की जगह निजी स्कूलों में भेज रहे हैं, क्योंकि वे अपने बच्चों को उज्ज्वल भविष्य देना चाहते  हैं, लेकिन जब नौकरी की बात आती है, तो वह उन्हें सरकारी चाहिए। यहां बात आती है एजुकेशन सिस्टम की, सरकारी स्कूलों की प्राइमरी एजुकेशन कमजोर है। बच्चों की जब प्रारंभिक शिक्षा का आधार मजबूत होगा, तभी बच्चे ग्रोथ करेंगे। लिहाजा सबसे पहले जो शिक्षक हैं, उनमें इतनी क्षमता हो कि बच्चों का बेस बना सकें। वह खुद आरक्षण के मारे न हों कि मिड-डे मील खाएं और घर जाएं

माधवी शर्मा, अभिभावक

निजी संस्थान दे रहे बेहतरीन सुविधाएं

प्राइवेट स्कूलों में दी जा रही सुविधाएं अभिभावकों का ध्यान खींचती हैं। आजकल हर प्राइवेट स्कूल आधुनिक तरीकों से शिक्षा प्रदान कर रहा है। विभिन्न माध्यमों से बच्चों के लिए शिक्षा को रोचक बनाया जा रहा है। खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाया जाता है। शिक्षा के साथ-साथ अन्य प्रकार की गतिविधियां बच्चों को सिखाई जा रही हैं। कुछ स्कूलों में जो अभिभावक नौकरी करते हैं, उनके बच्चों के लिए डे-बोर्डिंग की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाती है। ट्रांसपोर्ट के भी अच्छे इंतजाम हैं

मोनिका डढवाल, अभिभावक

क्वालिटी एजुकेशन चाहते हैं अभिभावक

सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के बावजूद लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। उसके पीछे कारण यह है कि लोग अपने बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देना चाहते हैं। उनका तर्क है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से सरकारी तंत्र अन्य कार्य भी लेता है। इस वजह से पढ़ाई मुकम्मल नहीं हो पाती, जबकि प्राइवेट स्कूल वाले बराबर टाइम बच्चों को देते हैं। तीन-चार दशक पहले जब अधिकारियों के बच्चे भी सरकारी स्कूल में पढ़ते थे और अमीर-गरीब का कोई फासला इस व्यवस्था में नहीं था, तब सरकारी स्कूलों को तवज्जो मिलती थी। अब सरकारी अधिकारियों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। अगर यही व्यवस्था रही, तो सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की दूरी बरकरार रहेगी

विनय गुप्ता, अभिभावक

डे-बोर्डिंग स्कूल से टेंशन फ्री हैं पेरेंट्स

आधुनिक शिक्षा सुविधा ने बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाने का ही प्रयास किया है। बच्चे खेल-खेल के साथ पढ़ाई को भी तवज्जो दे रहे हैं। डे-बोर्डिंग की सुविधाओं से नौकरी पेशा अभिभावकों को राहत मिली है और बच्चों का भविष्य भी सुदृढ़ता के साथ उज्ज्वल हो रहा है। अच्छी शिक्षा की उम्मीद के लिए अभिभावक निजी स्कूलों में पढ़ाई को तरजीह देते हैं। निजी स्कूलों के शिक्षक विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत करवाकर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की ओर प्रेरित करते हैं

अंकुश ओबरॉय, अभिभावक