Wednesday, April 24, 2019 05:23 AM

हारियानों संग मर्कंडेय ऋषि का शाही स्नान

भुंतर—जिला कुल्लू की गड़सा घाटी के आराध्य देवता मार्कंडेय ऋषि का जन्मोत्सव रविवार को हुरला में दैविक रिवाज के साथ मनाया गया। इस मौके पर मार्कंडेय ऋषि ने ब्यास-गोमती नदी के संगम में हारियानों तथा श्रद्धालुओं के साथ डुबकी लगाई। हर वर्ष बैसाखी के मौके पर मनाए जाने वाले इस पवित्र शाही स्नान में हुरला, थरास, बढ़ेउली तथा आसपास के सैकड़ों हारियानों तथा देव समाज से जुड़े कारिंदों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। वर्षों से निभाई जा रही इस परंपरा को निभाने के लिए देवता मार्कंडेय ऋषि अपनी कोठी राउलबेहड़ से ब्यास व गोमती नदी के तट पर स्थित प्राचीन मंदिर मकराड़ में पहुंचे। सुबह से ही देव कार्यक्रम के लिए हारियानों और काककूनों का जुटना आरंभ हो गया था। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद देवरथ को ढोल-नगाड़ों की थाप पर ब्यास व गोमती नदी के स्थान पर ले जाया गया। यहां पर मार्कंडेय ऋषि ने नदी में पवित्र स्नान किया तथा साथ ही श्रद्धालुओं ने भी नदी में डुबकी लगाई। वहीं इस मौके पर देवता के विशेष देवलुओं ने नदी को पार करके परंपरा को निभाया। कारकूनों ने सालों पुरानी परंपराओं का भी निर्वहन किया। इसके बाद देवता ने मंदिर में जाकर धरती माता से दूध पीने की रस्म को भी पूरा किया। बताया जाता है कि दरिया का यह स्थान देवता के प्रकट होने का मूल स्थान है। कारकूनों के अनुसार इसी स्थान पर देवता का मोहरा पूर्वजों को मिला था, जिसकी पूजा की जाती है। देवता के कारदार जीवन प्रकाश और वरिष्ठ कारिंदों टहल सिंह राणा सहित अन्यांे ने बताया कि यहां पर स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है, वहीं अनेक शारीरिक रोगों तथा दोषों से भी छुटकारा मिलता है। इस मौके पर लोग इस पवित्र जल को बतरन में भरकर घर भी ले जाते हैं। प्राचीन स्थल होने के कारण लोगों में आज भी इस कार्यक्रम के प्रति उतनी ही श्रद्धा देखी जा सकती है, जितनी पुराने समय में होती थी। बहरहाल, हुरला-थरास में देवता मार्कंडेय ऋषि ने हारियानों संग पवित्र संगम स्नान किया।