हिमकेयर योजना बनी गले की फांस

यूआरएन नंबर डालने के बाद ऑनलाइन दर्शाया जा रहा पुराना रिकार्ड

हमीरपुर - हिमाचल सरकार की सबसे महत्त्वाकांक्षी स्वास्थ्य लाभादायी योजना हिमकेयर यूआरएन नंबर के फेर में फंस गई है। आलम यह है कि यूआरएन नंबर डालने के उपरांत पुराना कार्ड ऑनलाइन दर्शाया जा रहा है। यूआरएन नंबर ने पुलिस विभाग के एक बड़े आलाधिकारी का हिमकेयर कार्ड भी रोक दिया है। जब यूआरएन नंबर डाला जाता है तो कार्ड का पुराना रिकार्ड दर्शाया जा रहा है। इस कारण पैसे जमा करवाने के उपरांत भी हिमकेयर कार्ड नहीं मिल पा रहे। इसी सिस्टम का खामियाजा डाक्टर राधाकृष्णन मेडिकल कालेज हमीरपुर में उपचार के लिए पहुंचे मरीज को भुगतना पड़ा। कई घंटों तक मरीज के तीमारदार हिमकेयर के तहत इलाज मिलने के लिए जद्दोजहद करते रहे। नए बनवाए गए हिमकेयर कार्ड की वैद्यता जून 2020 दर्शायी गई है, जबकि उपचार लेने अस्पताल पहुंचे तो ऑनलाइन चैक करने पर पता चला कि कार्ड अपडेट नहीं हुआ है। यहां पुराने कार्ड का ही स्टेटस उपलब्ध था, जिसकी वैद्यता 2017-18 थी। हैरत की बात है कि जब कार्ड अपडेट ही नहीं हुआ, तो ऑनलाइन नया कार्ड कैसे मिल गया। एक दुर्घटना में घायल व्यक्ति को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। परिवार को पूरा यकीन था कि हिमकेयर में इनका उपचार निःशुल्क हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  इस दौरान हिमकेयर कार्ड का ऑनलाइन रिकार्ड पुराना पाया गया। यह सुनकर मरीज व उसके तीमारदारों के होश उड़ गए। फिर अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में अवगत करवाया गया।

साइवर कैफे वालों की आई शामत

हिमकेयर कार्ड नहीं मिलने व यूआरएन नंबर से पुराना कार्ड दर्शाने पर साइवर कैफे वालों की शामत आ गई है। एक-एक हजार रुपए हिमकेयर कार्ड बनवाने के लिए दे चुके लोग रोजाना साइवर कैफे पहुंचकर संचालकों से लड़ रहे हैं। तकनीकी फॉल्ट का खामियाजा भी साइवर कैफे संचालकों को भुगतना पड़ रहा है।

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