हिमाचली पुरुषार्थ : यश में है सपने को पूरा करने का जुनून

मेहनत को रंग लाती है। यह कहावत बिलकुल सच है अगर आप अपना 100 प्रतिशत दोगे, तो रिर्टन भी 100 प्रतिशत ही आएगा।  दयानंद आदर्श स्कूल सोलन के यश गुप्ता ने आईएससी की जमा दो बोर्ड की परीक्षा में देशभर में तीसरा स्थान हासिल किया है। यश गुप्ता की इस उपलब्धि पर न केवल स्कूल व अभिभावकों को, बल्कि पूरे सोलन शहर में खुशी की लहर है और उसे बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। डाक्टर दंपत्ति डा. क्षितिज गुप्ता व डा. गुंजन गुप्ता के घर जन्मे यश गुप्ता ने ‘दिव्य हिमाचल’ के साथ विशेष बातचीत में कहा कि सफलता हासिल करने के लिए मेहनत से बढ़कर कुछ नहीं है। उसने कहा कि उन्होंने बिना ट्यूशन के सेल्फ स्टडी पर ही फोकस किया है।  यश बिना किसी प्रैशर के सेल्फ स्टडी को अधिमान दिया और दिन में करीब 10 घंटे पढ़ाई कर इस मुकाम को हासिल किया।  वहीं, यश की इस उपलब्धि को हासिल करने पर मंगलवार को स्कूल में प्रधानाचार्या ऊषा मित्तल सहित अन्य स्टाफ सदस्यों ने उसका भव्य स्वागत किया और मिठाई खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की।   यश का कहना है कि मैं  फ्री समय में थोड़ा खेलता हूं और मुझे घर के सदस्यों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।  यश की माता का कहना है कि यश को शुरू से ही कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने का मन था और उसके जुनून को देखते हुए ही उन्होंने कभी भी उसे फोर्स नहीं किया। यश को पता था कि मुझे मेरा जुनून बिना मेहनत के नहीं मिलेगा और दसवीं के बाद यश ने महनत करना शुरू कर दी जिसका नतीजा सामने है।

पार्थ ने देश और प्रदेश में बजाया मेहनत का डंका

जब बच्चे अपने सपनों को पूरा करने की ठान लेते हैं, तो वह संघर्ष शुरू कर देते हैं जिसके परिणाम अच्छे ही आते हैं ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सोलन के पार्थ ने। सेंट ल्यूक्स स्कूल सोलन के छात्र पार्थ सैनी ने सीबीएसई द्वारा घोषित जमा दो  के परीक्षा परिणामों देशभर में तीसरा स्थान हासिल कर डंका बजाया है। पार्थ ने नॉन मेडिकल स्ट्रीम में 500 में से 497 अंक हासिल कर जहां देश में तीसरा स्थान हासिल किया, वहीं प्रदेश में भी टॉप कर सोलन जैसे छोटे शहर को गौरान्वित किया है। पार्थ सैनी के पिता सुरेश सैनी सोलन के चंबाघाट स्थित एचएफसीएल में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और माता रीतू सैनी गृहिणी हैं। पार्थ ने अपनी सफलता को श्रेय माता-पिता व दोस्तों को दिया है। पार्थ का कहना है कि उसकी सफलता में अध्यापकों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है और जब उसको आवश्यकता पड़ी अध्यापकों ने संकट से उबारा है। उसने बताया कि वह दिन में करीब 5 घंटे पढ़ाई करता था और जब भी बोर होता तो अपने आप को रिफ्रेश करने के लिए म्यूजिक सुनता या फिर मोबाइल पर रेसिंग गेम खेलता था। पार्थ सोशल मीडिया प्लेटफार्म से हमेशा ही दूर रहा क्योंकि इससे पढ़ाई पर पूरी तरह से फोकस करने में मदद मिली, अन्यथा भी सोशल मीडिया अपनी ओर आकर्षित कर लेता और पार्थ अपने उद्देश्य से भटक जाता। पार्थ ने अपने साथियों को भी हमेशा ही सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने की सलाह दी ताकि उनके छात्र जीवन पर इससे नुकसान न हो सके। पार्थ ने बताया कि जेईई मेन्स में 96.21 प्रतिशत अंक हासिल करने के पश्चात अब उनका फोकस बीट्स-पिलानी में दाखिला लेने पर है। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता का राज कड़ी मेहनत है और सफलता के लिए मेहनत से बढ़कर और कोई रास्ता नहीं है। 

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