हिमाचल के मास्टर शैफ नंद लाल शर्मा ‘स्वाद’ के जादूगर

पर्यटन विकास निगम के डीजीएम ने 1995 किलो खिचड़ी बनाकर गिनीज बुक में दर्ज करवाया हिमाचल का नाम

नामः नंद लाल शर्मा

जन्मः 30 जून, 1966

स्थानः मलैन (शिमला)

पिताः मान सुख शर्मा

‘दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप’ हिमाचल, हिमाचली और हिमाचलीयत की सेवा में सदैव तत्पर रहा है। यही कारण है कि किसी भी रूप में कुछ हटकर करने वालों को सम्मान हमारी प्राथमिकता में शामिल है। ‘दिव्य हिमाचल एक्सिलेंस अवार्ड‘ ऐसी ही कर्मठ विभूतियों, संगठनों व संस्थाओं के प्रयासों को प्रणाम करने का संकल्प है। ‘दिव्य हिमाचल एक्सिलेंस अवार्ड’ की सर्वश्रेष्ठ शैफ श्रेणी में शुमार हैं पर्यटन विकास निगम के डीजीएम नंद लाल शर्मा...

शिमला - हिमाचल प्रदेश के ट्रेडिशनल फूड का लोहा दुनिया मानती है, मगर धीरे-धीरे यह खत्म होता जा रहा है। जरूरी है कि हिमाचली फूड को जीवंत रखा जाए और आज की पीढ़ी को भी इससे जोड़ा जाए। ऐसा ही कुछ कर गुजरने को लालायित हैं हिमाचल के मास्टर शैफ नंद लाल शर्मा। जी हां! नंद लाल शर्मा ही हैं, जिन्होंने हिमाचल का नाम खिचड़ी बनाने में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज करवा दिया। पर्यटन विभाग चाहता था कि मकर संक्रांति के दिन तत्तापानी में लोगों को बड़े स्तर पर खिचड़ी परोसी जाए, इस पर पर्यटन विकास निगम के डीजीएम नंद लाल शर्मा का विचार था कि क्यों न खिचड़ी का ही रिकार्ड बना डाला जाए। सरकार ने भी उनके इस विचार को अपनाया और उन्हें जिम्मेदारी भी सौंप दी। आज हिमाचल के नाम 1995 किलो खिचड़ी बनाने का रिकार्ड गिनीज बुक में दर्ज हो चुका है। शिमला जिला के कोटगढ़ के मलैन गांव में मान सुख शर्मा के घर पर 30 जून, 1966 को जन्मे नंद लाल शर्मा हिमाचल में किसी पहचान के मोहताज नहीं है। खाना बनाने में उनके हाथों का जादू ऐसा है कि लोग अंगुलियां चाटते रह जाएं। अपनी मां को घर में ट्रेडिशनल फूड बनाते देखते हुए उन्हें भी खाना बनाने का शौक हुआ और शौक ऐसा चढ़ा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी बेहतरीन शैफ के रूप में पहचान बन गई।

जुनून को सलाम

शैफ बनने के इच्छुक हिमाचली युवाओं को एक बड़ा मंच देने के लिए उनका जुनून देखते ही बनता है। उन्होंने यहां पर हिमाचल शेफ एसोसिएशन का गठन कर फूड कंपीटीशन करवाने शुरू किए हैं, जिसमें महिलाएं व युवा वर्ग अपनी प्रतिभा दिखाने आगे आ रहा है। इससे एक नए रोजगार की तरफ वह युवाओं को मोड़ने की कोशिश में हैं। साथ ही यहां के पारंपरिक व्यंजनों को जिंदा रखने के लिए प्रयास चल रहा है।

बढ़ता ही गया जायका

वर्ष 1983 में नंद लाल शर्मा ने बतौर ट्रेनी  पर्यटन विकास निगम में काम सीखा। किचन में रहते हुए उन्होंने अपना जायका बिखेरना शुरू कर दिया। उन्होंने मुंबई जाकर होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया जिसके बाद पर्यटन निगम के होटल होलिडे होम, चायल पैलेस, नालदेहरा में काम किया। उन्होंने दो साल कैनेडा में भी बिताए, जहां पर भी उन्हें बेहतर खाना बनाने के लिए अवार्ड हासिल हुआ।

शैफ से डीजीएम तक

नंद लाल शर्मा ने दिल्ली में होटल ताज पैलेस, हयात रिजेंसी, रेडिसन, होटल दि अशोक में भी शैफ की भूमिका निभाई है। राज्य पर्यटन विकास निगम में कौमी दो के पद पर लगने के बाद वह कौमी एक, मैनेजर, एडीजी और अब डीजीएम तक के पद पर पहुंचे हैं।

उपलब्धियां

इंडियन फेडरेशन ऑफ कलनरी एसोसिएशन का इंटरनेशनल अवार्ड

इंडियन कलनरी फोरम ने भी उन्हेें बेस्ट शैफ के खिताब से नवाजा

कलनरी फोरम में नंद लाल शर्मा राष्ट्रीय ज्यूरी में शामिल हुए, जो हिमाचल के लिए बड़ी बात है

इंडियन इंटरनेशनल हॉस्पिटेलिटी एक्सपो में बेस्ट मास्टर क्लास का अवार्ड

एडीटीवी में जायके का सफर व जायका इंडिया का कार्यक्रम में वह खाना बनाने के गुर सिखा चुके हैं

स्टार टीवी में मिर्च मसाला व गुड मॉर्निंग इंडिया में वह नई-नई रेसीपी सिखाते रहे हैं

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