हिमाचल को अपनी सरगम से झूमा रहे राजीव

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश को किन्नौर के कल्पा शिवधारण गांव के युवा संगीतकार राजीव नेगी अपनी सरगम से झूमा रहे हैं। संगीतकार राजीव ने अपने नए दौर के संगीत से अपर से लेकर लोअर हिमाचल तक की सभी भाषायी सीमाएं तोड़ दी हैं। अब पूरा हिमाचल युवा संगीतकार के नए दौर के संगीत में झूमते हुए नजर आता है। राजीव ने अब तक हिमाचल के जिन गीतों को म्यूजिक दिया है, वे राज्य के अब तक के सबसे बड़ी हिट लोक नाटी बन गई हैं। इसमें खास बात यह है कि नेगी के म्यूजिक से सजे गीत अब तक रिकार्ड भी बना चुके हैं, जिसमें लोक नाटी गीतों में विक्की राज्टा का डूगे नालूए, अजय चौहान का नाटी सिरमौरा वालिए, नाटी किंग कुलदीप शर्मा का रुमतिए और विक्की चौहान का सही पकड़े हैं प्रमुख हैं। हिमाचल की इंडस्ट्री में अपनी नई धुनों से सबको दीवाना बनाने वाले राजीव नेगी के शिमला ठियोग स्थित सरगम स्टूडियो में अब उत्तराखंड-गढ़वाल सहित अन्य राज्य के कलाकार भी पहुंच रहे हैं। शादी-विवाह सहित अन्य समारोह की पार्टियों में अब राजीव नेगी के संगीत से सजी हुई नाटियों का बजना जरूरी हो गया है। अब तक आप डूगे नालूए, नाटी सिरमौरा वालिए और रुमतिए की धुनों पर नाचते जरूर होंगे, लेकिन धुंन बनाने के बारे में आपको जानकारी नहीं होगी। 30 वर्षीय युवा राजीव नेगी जनजातीय जिला किन्नौर के कल्पा के शिवधारण गांव के रहने वाले हैं। नेगी के पिता सरकारी नौकरी से रिटायर्ड सेवा राम और माता गृहिणी करणदासी हैं, उनके तीन भाई इंद्र कुमार नेगी, हरीश कुमार नेगी और राजेश कुमार नेगी हैं, जिन्होंने संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने को राजीव की हौसला अफजाई करते हुए साथ भी दिया। जमा दो तक की पढ़ाई करने के बाद नेगी हिमाचली संस्कृति के गांवों के अपने गीत-संगीत के रंग में रंग गए। घर-परिवार और गांवों का माहौल संगीतमय था, ऐसे में संगीत सीखना शुरू कर दिया। फिर  बोर्ड प्ले करते हुए सात से आठ वर्षों तक प्रदेश भर सहित बाहरी राज्यों में भी लाइव शो किए। इस दौर में ही नेगी को कई आर्थिक परेशानियों से भी जूझना पड़ा। इसके बाद किन्नौर के राजीव नेगी ने कुछ अलग करने की ठानी और रामपुर में अपना स्टूडियो बनाया, जिसमें हिमाचली गीतों को नया संगीत देकर उनमें नई रूह बसाने के लिए कार्य शुरू कर दिया। इसमें उन्होंने किन्नौरी गीतों को संगीत दिया, लेकिन अधिक सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद वर्ष 2016 में ठियोग में नया स्टूडियो शुरू किया। जिसमें डिंपल ठाकुर का ‘क्यों देशा तै आई गीत’ हिट रहा। इसके बाद ‘डूगे नालूए’ रिकार्ड दो करोड़ से अधिक व्यूज, ‘नाटी सिरमौरा वालिए’ 1.70 करोड़, ‘रुमतिए’ 90 लाख और ओडियो में विक्की चौहान का सही पकड़े हैं मात्र ओडियो 55 लाख से अधिक व्यूज सबसे बड़े हिट रहे। राजीव नेगी अपनी मेहनत और लगन के दम पर हिमाचल में एक नए संगीत का दौर लेकर आए हैं, जिसमें युवा पीढ़ी संग सभी लोग झूमने के लिए मजबूर हो जाते हैं, वहीं पारंपारिक गीतों में भी अपने संगीत से लोगों की रूह में उतर रहे हैं। अब नेगी संगीत विषय में अपने अध्ययन को आगे बढ़ाते हुए हिमाचल में ऐसा संगीत तैयार करने में जुटे हुए हैं, जिससे बालीवुड सहित अन्य राज्यों को भी पहाड़ी राज्य का रुख करना पड़े। इसके चलते ही अब उत्तराखंड, गढ़वाल और दिल्ली के भी कई कलाकार ठियोग में राजीव नेगी के पास संगीत की धुन लेने के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए खुशी और गर्व की बात है कि बाहरी राज्य के कलाकार अब संगीत के लिए हिमाचल में आ रहे हैं। राजीव नेगी ने ‘दिव्य हिमाचल’ से खास बातचीत करते हुए मीडिया ग्रुप के कलाकारों के योगदान को काफी सराहा। हालांकि उन्हें प्रदेश की सरकारों का कलाकारों के प्रति बेरुखी का भी काफी मलाल है कि सरकार अब तक कुछ भी नहीं कर पाई है।

मुलाकात

ऊपरी और निचले हिमाचल के गीत-संगीत का मिलन होने लगा...

संगीतकार बनने का सफर कहां व कैसे शुरू हुआ?

बचपन में घर से ही लोक गीत-संगीत में जीवन बिता है। बस उस समय से ही लोक गीतों की धुनें जीवन का आधार बन गईं।

किसी लोक गीत को नाटी में परिवर्तित करने की कौन सी खूबियां देखते हैं?

लोक गीत की अपनी मिठास और खुशबू होती है, किसी भी लोक गीत के साथ बेवजह छेड़छाड़ करने की जरूरत नहीं। कुछ लोक गीत ऐसे हैं, जो नाटी में और भी ज्यादा निखर जाते हैं और नई नाटी गीत बनाने में अधिक दिलचस्पी है।

अंतत नाटी तो नाचने की लय है, तो इस तरह अपनी बीट्स का चयन कैसे निर्धारित करते हैं?

हिमाचल में अब एक जैसे संगीत से लोग नहीं बंधना चाहते हैं, तो अब नई बीट्स और धुनों के साथ नाटियों में प्रयोग करने का प्रयास कर रहा हूं, जिसे लोग पसंद करके प्यार दे रहे हैं।

जो केवल हिमाचल के लोक गीतों में आपको मिलता है?

लोक संस्कृति की झलक और जादू जैसी मिठास जो हर किसी को बांध लेती है।

संगीत की कोई भाषा नहीं होती, फिर लोक गीतों के माध्यम से आप हिमाचली बोलियों का सांझापन कैसे देखते हैं?

संगीत किसी भाषा का मोहताज नहीं है। आज के समय के गीतों ने यह बात स्पष्ट भी कर दी है, अपर हिमाचल के गीतों पर पूरा प्रदेश झूम रहा है, तो वहीं निचले हिमाचल के गीतों को अपर में लोग सुनना पसंद कर रहे हैं। अब मिले-जुले शब्दों के चयन से सभी लोग एक-दूसरे की बोलियों से भी जुड़ने लगे हैं।

क्या यह संभव है कि यहां की तमाम बोलियां एक हिमाचली भाषा को समृद्ध कर दें?

इसमें कोई संदेह नहीं कि हिमाचल में हर पांच से सात किलोमीटर में बोली बदल जाती हैं, लेकिन हम सबकी एक जमीन है, अपनी बोलियों को जोड़कर अपनी एक समृद्ध भाषा बना सकते हैं।

ऐसे लक्ष्य में आपके द्वारा दिया जा रहा संगीत कैसे योगदान कर सकता है?

संगीत में जादू है और हिमाचल में संगीत ने यह जादू करके भी दिखा दिया है। अपर हिमाचल में बनने वाले गीतों की धुनें पूरे प्रदेश में लोगों को डीजे में झूमा रही हैं, तो अब संगीत ने दूरियां बिलकुल कम कर दी हैं।

संगीत उद्योग के रूप में आप हिमाचल में कितनी संभावनाएं देखते हैं?

अब दौर हिमाचल गीत-संगीत का ही है, बस इसमें सरकार और लोगों को भी सहयोग करना होगा। संभावनाएं बहुत अधिक हैं, बस उसके अनुरूप हिमाचली इंडस्ट्री को काम करने की जरूरत है।

स्वयं की सफलता को मापने के लिए आप किस तरह की प्रतिक्रिया जरूरी मानते हैं और फीडबैक सिस्टम है क्या?

मेरे लिए सफलता मापने की प्रक्रिया लोगों का प्यार है, और प्रदेश ही नहीं बाहरी राज्यों के लोग भी हिमाचल में अपनी धुनें बनाने के लिए पहुंच रहे हैं, बस यही बातें मुझे और अधिक अच्छा काम करने के लिए मजबूत कर रही हैं।

सरकार सांस्कृतिक नीति लेकर आ रही है, आपके सुझाव?

अब तक सरकारों की तरफ से जीरो सहयोग संगीतकारों के लिए रहा है। अब सांस्कृतिक नीति प्रदेश में बन रही है, इसमें पारदर्शिता और स्पष्ट काम होना चाहिए। नीति में इंडस्ट्री के लिए बेहतर करने वाले लोगों की सही पहचान कर आर्थिक मदद भी करनी चाहिए, जिससे कि हिमाचल गीत-संगीत को नई ऊंचाइयों में पहुंचाया जा सके।

हिमाचली गीत-संगीत को आगे बढ़ाने के लिए लेखक, गायक और संगीतकारों को सामूहिक रूप से क्या करना होगा?

 हम सब लोगों को सामूहिक रूप से अपनी लोक संस्कृति से छेड़छाड़ किए बिना उसे सहेजना होगा। साथ ही नए गीत, संगीत और गायकों को अपना रियाज बढ़ाकर दमदार प्रतिभा बनने के लिए प्रयास करने होंगे, जिससे कुछ नया और अलग लोगों को देखने व सुनने को मिले।

पर्वत की धुनें जो आपकी रूह के करीब हैं?

पहाड़ की हर धुन खूबसूरत है और रूह में बसती है, यहां के पर्वत से बहते झरने, नदियां, मंदिरों की घंटियां और पक्षियों की चहचहाट हर जगह धुनें सुनाई देती हैं, जो रूह में बसती हैं।

भविष्य में जो पाने की ख्वाहिश, करने का लक्ष्य और इरादों की जुंबिश है?

हिमाचल को संगीत में ऐसा मुकम्मल बनाना कि किसी को राज्य से बाहर जाने की जरूरत न रहे, सब कार्य यहीं हो सकें। एक ऐसा दौर लाने का प्रयास है कि बालीवुड भी गीत-संगीत के लिए हिमाचल की ओर रुख करे।     

   -नरेन कुमार ,धर्मशाला

लोअर हिमाचल में भी मनवाएंगे लोहा

राजीव नेगी अब जल्द ही बालीवुड में बतौर प्रोडक्शन डायरेक्टर काम कर चुके धर्मशाला के नरेंद्र बड़ाण के नए प्रोजेक्ट से लोअर हिमाचल के गीतों में अपनी धुनें देंगे। उन्होंने बताया कि नए गीत चिंगफुंगली को नए संगीत के साथ जल्द ही तैयार कर रिलीज किया जाएगा।

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