हिमाचल में ग्लोबल इन्वेस्टर मीट

डा. कुलदीप चंद अग्निहोत्री

वरिष्ठ स्तंभकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इस बात का संकेत भी दिया कि निवेशकर्ता, प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए किसी पैकेज को देख कर या उसके लालच में आकर निवेश नहीं करता बल्कि वह देखता है कि प्रदेश में निवेश करना आसान है या नहीं ? जिस प्रदेश में नौकरशाही निवेशकर्ता के काम में सहायता करने की बजाय, उसके काम में रोड़े अटकाना शुरू कर देती है, वहां कोई भी निवेशकर्ता निवेश नहीं करना चाहता। जयराम ठाकुर की सरकार को इस बात का श्रेय देना होगा कि उसने प्रदेश में दुनिया भर से निवेशकर्ताओं को बुला कर एक सकारात्मक माहौल बनाना शुरू कर दिया है...

हिमाचल प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर मीट सफलता पूर्वक संपन्न हो गई, इसके लिए हिमाचल प्रदेश सरकार निश्चय ही बधाई की पात्र है। देश दुनिया के व्यवसायी हिमाचल में निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए एकत्र हुए, यह कम से कम धर्मशाला के इतिहास में तो महत्त्वपूर्ण घटना है ही। कुछ नकारात्मक वृत्ति के लोग जरूर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं कि यथार्थ में कितना निवेश हुआ है, उसके बारे में कोई नहीं बता रहा। ऐसे प्रश्नों पर सचमुच हैरानी होती है। उसके बारे में तो जब निवेश शुरू हो जाएगा, तभी पता चल पाएगा, लेकिन  व्यवसाय के मनोविज्ञान से अनजान, बता रहे हैं कि निवेश का पता, कितने एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए गए हैं, उनकी संख्या  से पता चलता है। यदि एमओयू पर हस्ताक्षर भर कर देने से निवेश आना शुरू हो जाता फिर तो हिमाचल प्रदेश में अरबों का निवेश पहले ही हो चुका हुआ होता, क्योंकि सोनिया कांग्रेस के शासन काल में इस प्रकार के एमओयू हस्ताक्षरित होते रहते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इस बात का संकेत भी दिया कि निवेशकर्ता, प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए किसी पैकेज को देख कर या उसके लालच में आकर निवेश नहीं करता बल्कि वह देखता है कि प्रदेश में निवेश करना आसान है या नहीं ? जिस प्रदेश में नौकरशाही निवेशकर्ता के काम में सहायता करने की बजाय, उसके काम में रोड़े अटकाना शुरू कर देती है, वहां कोई भी निवेशकर्ता निवेश नहीं करना चाहता। जयराम ठाकुर की सरकार को इस बात का श्रेय देना होगा कि उसने प्रदेश में दुनिया भर से निवेशकर्ताओं को बुला कर एक सकारात्मक माहौल बनाना शुरू कर दिया है। यदि नौकरशाही अपने व्यवहार में परिवर्तन कर लेती है तो यकीनन प्रदेश में पूंजी निवेश करने वालों की कमी नहीं रहेगी, लेकिन ग्लोबल इन्वेस्टर मीट से पहले ही जयराम ठाकुर ने पच्छाद और धर्मशाला विधानसभा की दोनों सीटें जीत कर, प्रदेश में अपनी मजबूत पकड़ का सबूत दे दिया था। दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के बागी उम्मीदवार मैदान में आ गए थे, इसके कारण विपक्ष यह आशा करने लगा था कि शायद इसके चलते सोनिया कांग्रेस को जीत हड़पने का मौका मिल सकता है, लेकिन दोनों ही जगह कांग्रेस बुरी तरह पिट गई। धर्मशाला में तो उसके प्रत्याशी की जमानत ही जब्त हो गई।

पच्छाद में भी कांग्रेस दोबारा उठने में सफल नहीं हो पाई। वहां तो भाजपा की एक नई कार्यकर्ता ने सोनिया कांग्रेस के धुरंधर गंगू राम मुसाफिर को पराजित कर दिया। जिस समय जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बने थे तो विपक्ष के एक खेमे में गुदगुदी होने लगी थी कि वे शायद प्रशासन और जन-जन से तारतम्य न बिठा सकें और सोनिया कांग्रेस फिर से प्रदेश के लोगों को अपने हाथ दिखाने लगेगी, लेकिन उनकी यह आशा फलीभूत नहीं हुई। जयराम ठाकुर न केवल एक सफल प्रशासक सिद्ध हुए बल्कि उन्होंने प्रदेश की जनता से जिस सहज भाव से अपने तार जोड़े, उससे आम जन उन्हें अपने बीच का ही आदमी मानने लगा। ठाकुर ने बिना हल्ला-गुल्ला किए प्रदेश की कार्य संस्कृति को बदलने का प्रयास किया है। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का जयराम ठाकुरीय प्रयोग प्रदेश की राजनीति की दिशा बदल सकता है। ज्यादातर सत्ता सदा अपने साथ अहंकार को लेकर चलती है। अहंकार व्यक्ति और समाज के सभी गुणों को नष्ट कर देता है। अहंकार पराजय पथ का दूसरा नाम है। जुंडली की राजनीति आम जनता से कटने का आजमाया हुआ रास्ता है। देश भर में बड़े-बड़े धुरंधर मुख्यमंत्री इन्हीं दो रास्तों पर चल कर धराशायी हो गए। भाजपा के जयराम ठाकुरीय प्रयोग में इन दोनों रास्तों को बंद करने की रणनीति है। ठाकुर ने अभी तक इन दोनों आत्मघाती रास्तों को सफलता पूर्वक बंद किया है। धर्मशाला और पच्छाद में भारतीय जनता पार्टी की जीत इसी का परिणाम है और ग्लोबल इन्वेस्टर मीट इसी का दूसरा हिस्सा है। यदि हिमाचल नौकरशाही की कार्य संस्कृति में अमूल परिवर्तन होता है तो हिमाचल में पूंजी निवेश करने वालों की कमी नहीं हो सकती। अपने इस अभियान में भी प्रदेश सरकार सफल होगी, ऐसी आशा करनी चाहिए।

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