Friday, September 24, 2021 06:26 AM

हिमाचल में बनेंगे 18 नए शिशु अस्पताल, राज्य में तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयारियां शुरू

केंद्रीय मंत्रालय के आदेश पर प्रदेश सरकार ने भेजा 240.56 करोड़ का प्रस्ताव

  40 बेडिड यूनिट में ऑक्सीजन-वेंटिलेटर की मिलेगी सारी सुविधाएं  

मस्तराम डलैल-शिमला

संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर हिमाचल में 18 नए पिडियाट्रिक्स यूनिट (शिशु अस्पताल) बनेंगे। सभी जिलों में प्रस्तावित यह शिशु अस्पताल 40 बिस्तरों के होंगे। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आदेश पर हिमाचल सरकार ने 240 करोड़ 56 लाख का प्रस्ताव दिल्ली भेजा है। खास है कि प्रति पिडियाट्रिक्स यूनिट पर चार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसमें 40 बेडिड यूनिट में ऑक्सीजन-वेंटीलेटर से लेकर तमाम सुविधाएं होंगी।

इसके अलावा स्टेट लेवल का एक पिडियाट्रिक्स मॉनिटरिंग यूनिट स्थापित होगा। इसी प्रोपोजल में हिमाचल के हर जिला को आरटीपीसीआर लैब की सुविधा से जोड़ने का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत अब बिलासपुर, किन्नौर, लाहुल-स्पीति और कुल्लू में भी आरटी-पीसीआर की सुविधा शुरू हो जाएगी। केंद्रीय मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार लाहुल स्पीति और किन्नौर समेत हिमाचल के हर जिला में पिडियाट्रिक्स यूनिट बनेंगे। सभी मेडिकल कालेजों में अलग से यूनिट स्थापित होंगे। इस कारण कई बड़े जिलों में इसकी संख्या चार से पांच तक भी प्रस्तावित की गई है। इसके चलते प्रस्ताव में 18 नए पिडियाट्रिक्स यूनिट स्थापित करने की मांग रखी गई है।

खास है कि इस प्रोपोजल में टेस्ट किट से लेकर सभी प्रकार की दवाओं की उपलब्धता का भी प्रावधान है। केंद्र को भेजे गए 240 करोड़ के प्रोपोजल में आईटी सिस्टम को भी मजबूत करने की बात कही गई है। इसके तहत पिडियाट्रिक्स यूनिट की लैब तथा तमाम व्यवस्था को कम्प्यूटर से लेकर मशीनों तक अत्याधुनिक किया जाएगा। टेली मेडिसिन सेवा को भी इसमें पुख्ता करने का लक्ष्य रखा गया है। सूचना के अनुसार केंद्र सरकार ने तीसरी लहर की संभावनाओं के मद्देनजर सभी राज्य सरकारों से बच्चों के अस्पतालों की व्यवस्था पर फीडबैक लिया था। इसी आधार पर राज्य सरकारों को नए पिडियाट्रिक्स यूनिट आरटी-पीसीआर लैब, टेस्ट किट, मेडिसिन, आईटी सिस्टम, टेली मेडिसिन सहित तमाम तैयारियों के लिए प्रोपोजल मांगे थे। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भारी-भरकम बजट देने को तैयार है।  हिमाचल में वैक्सीनेशन से वंचित 18 साल से कम आयु के बच्चों को ही संभावित तीसरी लहर के खतरे से बचाने की कवायद चल रही है।   (एचडीएम)