होम्योपैथी में बनाएं भविष्य

नए प्रोफेशन

होम्योपैथी एक ऐसी पद्धति है, जिसमें उपचार में तो समय लगता है, लेकिन यह बीमारी को जड़ से मिटाती है। यही कारण है कि यह पद्धति तेजी से लोकप्रिय हो रही है। अगर आप चाहें तो इस क्षेत्र में अपना भविष्य भी बना सकते हैं। यह आर्थराइटिस, डायबिटीज, थायराइड और अन्य तमाम गंभीर मानी जाने वाली बीमारियों का प्रभावी इलाज करती है और वह भी बिना किसी साइड इफेक्ट के। आमतौर पर यह धारणा है कि होम्योपैथी दवाइयों का असर बहुत देर से होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, यह पद्धति केवल पुरानी और गंभीर बीमारियों को पूरी तरह ठीक करने में थोड़ा समय लेती है। होम्योपैथी पद्धति दूसरी पद्धतियों से सस्ती होने के कारण यह गरीब लोगों की चिकित्सा पद्धति भी कहलाती है। होम्योपैथी में पर्याप्त चिकित्सक नहीं होम्योपैथिक चिकित्सा की जितनी मांग बढ़ रही है, उस अनुपात में पर्याप्त चिकित्सक नहीं हैं। होम्योपैथिक डाक्टर ढूंढने लगें, तो कई बार  परेशानी होती है। आज भी किसी शहर में बड़ी मुश्किल से आठ-दस या इससे भी कम होम्योपैथिक डाक्टर मिलेंगे। इस कमी को देखते हुए इस क्षेत्र में संभावनाओं के कई द्वार खुलते हैं।

वेतनमान

आरंभिक वेतन के तौर पर 15000 रुपए मिलते हैं। धीर-धीरे आपके अनुभव के अनुसार वेतन बढ़ता जाता है। आप अपना क्लीनिक खोलकर भी अच्छी आमदनी अर्जित कर सकते हैं।

होम्योपैथी में प्राकृतिक विधियां

होम्योपैथी में प्राकृतिक दवाओं के जरिए शरीर की अपनी रोग निवारण क्षमता को बढ़ाकर मरीज का इलाज किया जाता है। होम्योपैथी में ऐसी प्राकृतिक विधियों से इलाज करने की कोशिश की जाती है, जो रोगी के शारीरिक व मानसिक लक्षणों से मेल खाएं।

योग्यता

होम्योपैथी के कोर्स स्नातक, स्नातकोत्तर व पीएचडी स्तर तक उपलब्ध हैं। बैचलर डिग्री को बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एवं सर्जरी (बीएचएमएस) कहा जाता है। इसकी प्रवेश परीक्षा के लिए बायोलॉजी विषय के साथ 12वीं उत्तीर्ण होना जरूरी है। यह कोर्स साढ़े पांच साल का है, जिसमें एक साल की इंटर्नशिप भी शामिल है। पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री को एमडी (होमी) कहा जाता है। यह कोर्स तीन साल का होता है।

कैसे लें दाखिला

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