Tuesday, March 31, 2020 01:50 PM

हो गई न्याय की सुबह

डा. मनोज डोगरा

लेखक, हमीरपुर से हैं

बीस मार्च की सुबह  निर्भया के साथ-साथ देश की प्रत्येक उस महिला-बेटी को न्याय मिला जो निर्भया मामले में न्याय की आस लगाए बैठे थे। सन् 2012 में 16 दिसंबर की काली रात को जब इन चार दरिंदों ने निर्भया के साथ दरिंदगी का खेल खेला तो इस घटना से कोई भी भारत का शख्स अनजान नहीं था, साथ में ही पूरा देश ऐसी घटनाओं को सुनकर भयभीत था, लेकिन निर्भया की मां ने इस घटना का बदला लेने के लिए कानून का सहारा लिया तथा साथ में ही उस समय की परिस्थितियों के हिसाब से पुलिस, मीडिया ने जो अपनी अहम भूमिका निभाई थी, वह किसी से छिपी नहीं है, क्योंकि पुलिस ने दो सप्ताह के भीतर ही उन गुनहगारों  को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था। बात मीडिया की करें तो मीडिया ने उस समय निर्भया की मां को समय-समय पर मीडिया की हर संभव सहायता प्रदान की थी, साथ में समाजसेवी संस्थाएं भी उस समय आगे आई थी तथा उन्होंने इस दरिंदगी का खुलकर विरोध किया था तथा रात-दिन सड़कों पर कैंडल मार्च निकाले गए थे, इस प्रकार समाजसेवी संस्थाओं, मीडिया और पुलिस ने अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका इसमें निभाई थी। प्रत्येक देशवासी उस समय निर्भया की मां के साथ न्याय दिलवाने के लिए उसके साथ खड़ा था। सड़कों पर प्रदर्शन किए जाते थे, तब भी निर्भया की मां ने अपनी बेटी के साथ जो पल उस में बिताए थे जिन्हें वह अपनी आप बीती में सुनाती है तो तो सुनने वाले की आंखों से आंसू बहने लगते हैं, लेकिन ऐसी स्थितियों से गुजरने के बाद भी निर्भया की मां ने हार नहीं मानी और अपनी बेटी को न्याय दिलवाने का प्रण लिया।

निर्भया की मां मीडिया को कई बार अपनी आप बीती सुनाती है तो उस आप बीती को सुनकर प्रत्येक देश के नागरिक को रोना आ जाता है तथा 2012 का वह समय था और आज 2020 का समय है, तब से लेकर आज तक निर्भया की मां ने न्याय प्रणाली पर विश्वास रखा और निर्भया के दोषियों को फांसी दिलवाने का प्रण लिया। इसके लिए वह लंबे समय से छोटी अदालतों से लेकर बड़ी अदालतों में गई। आज वह समय आ चुका है कि निर्भया की मां की मेहनत रंग लाई है। इसके लिए निर्भया की मां की हिम्मत की दाद देनी चाहिए। इतने लंबे समय से न्याय दिलवाने के लिए वह संघर्ष करती रही और आखिर में न्याय पाया। साथ में ही भारतीय न्यायपालिका पर भी प्रत्येक देशवासी को गर्व होना चाहिए कि हमारी न्यायपालिका एक स्वतंत्र व निष्पक्ष न्यायपालिका है, वह समानता पर आधारित है। 20 मार्च 2020 वह दिन था जिस दिन प्रत्येक मां, बहनों में एक खुशी की उमंग है कि निर्भया के दोषियों को फांसी दी गई। सुबह न्याय की सुबह थी, 5 बज कर 30 मिनट पर उन चारों दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया तथा इसी के साथ निर्भया की मां की संघर्ष की जीत हुई। इस निर्णय से देश की बेटियों में सुरक्षा का भाव जागृत हुआ कि वे देश में सुरक्षित हैं साथ में ही ऐसे निर्णय से उन भेडि़यों को सीख लेनी चाहिए जो ऐसी दरिंदगी को अंजाम देते हैं। अगर आगे ऐसा कोई निर्भया कांड हुआ तो उन्हें इस निर्णय से सीख लेनी चाहिए कि उनका हश्र भी यही होगा। उन्हें भी निर्भया के दोषियों की तरह ही ऐसे मौत के फंदे पर लटकाया जाएगा। निर्भया की मां ने जो इतने लंबे समय से न्याय पाने के लिए संघर्ष किया तो निर्भया की मां झांसी की रानी से कम नहीं है।