Saturday, September 21, 2019 05:09 PM

1.66 करोड़ से बनेगा काइस स्कूल में साइंस ब्लॉक

मनाली -वन, परिवहन व युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने मंगलवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला काईस में 1.66 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले विज्ञान खंड की आधारशिला रखी। तीन मंजिला इस भवन की प्रशासनिक स्वीकृति पहले ही प्राप्त हो चुकी है और निर्माण के लिए धनराशि भी जारी की जा चुकी है। पहली मंजिल में रसायन विज्ञान प्रयोगशाला, कलास रूम, दो स्टोर, लॉबी होगी, जबकि दूसरी मंजिल में जीव विज्ञान व भौतिकी विज्ञान प्रयोगशालाएं, दो स्टोर व लॉबी होगी और तीसरी मंजिल में लॉबी सहित बहु-उद्देश्यीय सभागार का निर्माण किया जाएगा। गोविंद ठाकुर ने कहा कि इस अतिरिक्त भवन का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा, ताकि बच्चों को सुविधा प्राप्त हो। इस अवसर पर गोविंद सिंह ने कहा कि 2.50 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली सोइल-तांदला सड़क का कार्य तेजी से चला है। क्षेत्र में पशु अस्पताल का कार्य भी प्रगति पर है। 1.56 करोड़ की लागत से बनने वाला काइस नाला पुल भी इसी वर्ष बनकर तैयार हो जाएगा। विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने इस अवसर पर सड़क सुरक्षा से संबंधित नुक्कड़ नाटक तथा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। वन मंत्री ने अपनी एच्छिक निधि से 20 हजार रुपए देने की घोषणा की। इससे पूर्व स्कूल की प्रधानाचार्य कल्पना शर्मा ने स्वागत, जबकि एसएमसी के प्रधान देव सिंह नेगी ने धन्यवाद किया।

प्रदेश को बनाएंगे चालान मुक्त

परिवहन मंत्री ने समाज के प्रत्येक व्यक्ति से अपील की कि वाहन चलाते समय गति सीमा पर ध्यान रखें, सीट बेल्ट पहनें, सभी दस्तावेज साथ रखें, दो पहिया चालक हैल्मेट पहनें, गलत ओवरटेक न करें और सबसे बड़ी बात बिना लाइसेंस और नशे की हालत में वाहन न चलाएं। उन्होंने कहा कि बडे़ पैमाने पर जनमानस में जागरूकता उत्पन्न कर हिमाचल प्रदेश को चालान मुक्त राज्य बनाएंगे।

पौधरोपण कार्यों में छात्रों की अहम भूमिका

वन मंत्री ने कहा कि प्रदेश को स्वच्छ वातावरण एवं पर्यावरण युक्त राज्य बनाने के लिए जरूरी है कि यहां वन आवरण को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि वन लगाने में स्कूली बच्चों की भूमिका अहम है और अभियान के दौरान कम समय में हजारों-लाखों पोधों का रोपण हो जाता है। उन्होंने कहा कि बेटी अथवा बेटे के जन्म पर संबंधित परिवार को राज्य सरकार पांच पौधे देती है और इन पौधों को किसी अपने प्रिय के नाम से पालने की जागरुकता भी समाज में उत्पन्न की जा रही है।