Sunday, September 20, 2020 10:20 PM

148 बच्चों पर 2.32 करोड़ रुपए खर्च

ऊना-हिमाचल प्रदेश की जयराम ठाकुर सरकार बाल-बालिका सुरक्षा योजना के तहत अनाथ और असहाय बच्चों के पालन-पोषण तथा देखभाल के लिए पालक अभिभावकों को प्रति माह 2000 रुपए की सहायता राशि प्रदान करती है। ऐसे बच्चों के नाम हर माह 500 रुपए की एफडीआर भी बनाई जाती है। कहीं गरीबी और अभाव, अनाथ और असहाय बच्चों से उनका बचपन न छीन ले। इसलिए जयराम सरकार उन्हें हर माह यह आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। इन बच्चों को यह आर्थिक सहायता 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक प्रदान की जाती है। ये बच्चे बालिग होते ही एफडी में जमा धनराशि प्राप्त करने के हकदार हो जाते हैं। एफडी में पहले हर माह 300 रुपए जमा किए जाते थे। लेकिन संवेदनशील जयराम सरकार ने 22 जुलाई, 2020 से इसे बढ़ाकर 500 रुपए प्रतिमाह कर दिया है। बाल-बालिका सुरक्षा योजना का मुख्य उद्देश्य अनाथ तथा असहाय बाल-बालिकाओं को जिला बाल संरक्षण अधिकारी की निगरानी में पालन के लिए किसी संपन्न पारिवारिक वातावरण में रखना है ताकि उन्हें  बाल-बालिका आश्रमों में प्रवेश के लिए बाध्य न होना पड़े। योजना के तहत वर्ष 2016 से अब तक जिला ऊना के लगभग 200 बच्चों को इस योजना के तहत लाभान्वित किया जा चुका है। वर्तमान में 148 बच्चे इस योजना का लाभ ले रहे हैं और इस पर 2.32 करोड़ रुपए की धनराशि व्यय की जा चुकी है। जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस सतनाम सिंह बताते हैं कि अनाथ और असहाय बच्चे इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

इसके अतिरिक्त ऐसा बच्चा जिसके पिता का देहांत हो गया हो तथा मां ने दूसरी शादी कर ली हो और जो बच्चे की देखभाल नहीं करती हो या जिस बच्चे की मां का देहांत हो गया हो और पिता या माता-पिता दोनों जेल में हों या जिस बच्चे के माता-पिता दोनों एचआईवी पॉजिटिव हों, इस योजना का लाभ लेने के पात्र हैं। वहीं जिला बाल संरक्षण अधिकारी शाम लाल मल्होत्रा कहते हैं कि इस योजना का लाभ लेने वाले दंपति एवं बच्चा दोनों हिमाचल के स्थायी निवासी होने चाहिए।ं पालक माता-पिता की कुल आयु 105 वर्ष से अधिक और दंपति परिवार की आमदन 5000 रुपए प्रतिमाह से कम नहीं होनी चाहिए। लेकिन अगर बच्चे का भरण-पोषण दादा-दादी या नाना-नानी कर रहे हैं तो उन पर आयु तथा आमदन की शर्त लागू नहीं होगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए पालना परिवार को बच्चे की बेहतर देखभाल की लिखित सहमति प्रदान करनी होगी। ऐसा न होने पर दत्तक ग्रहण एजेंसी उनसे बच्चे वापस ले सकती है।

The post 148 बच्चों पर 2.32 करोड़ रुपए खर्च appeared first on Himachal news - Hindi news - latest Himachal news.