Friday, October 18, 2019 10:57 AM

150वीं वर्षगांठ… विचारों-भावों में आज भी बापू का बोलबाला

गगरेट -अहिंसा के पुजारी मोहन दास कर्मचंद गांधी के जन्मदिवस को आज हम गांधी जयंती के रूप में मना रहे हैं। वह अहिंसा का पुजारी जिसने लाठी नहीं बल्कि अहिंसा के मंत्र से ही इस देश को आजाद करवाने में अहम भूमिका निभाई। भगवान बुद्ध ने अगर शांति का मंत्र दिया था तो महात्मा गांधी ने उनके इस मंत्र को आगे बढ़ाते हुए अहिंसा का संदेश हर जगह दिया। गांधी जी आज के इस युग में कितने प्रासंगिक हैं इस पर ‘दिव्य हिमाचल’ ने कुछ लोगों की राय जाननी चाही। प्रस्तुत हैं उसके प्रमुख अंश।

अहिंसा के धर्म को निभाते हैं

राकेश शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी आज भी कितने प्रासंगिक हैं इसका अंदाजा इसी बात से चल जाता है कि उनके जाने के बाद भी हम अहिंसा के मूलमंत्र पर चल रहे हैं। आजादी के बाद भी हमने कभी युद्ध की पहल नहीं की बल्कि सदैव अहिंसा का ही मार्ग चुना है।

भारत को स्वच्छ बनाने में जुटा है पूरा देश

अशोक पुरी ने कहा कि महात्मा गांधी एक ऐसे स्वच्छ भारत की परिकल्पना करते थे जहां स्वच्छता हो, हर कोई निरोग हो। आज महात्मा गांधी के सपनों के भारत के निर्माण के लिए सरकार से लेकर हर शख्स स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने में जुटा है।

युवा पीढ़ी विदेशी ब्रांड की दीवानी

नरेंद्र शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी स्वदेशी को बढ़ावा देने के पक्षधर थे और वह खादी ही पहनते थे, लेकिन आज की युवा पीढ़ी विदेशी ब्रांड की दीवानी हुई है। हथकरघा उद्योग आज अंतिम सांसे गिन रहा है। महात्मा गांधी की शिक्षाओं पर अगर देशवासी चलें तो आर्थिक मंदी व बेरोजगारी की समस्या से निपटा जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में देनी होंगी अधिक सुविधाएं

अजय भारद्वाज ने कहा कि महात्मा गांधी के  सपनों का भारत गांवों में बसता है लेकिन आज भी देश के गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यही वजह है कि रोजगार की तलाश में और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गांवों से पलायन हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अगर आधारभूत ढांचा सुदृढ़ किया जाए तो महात्मा गांधी की आत्मा भी तृप्त होगी।

लघु कुटीर उद्योगों को मिले बढ़ावा

प्रमोद शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी लघु कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के पक्षधर थे। आज लघु कुटीर उद्योग संकट के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए कि लघु कुटीर उद्योग भी विदेशी उद्योगों का मुकाबला कर सकें। साथ में लघु कुटीर उद्योगों के तैयार माल को बाजार भी उपलब्ध करवाना होगा।