Thursday, October 17, 2019 02:03 AM

कालेज शिक्षा कितनी उच्च

हिमाचल प्रदेश के डिग्री कालेजों में रूसा के तहत नया सत्र शुरू हो गया है।  इस साल राज्य के कालेजों में दाखिले में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष जहां 60 हजार छात्रों ने दाखिला लिया था, वहीं इस बार 70 से 75 हजार छात्रों ने एडमिशन ली है। हिमाचल में कालेजों के आधारभूत ढांचे, गुणवत्ता और कमियों को दखल के जरिए पेश कर रही हैं ...

प्रतिमा चौहान

हिमाचल प्रदेश के कालेजों में रूसा के तहत नया सत्र शुरू हो गया है। 31 जुलाई को प्रवेश की तिथि खत्म होने के बाद कक्षाएं शुरू हो गई हैं। रूसा के तहत इस बार राज्य के कालेजों में पांच प्रतिशत दाखिले में बढ़ोतरी बताई जा रही है। पिछले वर्ष जहां 60 हजार छात्रों ने दाखिला लिया था, वहीं इस बार 70 से 75 हजार छात्रों के दाखिले को आंका जा रहा है। रूसा लागू होने के बाद छात्रों की एडमिशन में इजाफा हो रहा है। छात्रों का मानना है कि इससे बेशक बीच-बीच में परेशानियां आ रही हैं, लेकिन गुणवत्तायुक्त शिक्षा भी मिल रही है।  इसके साथ ही कालेजों में छात्रों की एनरोलमेंट में भी काफी हद तक बढ़ोतरी दर्ज हुई है। उच्च शिक्षा विभाग रूसा से छात्रों के बढ़े इनरोलमेंट की रिपोर्ट राज्य सरकार को भी जल्द सौंपने वाला है। बता दें कि उच्च शिक्षा विभाग में रूसा के बाद कालेजों में बढ़े इनरोलमेंट और गुणवत्ता को लेकर उपराष्ट्रपति भी हिमाचल को स्टेट अवार्ड से सम्मानित कर चुके हैं। एमएचआरडी के निर्देशों के बाद जिस तरह से प्रदेश में शिक्षा के स्तर में सुधार किया गया है, इसके लिए उपराष्ट्रपति व भारत सरकार प्रदेश की पीठ भी थपथपा चुके हैं। ऐसे में अब इस ताजा रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद हिमाचल का शिक्षा को लेकर रुतबा बढ़ गया है। हिमाचल में चार साल में कई नए कालेज खोले गए हैं,लेकिन कई संस्थानों में आधारभूत ढांचे की कमी है।

रूसा के बाद 14 फीसदी बढ़ी एडमिशन

हिमाचल में लागू राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान ने पिछले छह साल से युवाओं को सबसे ज्यादा कालेजों में पहुंचाया है। प्रदेश में रूसा लागू होने के छह साल बाद कालेजों में दाखिले का रिकार्ड टूटा है। शिक्षा विभाग के पास पंहुची ताजा रिपोर्ट के अनुसार कालेजों में जहां पर पहले छात्रों के दाखिले का ग्राफ 24.4 फीसदी था, जो अब बढ़कर 38.5 फीसदी हो गया है। यानी छह सालों के भीतर रूसा प्रणाली में दाखिले का ग्राफ 14 प्रतिशत बढ़ा है।

प्राइवेट नहीं, रेगुलर पढ़ाई को तवज्जो दे रहे छात्र

राज्य के बड़े कालेज, आरकेएमवी, कोटशेरा, सोलन, बिलासपुर, नाहन, संजौली में चार से पांच हजार छात्रों की संख्या  है। बता दें कि रूसा के तहत प्राइवेट पढ़ाई  खत्म होने की वजह से ज्यादा से ज्यादा छात्र कालेज में रेगुलर ग्रेजुएशन करने में रुचि दिखा रहे हैं।

65 नए कालेज खुले, ग्रामीण क्षेत्रों को महत्ता देगी सरकार

हिमाचल के कालेजों में तीन साल बाद छात्रों के दाखिले में बड़े रेशोंं के और भी कारण बताएं जा रहे हैं, जिसमें चार साल में खुले नए कालेज

भी एक है। बता दें कि हिमाचल  65 नए कालेज खोले गए हैं। खास बात यह है कि इन कालेजों को ग्रामीण क्षेत्रों में खोलने को ज्यादा तवज्जो दी गई है।

हिमाचल के कई कालेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर भी नहीं

हिमाचल  के  131 कालेज हैं। इन में से अधिकतर कालेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की भी काफी कमी है। नए कालेजों में तो छात्रों को बैठने के लिए कक्षाएं, लाइब्रेरी, कॉमन रूम से लेकर कोई भी सुविधा नहीं है। विभागीय जानकारी के अनुसार यही हाल राज्य के पुराने सरकारी कालेजों में भी है।

किराए के भवनों में चल रहे 25 से ज्यादा कालेज 

विभागीय जानकारी के अनुसार प्रदेश में 25 से ज्यादा ऐसे कालेज हैं, जो किराए के भवनों में चल रहे हैं। हर जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए कॉलेजों में इनका नाम शामिल है।

एचपीयू में अहम विषयों की पढ़ाई हो रही प्रभावित

प्रदेश विश्वविद्यालय में एमबीए, यूआईआईटी, एमटेक, आईआईएचएस, अर्थशास्त्र व हिंदी विभाग में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इन विभागों में जहां आठ-आठ शिक्षक होने चाहिए, वहीं दो व तीन शिक्षकों के भरोसे ही पढ़ाई हो रही है। हैरान तो यह है कि  इन में से भी अधिकतर शिक्षकों को गेस्ट फैकल्टी के तौर पर रखा गया है।

यूजी शिक्षकों के भरोसे ही पीजी की कक्षाएं

प्रदेश के जिन सरकारी कालेजों में पीजी कक्षाएं शुरू की गई हैं, वहां पर नए शिक्षकों को यूजीसी नियमों के तहत भर्ती नहीं किया गया है। ऐसे में पहले से ही रूसा के तहत हजारों छात्रों को पढ़ा रहे कालेज के प्रोफेसर पीजी कर छात्रों को पढ़ाने को भी मजबूर हैं। बता दें कि कालेजों में पीजी पढ़ा रहे कालेज के अधिकतर प्रोफेसर पीएचडी पास भी नहीं हैं।

25 कालेजों में पीजी कोर्स

बता दें कि हिमाचल के लगभग 25 से ज्यादा कालेजों में पीजी कोर्सेज चल रहे हैं। इनमें आर्ट्स विषय पहले से ही चल रहे थे, तो वहीं अब साइंस, कॉमर्स विषय में भी पीजी कोर्स शुरू कर दिए हैं।

लोक प्रशासन-एमबीई में रूझान घटा

हिमाचल में पीजी कोर्सेज में दो ऐसे विषय हैं, जहां हर साल छात्रों की संख्या में गिरावट आ रही है। लोक प्रशासन व एमबीई (मास्टर ऑफ बिजनेस इकोनॉमिक्स) में छात्रों को रुझान कम हो रहा है। जानकारी के अनुसार रोजगार के अवसर ज्यादा न होने की वजह से युवा इन दोनों विषय को नहीं पढ़ना चाह रहे हैं। बता दें कि एचपीयू में वहीं छात्र इन दोनों विषयों में दाखिला लेते हैं, जिन्हें केवल विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए आईकार्ड की आवश्यकता होती है। इसके अलावा योगा में भी कम ही छात्र दाखिला ले रहे हैं।

27.3 प्रतिशत छात्राओं ने बढ़ाया मार्जिन

शिक्षा विभाग का दावा है कि छात्रों के रेगुलर कालेजों में पढ़ने का यह आंकड़ा कई वर्षों बाद टूटा है। विभाग की ताजा सर्वे रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि इतने सालों में सबसे ज्यादा दाखिले छात्राओं द्वारा ही लिए गए हैं। विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 27.3 प्रतिशत छात्राओं ने रूसा के तहत कालेजों में दाखिला लिया है। शिक्षा विभाग की इस सर्वे रिपोर्ट से साफ है कि प्रदेश में लागू रूसा सिस्टम से भले ही छात्रों को कुछ समय परेशानी हुई हो, लेकिन इससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।

चार साल पहले खुले कालेजों में नहीं बढ़ रही छात्रों की संख्या

राज्य में चार साल पहले खुले कालेजों में हालत ऐसी है कि यहां पर छात्रों की संख्या नहीं बढ़ रही है। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नए कालेज में सौ से ज्यादा संख्या किसी भी कालेज में नहीं है। वहीं इन्फ्रास्ट्रक्चर व अन्य सुविधाएं न होने की वजह से यह संख्या भी कम हो रही है।

ये हैं नए महाविद्यालय

शिक्षा में गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए बीते चार साल में प्रदेश में 65 नए कालेज खोले गए हैं। हां यह जरूर है कि इन कालेजों को तो खोल दिया गया पर पर्याप्त स्टाफ तैनात नहीं किया गया। वर्तमान में स्थिति यह है कि आज यहां न तो शिक्षक हैं और न ही आधारभूत ढांचा। इस कारण यहां पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। नए खुल कालेजों की बात करें तो उनमें नगरोटा सूरियां, खुंडियां, बड़ोह, लंज, तकीपुर, डाडासीबा, जीसी शिवनगर, रे, रक्कड़, मझीन, जंदौर, मुलथान, ज्वालाजी, जीसी संघ भड़ोली, देहरा और मटौर आदि शामिल हैं। इसके अलावा जिला कुल्लू की बात करें तो यहां गड्डागुसैन, सैंज, निरमंड में कालेज खोले गए हैं। इसी तरह  लाहुल-स्पीति के काजा में भी कालेज खोला गया है। अगर जिला मंडी की बात की जाएं तो यहां संधोल, लड़भड़ोल, रिवालसर, बलद्वाड़ा, निहरी, पनारसा, कोटली, डेहर, थाची आदि में नए कालेज खोले गए हैं। जिला शिमला में ननखड़ी, कुमारसैन और चायल कोटी, जवाहरलाल नेहरू, धामी, टिक्कर, चौपाल, संस्कृत कालेज तुगेश, ज्यूरी, पवाबो, सरैण में नए कालेजों की व्यवस्था की गई है। जहां तक सोलन जिला की बात है तो यहां दिग्गल, धर्मपुर, बरोटीवाला, कंडाघाटल, रामशहर, जयनगर, दाड़लाघाट जबकि सिरमौर जिला में सराहन, भराली, कफोटा, रोनहाट, ददाहू, फाटी पटेल, नारग को कालेज की सौगात मिली है। इसी तरह ऊना जिला में दौलतपुर चौक, चौकी मन्यार, खड्ड, हरोली, बसदेहड़ा स्वामी विवेकानंद कालेज खोले गए हैं।

एचपीयू में प्रोफेसरों के 150 पद खाली

प्रदेश विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में प्रोफेसरों के लगभग 150 पद खाली पड़े हुए हैं। कई सालों से इन विभागों में खाली पड़े पदों की वजह से छात्रों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।  हालांकि विश्वविद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए जल्द प्रक्रिया शुरू होगी। जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय इन पदों को विज्ञापित करने की तैयारियों में जुट गया है। औपचारिकताएं पूरी कर विश्वविद्यालय प्रशासन सभी रिक्त पदों को विज्ञापित कर देगा। विश्वविद्यालय में उन विभागों में शिक्षकों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा, जहां पर शिक्षकों की अत्यधिक कमी है और रिक्त पदों के चलते जहां पर शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के करीब 150 पदों को भरने को हरी झंडी मिली है। इन पदों को भरने के लिए भी यूजीसी की ओर से जारी रेगुलेशन्स को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अपनाएगा।

कालेज अब परामर्शदाता भी बनेंगे

बता दें कि अब नेक से ए ग्रेड प्राप्त कालेज सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों के परामर्शदाता भी बनेंगे। यानी अब जिन कालेजों ने नेक से ग्रेड नहीं ली है, उन्हें  जरूरी सलाह दी जाएंगी। राज्य के उन कालेजों को अब नेक से ग्रेड लेने में आसानी हो जाएगी, जिन्होंने अभी तक नेक को अप्लाई नहीं किया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसके लिए नेक से मान्यता प्राप्त सभी राज्यों के कालेजों को दूसरे कालेजों का परामर्शदाता बनने का आह््वान किया है। वहीं सरकार व शिक्षा विभाग को भी नेक से ए ग्रेड प्राप्त करने वाले कालेजों को आइडेंटिफाई करने को कहा है। एक साल तक यूजीसी की यह परियोजना शिक्षण संस्थानों को ग्रेड दिलवाने के लिए सहायता करेंगी। उसके बाद इस योजना को खत्म कर दिया जाएगा। बता दें कि निजी कालेज भी दूसरे संस्थानों को नैक से बेहतर ग्रेड दिलाने के लिए परामर्शदाता बन सकते हैं। हालांकि इसके लिए संस्थानों को ए ग्रेड की शर्त पूरी करना जरूरी है। गौर हो कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता लाने के मकसद से यूजीसी ने परामर्श की योजना विकसित की है, जो गैर - प्रत्यायन प्राप्त संस्थानों को 2022 तक प्रत्यायन प्राप्त व मार्गदर्शन के लिए एक नई पहल है। बताया जा रहा है कि 2022 तक देश भर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को नैक से मान्यता दिलवानी है। ऐसे में जिन कालेजों को नैक से मान्यता लेने में मुश्किलें आ रही हैं, उन्हें परामर्श के माध्यम से मान्यता दिलवाई जाएगी।

ऑटोनॉमस का दर्जा लेना भी चुनौती

प्रदेश के ऐसे कालेज भी हैं, जहां छात्रों को मूलभूत सुविधा नहीं है, उनके लिए ऑटोनॉमस का दर्जा लेना बड़ा चुनौती पूर्ण है। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के नियमों ने सरकार व शिक्षा विभाग की चिंता को बढ़ा दिया है। नई शिक्षा नीति के मानकों को देखें तो 2030 तक सभी सरकारी कालेजों को ऑटोनॉमस का दर्जा लेना होगा। हैरत है कि प्रदेश के 98 प्रतिशत कालेज ऐसे हैं, जो ऑटोनॉमस की शर्तों को ही पूरा नहीं कर पाते हैं। ऐसे में इन कालेजों को कभी ओटॉनामस का दर्जा मिल पाएगा, यह कहना स्वाभाविक नहीं है। दरअसल केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति का हवाला देते हुए देश भर के सभी कालेजों को ऑटोनॉमस का दर्जा लेने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने साफ किया है कि ऑटोनॉमस का दर्जा मिलने की सूरत में ही कालेजों को केंद्र से बजट की ग्रांट जारी होगी।

नए कालेजों में 70 प्रतिशत बेटियां

प्रदेश में खुले नए कालेजों में बेटियों की संख्या ज्यादा है। शिक्षा विभाग के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में खुले नए कालेजों में 70 प्रतिशत बेटियां ही पढ़ती हैं। विभाग के सर्वे में खुलासा हुआ है कि नए कालेजों में बेटियों की ज्यादा संख्या होने का कारण यह है कि वह दूर दराज के क्षेत्रों में पढ़ने नहीं जा सकती। सरकार द्वारा नजदीक कालेज खुलने की वजह से यहां पर लड़कों के मुताबिक लड़कियां ज्यादा पढ़ने के लिए आती हैं।

हिमाचल में 65 कालेज नाकारा, छात्र भी नाममात्र

हिमाचल प्रदेश में भले ही कालेजों में छात्र ज्यादा संख्या में दाखिला ले रहे हैं, लेकिन हकीकत यह भी है कि उच्च शिक्षा की हालत ऐसी है कि यहां पर शिक्षण संस्थान खोल तो दिए हैं, लेकिन उसके बाद इनके विकास के बारे में सोचने वाला कोई नहीं है। हैरत है कि राज्य में 65 ऐसे नए कालेज हैं, जो नाकारा घोषित हो चुके है, यानी इन कालेजों के पास न तो अपने भवन हैं और न ही छात्रों की संख्या ज्यादा है। पूर्व सरकार के कार्यकाल में खोले गए यह शिक्षण संस्थान एक मजाक बनकर रह गए हैं। बता दें कि नए कालेजों में छात्र संख्या 20 से लेकर सौ तक ही सीमित होकर रह गई है। हैरत है कि नए कालेजों में कई ऐसे भी कालेज हैं, जहां पर छात्रों की संख्या 20 से भी कम हैं। ऐसे कालेजों में रेगुलर शिक्षकों को भेजना मुश्किल है। पूर्व सरकार के कार्यकाल में जहां नए कालेजों को चुनाव के नजदीक एक-एक कर खोला गया, वहीं अब वर्तमान सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए इन संस्थानों को बंद नहीं करना चाहती है। वर्तमान प्रदेश सरकार चाहती है कि इन कालेजों को किसी न किसी तरह से बढि़या तरीके से चलाकर छात्रों को सुविधा दी जाए। जानकारी के अनुसार 65 कालेजों में से 25 से 30 ऐसे भी कालेज हैं, जिनके पास अपने भवन तो दूर बल्कि कालेज बनाने के लिए लैंड भी नहीं मिल पाई है। जानकारी मिली है बाकी कालेज किराए के कमरों में भी चल रहे हैं। ऐसे में कालेज में पढ़ने वाले छात्रों को खुला स्पेस भी नहीं मिल पा रहा है। एक व दो कमरे में चल रही कालेज की पढ़ाई कई सवालिया निशान भी शिक्षा में गुणवत्ता लाने के दावों की पोल खोल रही है। उच्च शिक्षा के यह हाल साफ जाहिर करते हैं कि सरकारी तंत्र शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बिलकुल भी गंभीर नहीं है। हर जगह पर कालेज से हालत यह हो गई है कि रिजल्ट में भी इसका असर देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के कालेजों में पढ़ने वाले छात्रों के रिजल्ट ठीक नहीं आ पा रहे हैं।

शिक्षकों की नहीं हुई तैनाती इधर-उधर से चल रहा काम

हिमाचल में खोले गए नए कालेजों में शिक्षकों की तैनाती भी नहीं की गई है। एक कालेज से दूसरे कालेजों में शिक्षकों को भेजा जा रहा है। हैरत तो इस बात की है कि शिक्षकों की तैनाती न होने की वजह से उक्त कालेजों के छात्रों को खासी दिक्कतें भी पेश आ रही हैं। जानकारी मिली है कि अधिकतर नए कालेजों में आर्ट्स, व कॉमर्स के ही ज्यादा सिलेबस शुरू किया गए हैं। वहीं , जिन नए कालेजों में साइंस से जुड़े विषयों को शुरू भी किया गया है, वहां पर तो शिक्षकों का होना तो सपने की ही तरह है। गौर हो कि इस तरह से नए कालेज खोलने की वजह से पुराने कालेजों में भी शिक्षा व्यवस्था की हालत बहुत बुरी हो गई है। कालेज प्रोफेसर भी एक कालेज से दूसरे कालेज में जाने की वजह से खासे परेशान हो गए हैं। हालांकि शिक्षा विभाग ने वरचुअल क्लासेज की शुरुआत की है, लेकिन यह भी एक कालेज से आगे नहीं बढ़ पाई है, ऐसे में यह तो साफ है कि अब राज्य में उच्च शिक्षा भी खतरे में है।