अपनी स्पष्ट वादिता के लिए जाने जाने वाले करण जौहर उन कुछेक फिल्म निर्माताओं में से एक हैं जिन्हें अपनी पिछली गलतियों को स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होती। अपनी पहली फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ के बारे में बात करते हुए, जिसका हाल ही में फिल्म के 20 साल पूरे होने के उपलक्ष्य पर मेलबर्न के भारतीय फिल्म महोत्सव में प्रीमियर हुआ, उन्होंने स्वीकार किया कि पहली बार फिल्मकार के रूप में काम करते हुए उन्होंने इस बात का ध्यान नहीं रखा था कि फिल्म में महिलाओं का चित्रण नैतिक रूप से सही है कि नहीं। उन्होंने स्वीकार किया, केके एचएच राजनीतिक रूप से सबसे गलत फिल्म है। मुझे याद है कि शबाना आजमी ने यूके में कहीं फिल्म देखी और फिर उन्होंने मुझे फोन किया।

वह हक्की बक्की थीं। उन्होंने कहा तुमने ये क्या दिखाया है। उस लड़की के छोटे बाल हैं, इसलिए वह आकर्षक नहीं है और अब उसके बाल लंबे हैं तो वह सुंदर है। तुम्हें इस बारे में क्या कहना है। मैंने कहा कि मुझे खेद है तो उन्होंने कहा, क्या!तुम्हें बस इतना ही कहना है। मैंने कहा हां, क्यों कि मुझे पता है कि आप जो कह रही हैं वह सही है। इसका असली एहसास उन्हें बहुत बाद में हुआ और तब से अपने पात्रों के लिए उन्होंने काफी मजबूत पात्र लिखे हैं जिनमें भावनात्मक गहराई होती है, सहानुभूति होती है और जिनका चित्रण कोई गलत संदेश नहीं देता। हालांकि, जौहर पर मुख्यधारा का लेबल लग चुका है। एक निर्माता के रूप में एक लंबा सफर तय करते हुए उनके प्रदर्शनों की सूची में अलग-अलग तरह का सिनेमा जुड़ा है जो वेबना रहे हैं।  पिछले साल की उनकी शॉर्ट फिल्म लस्ट स्टोरीज से लेकर मेघना गुलजार की राजी और उनकी आने वाली फिल्म गुड न्यूज तक। वे कहते हैं, जिस तरह की फिल्में हम बनाते हैं या प्रोड्यूस करते हैं,उसका के्रडिट हमें बहुत कम मिलता है। हमें अभी भी मुख्य धारा के रूप में टैग किया जा रहा है जो किस ही नहीं है।

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