Sunday, September 22, 2019 07:51 AM

53 साल बाद जीती हक की लड़ाई

बाड़ा गांव के पूर्व सैनिक प्रीतम सिंह को एरियर संग उम्र भर मिलेगी पेंशन

नगरोटा सूरियां  -विकास खंड नगरोटा सूरियां के तहत पंचायत त्रिलोकपुर जवाली उपमंडल के गांव बाड़ा के पूर्व सैनिक प्रीतम चंद को आखिरकार लंबी कानूनी जंग लड़ने के बाद अपना हक मिल ही गया है। करीब 53 साल के बाद न्याय मिलने से उसके परिजन काफी राहत महसूस कर रहे हैं। जवाली के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट आरके मनकोटिया ने बताया कि प्रीतम चंद 15 जनवरी, 1962 को आर्मी मेडिकल कोर में भर्ती हुआ था । उसके बाद पहली जुलाई, 1966 को चार साल 168 दिन की नौकरी के दौरान उसे अंडर मेडिकल कैटेगरी तंत्रिका रोग  की वजह से 20 प्रतिशत दिव्यांगता अस्थायी के तहत डिस्चार्ज करके दिव्यांगता पेंशन देकर घर भेज दिया। उसके बाद 1967 में री सर्वे मेडिकल बोर्ड द्वारा उसकी दिव्यांगता 20 प्रतिशत से कम हेाने के कारण पेंशन बद कर दी गई और प्रीतम चंद को किसी प्रकार की मेडिकल रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं करवाई । उसके बाद प्रीतम चंद  ने संबधित सेना अधिकारियों से संपर्क व पत्राचार किया , लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद प्रीतम चंद ने एक अपील भी डाली, लेकिन फिर भी विभाग टस से मस नहीं हुआ। उसके बाद 15 अक्तूबर, 2018  को प्रीतम चंद ने अपने अधिवक्ता राकेश मनकोटिया के माध्यम से  मजबूरन आर्म्ड फोर्स टिब्यूनल चंडीगढ़ में यचिका दायर की। इस पर आर्म्ड फोर्स के ट्रिब्यूनल बैंच के जस्टिस मोहम्मद ताहिर व प्रशासनिक सदस्य वाइस एडमिरल एजी थपलियाल ने सभी दलीलें सही मानते हुए और सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील संख्या 5605 वर्ष 2010 सुखविंद्र सिंह बनाम यूनियन ऑफ  इंडिया एवं अन्य के महत्त्वपूर्ण फैसले जिसके प्रमुख बिंदु में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हमें  तार्किक रूप से  ऐसा लगता है कि जहां दिव्यांगता 20 प्रतिशत से कम है उसे सेवा से बाहर करने और पेंशन से वंचित करने का कोई प्रावधान नहीं है । उसका हवाला देते हुए  रक्षा सचिव भारत सरकार को  प्रीतम चंद को 25 जून , 2014 से 50 प्रतिशत दिव्यांगता पेंशन एरियर सहित ताउम्र देने का आदेश पारित किया ।