Monday, September 23, 2019 02:28 AM

55 साल बाद हुआ देवताओं का मिलन

कांढीखहल मेले में खणी के देव श्री छमाहुं-शरोह के देव श्री मार्कंडेय का मिलन देख भावुक हुए श्रद्धालु

बालीचौकी - लगभग 55 साल बाद बालीचौकी क्षेत्र के कांढीखहल मेले में बालीचौकी के दो देवताओं के मध्य ऐतिहासिक देव मिलन हुआ। इस दौरान मेले में आए हजारों लोगों ने खणी के देव श्री छमाहुं व शरोह के देव श्री मार्कंडेय के देव मिलन को नम आंखों से नमन किया। इन दोनों देवताओं के मध्य लगभग 55 वर्ष पूर्व इसी मेले में इस तरह का ऐतिहासिक मिलन हुआ था। इसके गवाह आज भी कुछ लोग दोनों क्षेत्रों में जिंदा है। हालांकि नई पीढ़ी के लोगों को इन दोनों देवताओं के मध्य देव संबंधों की जानकारी नहीं है, लेकिन 55 वर्ष बाद देवता मारर्कंडेय की भूमि पर शेष अवतार माने जाने वाले देव छमाहूं के आगमन से देवता मार्कंडेय की 60 रायत के लोग काफी प्रसन्न है। देव श्री मार्कंडेय के पुजारी रूप लाल शर्मा ने बताया कि हम अतीत के पन्नों को भुलाकर अब नए सिरे से दोनों देवताओं की देव परंपरा को नियमित रूप से निभाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देवताओं के मध्य देव मिलन कई बार हुआ है, लेकिन देवधार के इस स्थान काढ़ी खहल  पर लगभग 55 वर्ष बाद देव श्री छमाहूं के पवित्र कदम पड़े हैं, हम सब हर्षित हैं। गौरतलब है कि देव छमाहूं को कुल्लू के चार छमाहुओं में शुमार किया जाता है और आम तौर पर इस देवता की हारगियां कुल्लू जिला के देवताओं के साथ ही आयोजित की जाती है। 55 साल के उपरांत देव संबंधों पर जमी बर्फ के पिघलने से दोनों ओर के देवलु खुश हैं। देवता छमाहूं के कारदार गोबिंद राम ने भी उस देव समागम को दोनों देवताओं की रजा बताते हुए खुशी जाहिर की है। दूसरी ओर प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले कांढीखहल मेले में इस बार भारी संख्या में लोग मेला देखने के लिए उमड़े हैं। मेले में देव चुंजवाला का विशेष रूप में रहेंगे देव छमाहू ओर देव चुंजवाला और देव मार्कंडेय के देवलुओं की हारगी भी शुरू हो गई पर इस बार देवलु इस वर्ष कंलगी व चोले पहन कर  सरजी नाटी व बाहमणुओ  से लोगों का भरपूर मनोरंजन करेंगे ।