Monday, April 06, 2020 05:44 PM

70 ने ली थी एडमिशन, अब हैं 27

सांगना सताहन स्कूल में शिक्षक न होने से अन्य पाठशालाओं में जाने को मजबूर हो रहे छात्र

नौहराधार - जिस पाठशाला में एक अध्यापक जमा एक व जमा दो कक्षा को पढ़ाते हैं, उस पाठशाला में बच्चों की पढ़ाई कैसे होती होगी। ऐसा ही एक स्कूल गिरिपार क्षेत्र का दुर्गम क्षेत्र सांगना सताहन है। वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के इस स्कूल में भाजपा की सरकार बनते ही यहां से अध्यापकों के स्थानांतरण का सिलसिला शुरू हो गया। अब आलम यह है कि इस पाठशाला में जमा एक व दो कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए पिछले दो वर्षो से प्रिंसीपल के अलावा एक मात्र इतिहास के प्रवक्ता हैं । प्रिसीपल को पाठशाला के अन्य सभी कार्यों को भी देखना पड़ता है। इसलिए दो कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी मात्र एक शिक्षक के कंधे पर है। शिक्षकों की कमी के चलते इस पाठशाला को छोड़कर बच्चे दूसरे स्कूलों में जाने के लिए विवश हो रहे हैं। वर्ष 2019 में जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ था तो इस पाठशाला में जमा एक कक्षा में 40 छात्र-छात्राओं ने जमा दो कक्षा में 30 छात्रों में दाखिले लिए थे । 2019 में दोनों कक्षाओं में कुल 70 छात्रों ने एडमिशन लिया था । पाठशाला में पूरे वर्ष एक भी अध्यापक की नियुक्ति न होने से बच्चों ने इस पाठशाला को अलविदा कहना शुरू कर दिया। साल के आखिर महीने तक जमा एक के 25 व जमा दो कक्षा के 43 बच्चों को इस पाठशाला को छोड़कर दूसरी पाठशालाओं में दाखिले लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। दुर्गम क्षेत्रों में अध्यापकों का न टिकने के मुख्य कारण यह हैं, जैसे ही प्रदेश में सरकारें बदलती हैं सरकार की प्राथमिकता विकास करने की बजाय कर्मचारियों को इधर-उधर करने की होती है। दुर्गम क्षेत्रों से सरकार चहेतों को  उनके पसंदीदा स्थानों पर बिना रिलिवरों के ही भेज देती है । परिणाम यह होता है कि लंबे समय तक दूरदराज के क्षेत्रों में कर्मचारियों के अधिकतर पद खाली रहते हैं। यदि इन क्षेत्रों में कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है, तो वह ज्वाइनिंग से पहले ही अपने पसंदीदा स्थान में अपनी एडजेस्टमेंट करवा देते हैं, यूं तो सभी विभागों में अदला-बदली चलती है, मगर शिक्षा विभाग सबसे अधिक स्थानांतरण किए जाते हैं, जिसका खामियाजा ग्रामीण क्षेत्रों के दुर्गम क्षेत्रों के अभिभावकों व छात्रों को भुगतना पड़ता है । एसएमसी अध्यक्ष बलवीर सिंह चौहान, पंचायत प्रधान देवेंद्र सिंह, जगत शर्मा, पूर्व प्रधान जगदीश ठाकुर व जालम सिंह ने बताया कि मार्च में वार्षिक परीक्षाएं होनी हैं। पढ़ाई के लिए मात्र 15 दिन शेष हैं, ऐसे में बच्चों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिना अध्यापक के वह परीक्षाओं की तैयारियां कैसे करें। अभी आगे जमा एक में दाखिले शुरू होने हैं । बिना स्टाफ  के अभिभावक अपने बच्चों को कैसे दाखिले दिलाएंगे । समाजसेवी जगत सिंह शर्मा ने बताया कि एसएमसी के खर्चे पर स्थानीय नेता व एसएमसी के प्रतिनिधि स्टाफ  की मांग लो कलर शिमला के भी कई चक्कर काट चुके हैं, मगर उसके बावजूद सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। क्षेत्र के लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस पाठशाला में जल्द ही प्रवक्ताओं के खाली पड़े सभी पदों को भरा जाए, ताकि बच्चे परीक्षाओं की तैयारियां शुरू कर सके ।