Friday, December 06, 2019 09:54 PM

700 नन्हे वैज्ञानिक करेंगे रिसर्च

बिलासपुर गर्ल्ज स्कूल में राज्य स्तरीय बाल विज्ञान सम्मेलन का शुभारंभ, जिलाधीश ने किया मॉडलों का अवलोकन

बिलासपुर -नन्हें बाल वैज्ञानिक कड़ी मेहनत करेंगे तभी आगे चलकर बेहतर वैज्ञानिक बनेंगे। यह बात उपायुक्त राजेश्वर गोयल ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कन्या बिलासपुर में राज्य स्तरीय बाल विज्ञान सम्मेलन-2019 का शुभारंभ करने के उपरांत प्रदेश के विभिन्न जिलों से एकत्रित नन्हें वैज्ञानिकों को संबोंधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में बाल वैज्ञानिक भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस बाल वैज्ञानिकों को अपने वैज्ञानिक और नवीन कौशल को दिखाने और साझा करने के लिए तथा बाल वैज्ञानिकों के बीच वैज्ञानिक स्वभाव और दृष्टिकोण को बनाने और विकसित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस 10 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के बाल वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि बाल वैज्ञानिक महत्त्वपूर्ण सामाजिक समस्याओं और उनके कारणों का अध्ययन करें और उसके उपरांत वैज्ञानिक प्रक्रियाओं  का उपयोग करके उन्हें हल करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस विज्ञान की खोज की भावना को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा हमारे आसपास हर जगह विज्ञान है विज्ञान की शिक्षा उत्सुकता से ईंधन देती है और बच्चों को मूल्यवान विचार, कौशल और भविष्य के संभावित कैरियर को बनाने के लिए विकल्प प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल कठिन परिभाषाएं और सूत्र नहीं हैं बल्कि यह समस्याओं, घटनाओं और वस्तुओं को गहनता से और अलग ढंग से व्याख्या करने और सौहार्दपूर्ण ढंग से समाधान खोजने के लिए एक दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा भविष्य का वैज्ञानिक है और प्रत्येक वस्तु एक वैज्ञानिक उपकरण है बच्चों को ऐसी शिक्षा प्रदान करने और उनकी बुद्धि को प्रोत्साहित करने के साथ उनके आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस का विषय क्लीन ग्रीन और हेल्दी नेशन के लिए विज्ञान, प्रोद्यौगिक और नवाचार है। उन्होंने कहा कि एचपी काउंसिल फॉर साइंस टेक्नोलॉजी एंड एनवायरमेंट हिमकोस्ट 1996 से राज्य में स्कूली बच्चों के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, ताकि कम उम्र के बच्चों के लिए छह गतिविधियों जिसमें विज्ञान गतिविधि कार्नर, वैज्ञानिक परियोजना रिपोर्ट, इनोवेटिव साइंस मॉडल, विज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, गणितीय ओलंपियाड व विज्ञान स्किट इत्यादि का आयोजन करके युवा मन में छिपी प्रतिभा को बाहर लाया जा सके। उन्होंने कहा कि विज्ञान में बच्चों को मात्र फार्मूले सीखाना नहीं बल्कि उन्हें अपने परिवेश में प्रतिदिन होने वाली छोटी-छोटी गतिविधियों के व्यवहारिक रूप में अध्ययन बारे भी प्रेरित कर उसमें रुचि पैदा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा तैयार किए गए छोटे-छोटे मॉडल दूसरे बच्चों को भी विज्ञान कौशल के रोमांच से विज्ञान रुचि की ओर आकर्षित करते हैं। उन्होंने तकनीकी दक्षता व विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने के लिए अध्यापकों द्वारा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देकर बच्चों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का अवलोकन किया तथा बाल वैज्ञानिकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण शिक्षा के लिए कम लागत से तैयार मॉडल खोज विज्ञान की प्रारंभिक सीढ़ी है। इसलिए अध्यापक बच्चों में पढ़ाई के साथ विज्ञान के प्रति भी सोच पैदा करें। उन्होंने अध्यापकों से आग्रह किया कि बच्चों को अध्यात्मिकता के बारे में जागरूक करते रहें। उन्होंने अभिभावकों से भी आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों की प्रतिदिन की दिनचर्या पर ध्यान रखें और नैतिक मूल्यों, कर्त्तव्य पालन और अनुशासन का पाठ पढ़ाएं।

सम्मेलन में 700 बाल वैज्ञानिक ले रहे हिस्सा

इससे पहले उपनिदेशक प्रारंभिक सुदर्शन कुमार ने मुख्यातिथि का स्वागत करते हुए बताया कि 13 से 16 नवंबर तक आयोजित किए जा रहे चार दिवसीय राज्य स्तरीय विज्ञान सम्मेलन में प्रदेश भर के 700 बाल वैज्ञाानिक विभिन्न गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाल विज्ञान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभाओं को जानने के लिए यह सम्मेलन बहुत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि विज्ञान का प्रचार-प्रसार समाज से अंधविश्वास दूर कर बच्चों को विज्ञान के रहस्य बताकर उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा करता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को खोज विज्ञान के साथ जोड़ने के लिए स्कूल स्तर पर रोजमर्रा की घटनाओं को विज्ञान के साथ जोड़कर इसे और सरल बना कर वैज्ञाानिक गतिविधियों से व्यवहारिक बनाया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान इन्होंने भरी हाजिरी इस मौके पर राष्ट्रीय शैक्षणिक समिति के सदस्य जेएम शर्मा, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण की राज्य स्तरीय समन्वयक प्रनीता ठाकुर, उपनिदेशक उच्च शिक्षा अमर सिंह ठाकुर, विज्ञान अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजय शर्मा, महासचिव अमृत महाजन के अतिरिक्त अन्य गणमान्य उपस्थित थे।