Tuesday, June 15, 2021 12:17 PM

आनी मेला फिर चढ़ा कोरोना की भेंट

स्टाफ रिपोर्टर-आनी कुल्लू जिला के बाह्य सिराज क्षेत्र की शान समझे जाने बाला पारंपरिक चार दिवसीय जिला स्तरीय आनी मेला, इस वर्ष भी लगातार दूसरी बार कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गया है। जिससे यहां की जनता अपने व्यापार व मनोरंजन को लेकर हताश हो गई है। आनी मेला प्रति वर्ष बैसाख की 25 प्रविष्ठे से 28 प्रविष्ठे तक मनाया जाता है, जिसमें यहां के प्रमुख आराध्य गढ़पति देवता शमशरी महादेव, देहुरी नाग, पनेबी नाग, कुलक्षेत्र महादेव और कुई कंडानाग शामिल होते हैं। यह मेला कब, क्यों और कैसे मनाया गया, इसके पीछे एक ऐतिहासिक पहलू है, जो यहां के बुुजुुर्गों से सुनने को मिलता है। बुजुर्ग बतातें हैं कि आनी मेले को मनाने के पीछे सांगरी रियासत के तत्कालीन राजा हीरा सिंह की सोच थी।

चूंकि आनी भी सांगरी रियासत का एक भाग था और ऐसे में राजा ने आनी क्षेत्र के लोग की समस्याओं को सुनने व उन्हें न्याय दिलाने के लिए आनी में भी एक महल का निर्माण किया। एक समय आनी क्षेत्र की जनता एक भयंकर बीमारी की चपेट में आ गई, जिससे लोगों में त्राहि-त्राहि मच गई। इस महामारी से बचाव के लिए लोग राजा के पास गए। राजा तब लोगों की रक्षा के लिए यहां के आराध्य देवता शमशरी महादेव की शरण में गए और उनसे महामारी को खत्म करने की फरियाद लगाई। देवता ने राजा की फरियाद सुनी और बीमारी का खात्मा हुआ। राजा ने तब इस खुशी को साझा करने के लिए ईष्ट देवता के सम्मान में मेला मनाने का निर्णय लिया, जिसके लिए बैसाख की 25 प्रविष्ठे का दिन निर्धारित हुआ और तब से लेकर आज तक यह मेला निरंतर मनाया जाता है।