Monday, October 18, 2021 04:40 PM

सेना और सैन्य अभ्यास

बीते सप्ताह मेरे गृह क्षेत्र कांगड़ा में लगातार सावन की झड़ी एवं कोरोना ने हिंदी दिवस और सैर के त्यौहार पर भी लोगों को घरों में रहने को मजबूर कर दिया। मक्की की फसल में लगी सुंडी ने किसानों की मुश्किल इतनी बढ़ा दी कि उपज तो दूर की बात, घास भी पशुओं के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल गर्माने लगा है। यहां नेताओं ने ताबड़तोड़ रैलियां शुरू कर दी हैं, डेंगू और कोरोना से परेशान लोगों को राम राज्य के सपने दिखाकर कभी हनुमान, कभी अब्बा जान तो कभी चाचा जान की बात हो रही है, जबकि आधारभूत मुद्दों पर न तो किसी पार्टी का कोई नेता बात कर रहा है और न ही मीडिया। इसी के साथ बीते 3 से 16 सितंबर तक रूस के नोवग्रोद क्षेत्र में बहुदेशीय सैन्य अभ्यास ‘जैपड 2021’ का आयोजन किया गया जिसमें चीन, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, वियतनाम आदि देशों ने पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया जिसका मतलब है कि इन देशों की सेना इस अभ्यास में हिस्सा नहीं ले सकती थी, पर वहां के नुमाइंदे अभ्यास के दौरान की जाने वाली गतिविधियों को देख सकते थे। यह सैन्य अभ्यास भारतीय सेना के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था कि इसमें भारत, रूस, बेलारूस. आर्मेनिया, कजाकिस्तान सहित यूरेशिया और दक्षिण एशिया के कुल 17 देशों की सेनाओं ने हिस्सा लिया। भारतीय सेना की तरफ से इस अभ्यास में नागा रेजीमेंट के 200 जवानों के अलावा मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री और भारतीय वायु सेना के कमांडो भी हिस्सा बने। एक तरफ जहां रूसी सेना ने अपने अत्याधुनिक हथियारों से दुनिया के सामने अपनी ताकत दिखाई, वहीं भारतीय सेना की नागा रेजीमेंट के जवानों ने दुश्मन को हराने के लिए एक से बढ़कर एक कारनामे को अंजाम दिया।

 भारतीय जवान यहां रूस और अन्य मुल्कों की सेनाओं के साथ सैन्य अभ्यास में आग बरसा रहे थे, वहीं पर्यवेक्षक के तौर पर चीन और पाकिस्तानी सेना के अधिकारी टकटकी लगाकर भारत के दमदार प्रदर्शन को देखते रहे और जाहिर है यह देख कर उनमें चिंता की लकीरें खींचने लगी हैं। जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैपड 2021 सैन्य अभ्यास को देखने पहुंचे तो भारतीय जवानों ने प्लेन जंप, स्पेशल हेलीकॉप्टर ऑपरेशन और डिफेंसिव एक्शन में हिस्सा लिया था। रूस का कहना है कि जैपड 2021 अभ्यास का उद्देश्य आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई का अभ्यास करना है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामरिक विशेषज्ञ रूस से सहमत होते हुए नजर नहीं आ रहे। उनका कहना है कि जैपड सैन्य अभ्यास के जरिए रूस ने दुनिया को अपनी ताकत दिखाई है, रूस के निशाने पर अमेरिका है। दूसरी तरफ बेलारूस की सेना भी इस अभ्यास में सक्रिय रूप से भाग ले रही है। इससे नाटो देशों के भी कान खड़े हो गए हैं। दरअसल कई यूरोपीय देशों के बेलारूस के साथ विवाद हैं। पिछले कुछ दिनों में अमेरिका के अफगानिस्तान छोड़ने और तालिबान को चीन और पाकिस्तान की मदद से जो अंतरराष्ट्रीय स्थिति बन रही है, उसके बाद भारत का पिछले सप्ताह रूस के साथ जैपड 2021 में हिस्सा लेना तथा अगले हफ्ते अमेरिका के साथ क्वाड का हिस्सा होना, भविष्य में भारत की सैन्य तथा सामरिक ताकत के अंतरराष्ट्रीय वजूद का प्रमाण है।

कर्नल (रि.) मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक