Sunday, August 09, 2020 04:30 PM

आर्थिकी में भले ही पिछड़ गए, पर टेक्नोलॉजी में छुआ आसमान

एचपीटीयू के वाइस चांसलर बोले; लॉकडाउन के बीच ऑनलाइन पढ़ाई को तैयार नहीं थे शिक्षण संस्थान, फिर भी रंग ला रहे प्रयास

हमीरपुर – वैश्विक महामारी कोरोना के कारण देशभर में लागू लॉकडाउन के कारण बने हालात ने भले ही देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, लेकिन इन तीन महीनों में जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए जिस तरीके से लोगों ने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है, उसने हमें काफी साल आगे कर दिया है। यह कहना है हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. एसपी बंसल का। उनके अनुसार कोरोना संकट के चलते जो शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। उससे कहीं न कहीं विद्यार्थियों की पढ़ाई में असर जरूर पड़ा। प्राइवेट संस्थानों सहित कुछ सरकारी संस्थानों ने एक लिमिट तक ऑनलाइन टीचिंग का प्रयास जरूर किया, लेकिन सफलता उतनी नहीं मिल पाई, क्योंकि वे कभी ऐसे क्राइसिस के लिए तैयार ही नहीं थे। प्रो. बंसल कहते हैं कि तकनीकी विश्वविद्यालय की बात करें, तो यह विश्वविद्यालय ऑनलाइन टीचिंग में 95 प्रतिशत तक इसलिए अचीव कर पाया क्योंकि हमारे पास ई-लाइब्रेरी और एलएमएस (लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम) पहले से ही तैयार थे। हमारा पहले से पोर्टल तैयार था, इसलिए हम सक्सेस हो पाए। चैलेंज तो हमारे सामने भी था, लेकिन हमने सबसे पहले अपने इन सिस्टम के माध्यम से फैकल्टी डिवेलपमेंट प्रोग्राम चलाकर शिक्षकों को तैयार किया। हमें रिमोट एरिया में अपने छात्रों को पढ़ाने में वहां दिक्कत आई, जहां नेट की स्पीड नहीं मिल पाई। वे कहते हैं कि हमने लॉकडाउन की शुरुआत से ही ऑनलाइन पढ़ाई का सिस्टम शुरू कर दिया था। हमारी ई-लैब और एलएमएस को दो लाख यूजर्स ने उपयोग किया। वीसी प्रो. एसपी बंसल के अनुसार इस वक्त हमारे पास तीन बड़े चैलेंज हैं। एक यह है कि फाइनल ईयर के बच्चों का क्या होगा? वे डिग्री पूरी कर पाएंगे या नहीं और जो पासआउट होकर निकलेंगे उनका भविष्य क्या होगा? प्रो. बंसल कहते हैं कि हमने एक तो इंटरमीडिएट सेमेस्टर के बच्चों का अभी एग्जाम न करवाने का निर्णय लिया है। उनका एग्जाम अब अगले सेमेस्टर के साथ ही करवाया जाएगा। जहां तक फाइनल ईयर के बच्चों की बात है, तो हम विचार कर रहे हैं कि उनके पिछले सेमेस्टर की परफोर्मेंस को देखकर ही उनका रिजल्ट निकालकर उन्हें डिग्री दे दी जाए। यूजीसी ने भी इसे रेकमेंड किया है। या फिर सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए ऑनलाइन एग्जाम करवाए जा सकते हैं, जिसमें तीन घंटे का एग्जाम दो घंटे में करवाया जा सकता है। अब जो बच्चे पासआउट होंगे, उनके लिए एचपीटीयू ने सरकार से अपील की है कि पोलिटेक्नीक में स्किल डिवेलपमेंट के छोटे-छोटे एक से दो माह के कैप्सूल प्रोग्राम चलाए जाएं।

अभिभावकों में डर

प्रो. बंसल कहते हैं कि हमने अभिभावकों से बात की तो पाया कि उनमें अभी भी बहुत खौफ है। वे अभी बच्चों को स्कूल  भेजने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं हैं। उस डर को दूर करने के लिए हमें ऑनलाइन प्रैक्टिस करनी होगी। हम ऐसी व्यवस्था करने जा रहे हैं कि आने वाले समय में उनके एग्जाम भी घर से ही दिलवा सकें। हम ऑनलाइन एडमिशन करने जा रहे हैं।

20त्न शिक्षा ऑनलाइन

प्रो. बंसल के अनुसार वे अभी यह नहीं जानते कि हालात को सुधरने में और वक्त लगेगा। इसलिए उन्होंने ऐसा खाका तैयार किया है कि आने वाले समय में यदि कालेज शुरू भी हो जाते हैं, तो भी यूनिवर्सिटी 20 प्रतिशत पढ़ाई ऑनलाइन ही करवाएगी। इसका मकसद उन्हें कोरोना जैसे संकट काल के लिए तैयार करना है कि यदि भविष्य में कभी ऐसे हालात बनें तो छात्रों को ज्यादा परेशानी न हों।

17 हजार स्टूडेंट्स

हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त करीब 50 महाविद्यालयों में 17 हजार के करीब छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें यूजी के तहत बीटेक, बीबीए, बीसीए, बीएचएमसीटी, बी-फार्मेसी, बीआर्क, फार्मेसी ब्रिज कोर्स आयुर्वेदा और एलोपैथी आदि हैं। बात अगर पीजी की करें, तो यहां एमटेक, एमसीए, एमबीए, एमएससी पिजिक्स, एमएससी एन्वायरमेंट साइंस और योगा जैसे विषय हैं।

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