Monday, October 26, 2020 03:46 PM

अवसरों से भरी अटल रोहतांग सुरंग: प्रो. मनोज डोगरा, लेखक हमीरपुर से हैं

प्रो. मनोज डोगरा

लेखक हमीरपुर से हैं

यानी रोहतांग सुरंग के निर्माण से अब लाहुल घाटी सोना उगलेगी। यह सुरंग कई लोगों के सपने साकार करेगी तथा कई युवाओं के सपनों को सुरंग के निर्माण से उड़ान मिलेगी, जिसका सीधा असर राष्ट्र निर्माण में देखने को मिलेगा। यानी रोहतांग सुरंग कई राष्ट्रीय महत्त्व की पूर्ति का एक सशक्त साधन सिद्ध होगी तथा दूरवर्ती क्षेत्र व विशेष भौगोलिक विविधता वाले क्षेत्र  भी हर परिस्थितियों में राज्य के साथ जुडे़ रहेंगे। यह सुरंग सामरिक, आर्थिक, सामाजिक, पर्यटन, व्यावसायिक, रोजगार तथा शिक्षा क्षेत्र की दृष्टि से बहुत बड़ा वरदान सिद्ध होगी तथा इससे क्षेत्र का हरेक प्राणी लाभान्वित होगा। लाहुल घाटी में कारोबार को नए आयाम मिलने वाले हैं…

हिमाचल प्रदेश में अटल रोहतांग टनल का शुभारंभ जल्द ही होना संभव है। सामरिक महत्त्व वाली रोहतांग अटल सुरंग बनकर तैयार हो गई है। 10 हजार फीट की ऊंचाई पर किसी हाईवे पर बनी एकमात्र सबसे लंबी सुरंग अटल सुरंग है। मनाली के पास रोहतांग में अटल सुरंग करीब-करीब बनकर तैयार हो चुकी है। मात्र  प्रधानमंत्री जी के करकमलों द्वारा  शुभारंभ होने का ही इंतजार बाकी है। शुभारंभ होने के बाद यह टनल जहां  आर्थिक क्षेत्र से लोगों को सुदृढ़ करेगी, वहीं सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। यह सुरंग कोई आम सुरंग नही है, बल्कि भारतीय दृष्टिकोण से  यह सुरंग अपने आप में अपना एक विशेष आयाम रखती है। यह सुरंग सामाजिक, आर्थिक, सुरक्षा, व्यापार, व्यवसायियों व विद्यार्थियों के लिए एक वरदान से कम नहीं है। बात सुरक्षा व सीमा संबंधित विवादों की करें तो भारत के साथ सटे हुए चीन-तिब्बत के एरिया में सुरक्षा बलों के लिए  यह आंतरिक रूप से बहुत ही लाभदायक और महत्त्वपूर्ण साबित होगी। वहीं बात अगर  बागवानी और किसानों की करें तो यह कृषक वर्ग के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। उनको अपने फलों व सब्जियों को बेचने के लिए मंडियों में आसानी से सुविधा होने से पहुंचा सकेंगे।

इसके साथ ही यह सुरंग क्षेत्र के लोगों के कई काम आसान बना देगी, जैसे लाहुल के लोग काम के लिए आसानी से आ-जा सकेंगे। साथ में ही तीर्थस्थलों की रौनक भी बढ़ना तय है, जिसके फलस्वरूप हिमाचल प्रदेश का किसान अधिक ज्यादा आर्थिक तौर पर सुदृढ़ होगा। प्रधानमंत्री द्वारा समर्पित होने वाली यह टनल हिमाचल के लिए एक वरदान सिद्ध साबित हो सकती है। इस टनल के बनने से हिमाचल प्रदेश का लाहुल-स्पीति इलाका और पूरा लद्दाख अब देश के बाकी हिस्सों से 12 महीने जुड़ा रहेगा, क्योंकि रोहतांग पास (दर्रा) सर्दियों के मौसम में भारी बर्फबारी के कारण बंद हो जाता था, जिससे लाहुल-स्पीति के जरिए लद्दाख जाने वाला हाईवे छह महीने के लिए बंद हो जाता था। लेकिन अब अटल टनल बनने से इस समस्या से निजात मिल जाएगी। साथ में ही अटल टनल बनने से सेना की पूर्वी लद्दाख को जाने वाली सप्लाई लाइन भी अब 12 महीने खुली रहेगी, क्योंकि पूर्वी लद्दाख पहुंचने के लिए यह एक अलग एक्सेस है। दूसरा एक्सेस जो श्रीनगर के जरिए जोजिला पास से आता है,  वह भी भारी बर्फबारी के जरिए सर्दियों में बंद हो जाता है। लेकिन सुरंग के शुभारंभ के बाद अब इससे देश की सुरक्षा में सुदृढ़ता आएगी। अब सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। साथ में ही आपातकालीन तौर पर भी इस सुरंग का महत्त्व अधिक बढ़ जाता है।

सामरिक महत्त्व के चलते यह सुरंग देश व प्रदेश के लिए एक वरदान है। वहीं संबंधित क्षेत्रों की बात करें तो इसका सबसे ज्यादा लाभ किसानों, बागवानों, व्यापारियों, व्यवसायियों, पर्यटकों तथा विद्यार्थियों को होगा, जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए साल के छह महीने देश से कट जाते थे। इसमें चाहे बात लाहुल से सेबों को बागवानों द्वारा  मंडियों तक पहुंचाना हो या पर्यटन स्थलों का रोमांच लेने वाले पर्यटकों की बात हो या फिर लाहुल से अध्ययन करने के लिए बाहर जाने वाले विद्यार्थियों की ही बात क्यों न हो, सभी इस सुरंग के निर्माण से अपने कार्य अब आसानी से कर पाएंगे।

पर्यटन की दृष्टि से भी इस सुरंग के निर्माण के पश्चात रोजगार के अवसर खुलेंगे व पर्यटकों को आने-जाने की उत्तम सुविधा मिलेगी। साथ में वहां के स्थानीय लोगों को रोजगार प्राप्त होने से जीवन स्तर में सुधार होगा तथा क्षेत्र का विकास भी होना तय है। हिमाचल प्रदेश का लाहुल-स्पीति जिला दूरवर्ती व भौगोलिक कारणों से अन्य जिलों से पिछड़ा जिला माना जाता है, लेकिन अब इस पिछडे़पन से चकाचौंध की ओर का अध्याय का सार रोहंताग सुरंग से लिखा जाएगा। लाहुल-स्पीति रोमांच, पर्यटन व बागवानी के क्षेत्र में अब फर्श से अर्श तक का सफर तय करेगा। रोहतांग सुरंग के शुभारंभ से लाहुल घाटी अपने विकास व उत्थान का नया अध्याय लिखेगी। लाहुल घाटी का सीधा संपर्क अब शहरों की चकाचौंध से हो पाएगा तथा जिसके फलस्वरूप घाटी की हर एक चीज समय से व आसानी से लोगों को मिल पाएगी।

यानी रोहतांग सुरंग के निर्माण से अब लाहुल घाटी सोना उगलेगी। यह सुरंग कई लोगों के सपने साकार करेगी तथा कई युवाओं के सपनों को सुरंग के निर्माण से उड़ान मिलेगी, जिसका सीधा असर राष्ट्र निर्माण में देखने को मिलेगा। यानी रोहतांग सुरंग कई राष्ट्रीय महत्त्व की पूर्ति का एक सशक्त साधन सिद्ध होगी तथा दूरवर्ती क्षेत्र व विशेष भौगोलिक विविधता वाले क्षेत्र  भी हर परिस्थितियों में राज्य के साथ जुडे़ रहेंगे। यह सुरंग सामरिक, आर्थिक, सामाजिक, पर्यटन, व्यावसायिक, रोजगार तथा शिक्षा क्षेत्र की दृष्टि से बहुत बड़ा वरदान सिद्ध होगी तथा इससे क्षेत्र का हरेक प्राणी लाभान्वित होगा। लाहुल घाटी में कारोबार को नए आयाम मिलने वाले हैं। इससे असंख्य युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी मिलेंगे, जिससे अब वे दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर नहीं रहेंगे। छात्रों को आने-जाने के लिए लंबे समय से इस सुरंग की मांग चली आ रही थी, जो अब पूरी होने वाली है। इससे जहां स्थानीय लोगों के कारोबार चल निकलेंगे, वहीं उनकी आय में भी वृद्धि होने की संभावना है। लोग रोजगार के मामले में अब स्वावलंबी हो जाएंगे। उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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