Tuesday, December 07, 2021 05:42 AM

घर में आयुर्वेद

सुपारी के औषधीय गुण

- डा. जगीर सिंह पठानिया

सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक,

आयुर्वेद, बनखंडी

इसका लैटिन नाम ऐरेका कटेचु है। इसके अतिरिक्त इसके शुपारी, पूग, सोपारी, पोपल इत्यादि नाम हंै। अंग्रेजी में इसे बीटल नट कहते हैं। सुपारी का 40-60 फुट ऊंचा शाखा रहित वृक्ष होता है। इसके फल गुच्छों में लगते हैं और पकने पर सुपारी फल का रंग पीताभ या रक्त वर्ण का होता है। इसकी उत्पत्ति भारत के समुद्र तटवर्ती प्रदेशों में विशेषतः कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बंगाल और आसाम में होती है। एशिया में इसे बड़े पैमाने पर उगाया जाता है।

रासायनिक संगठन

सुपारी में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा खनिज द्रव्य पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त कैटेचिन, टैनिन, गैलिक एसिड, एरिकोलीन, एरिकोडीन, गुवाकोलीन, गुवाकीन नामक अल्कलाइड पाए जाते हैं। गुणों में सुपारी भारी, रूखी, कसैले मीठे रस वाली तथा तासीर में ठंडी होती है।

गुण व प्रयोग - इसका पानी में उबाल कर शोधन करने के पश्चात ही प्रयोग करना चाहिए।

बाह्य प्रयोग- मुखपाक व गले के रोगों में इस के काढ़े से कुल्ला करना चाहिए। औरतों को सफेद पानी में इसके काढ़े की उत्तर बस्ती देनी चाहिए या स्वैप रखना चाहिए। व्रणों व जख्मों पर इस के पाउडर का छिड़काव करना चाहिए सुपारी भस्म दंत मंजनों में भी डालते हैं। कमर दर्द व अन्य वात व्याधियों में इस से सिद्ध तेल की मालिश करनी चाहिए।

आभ्यंतर प्रयोग

वात रोगों में-सुपारी का प्रयोग हमारे दिमाग व शरीर की नसों को ताकत देता है। इसलिए इसके चूर्ण का वात रोगों जैसे शरीर में दर्दों, सुन्नता, आमवात, एकांग वात, सर्वांग वात, कंपन इत्यादि में प्रयोग दूध के साथ करना चाहिए साथ में घी का भी प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि इससे रुक्षता होती है।

पाचक के रूप में- यह लाल स्तव यानी खून को बढ़ाता है तथा मुख की दुर्गंध को नष्ट करता है। कषाय रस के साथ स्तंभक है, लेकिन अधिक मात्रा में लेने पर मरोड़ के साथ दस्त आते हैं। यह पेट के कीड़ों को भी मारता है। अतः इसका प्रयोग अरुचि, अतिसार, प्रवाहिका व कृमि रोग में किया जाता है। ऐसे में 3 ग्राम सुपारी का चूर्ण 20 मिली. नींबू के रस में व 250 मिली. दूध में मिला कर 12-14 घंटे उपवास के बाद रोगी को देना चाहिए।

दिल के रोगों व रक्त को रोकने में-सुपारी ब्लड प्रेशर कम करती है व हृदय गति में सुधार लाती है। साथ में अगर रक्तपित्त की वजह से रक्त स्राव हो रहा हो, तो उसको भी रोकती है। सुपारी का प्रयोग शोधन के पश्चात ही करना चाहिए। इसके लिए इसे पानी में उबाल कर सूखा लेना चाहिए।