बच्‍चों में निराशा को कैसे दूर करें

यदि आप अपने बच्चे का मनोबल बढ़ाने में सफल हो जाते हैं, तो आपके बच्चे की आधी परेशानियां तो यहीं खत्म हो जाती हैं। अब वह पूरी मेहनत से काम करेगा और यदि हार भी गया, तो निराश नहीं होगा। कई बार इस समय में बच्चे कुछ गलत फैसले लेकर अपनी जिंदगी को पूरी तरह नष्ट कर लेते हैं। उनको जरूरत होती है एक परामर्शदाता की जो उनको सही दिशा दे…

आजकल के बच्चे मनचाहा परिणाम न मिलने पर बहुत जल्दी निराश व दुखी हो जाते हैं। ऐसे में उनके दिमाग में नकारात्मक विचार आते हैं। इसके चलते वो जल्दबाजी में कुछ गलत फैसले भी ले लेते हैं। जिनकी वजह से उन्हें बाद में पछताना पड़ता है। ऐसे समय में बच्चे को किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है, जो उन्हें समझा सके कि निराशा से कैसे निपट सकते हैं। आजकल आत्म हत्या के केस भी बढ़ रहे हैं। जिनका कारण भी निराशा और हताशा है। आइए जानते हैं किस प्रकार पेरेंट्स अपने बच्चों को निराशाजनक स्थिति से उबरने में मदद कर सकते हैं।

लक्ष्य निर्धारण

हमें बच्चों को समझाना होगा कि लक्ष्य सिर्फ  उतना ही निर्धारित करें जिसको पूरा कर सकें व उसको पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करें, क्योंकि परिणाम उतना ही मिलेगा जितनी मेहनत उसमें लगेगी।

असफलता से न घबराएं

यदि एक बार उन्हें मनचाहे परिणाम न मिलने पर निराशा भी हासिल हो, तो उन्हें उसका सामना करना सिखाइए और समझाइए कि सफलता प्राप्त करने में बाधाएं तो आती ही हैं।

कारण तलाशें

उनको किस वजह से निराशा हासिल हुई है, वो कारण खोजना सिखाइए। ताकि भविष्य में वो और अच्छे से तैयारी करें व एक गलती को बार बार न दोहराएं।

हार का सामना

उनको हार से अवगत कराएं, क्योंकि वो जब तक हार नहीं देखेंगे तब तक उन्हें जीत की कीमत पता नहीं चलेगी।

प्रेरित करें

अपने बच्चों का मनोबल बढाएं। आप किसी भी महान आत्मा की जीवन गाथा सुना कर, अपने बच्चे को प्रेरित कर सकते हैं। जब बच्चों को लगेगा कि यदि ये किरदार सब कर सकते हैं, तो वे क्यों नहीं।

छोटे-छोटे टारगेट दें

छोटे-छोटे टारगेट दें, तो उनमें सकारात्मक सुधार होगा। बच्चों को आज के जमाने की प्रतियोगिता से अवगत कराएं। उनके लिए कोई लक्ष्य निर्धारित करें जोकि वो आसानी से पूरा कर सकते हैं। उनके पूरा करने पर उनको पुरस्कृत करें।

खुश रहने की वजह

बच्चे को समझाएं खुश रहने की वजह ढूंढना। यदि आप अपने बच्चे का मनोबल बढ़ाने में सफल हो जाते हैं, तो आपके बच्चे की आधी परेशानियां तो यहीं खत्म हो जाती हैं। अब वह पूरी मेहनत से काम करेगा और यदि हार भी गया, तो निराश नहीं होगा। कई बार इस समय में बच्चे कुछ गलत फैसले लेकर अपनी जिंदगी को पूरी तरह नष्ट कर लेते हैं। उनको जरूरत होती है एक परामर्शदाता की जो उनको सही दिशा दे। जिंदगी जीने का ढंग बदल दे।

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