Tuesday, December 07, 2021 04:46 AM

137 करोड़ से बुझेगी बड़सर की प्यास

नवनीत सोनी—बड़सर उपमंडल बड़सर को अब प्यास नहीं सताएगी। उपमंडल में पेयजल समस्या का समाधान होने वाला है। इससे लोगों को संकट से मुक्ति मिलने की आस जगी है। उपमंडल के तहत आने वाले क्षेत्रों की प्यास 137 करोड़ से बुझेगी। इसके लिए विभिन्न पेयजल योजनाओं के स्रोतों का संबर्धन किया जाएगा। पेयजल योजनाओं के जल भंडारण टैंकों में योजना के कार्यान्वित होने के बाद पानी की कमी नहीं रहेगी। जहां पहले से ही संचालित पेयजल योजनाएं वर्क करती रहेंगी वहीं जल भंडारण टैंकों में ब्यास से अपलिफ्ट होने वाला पानी भी पहुंच जाएगा। इस कारण जब भंडारण टैंक में पर्याप्त पानी होगा, तो क्षेत्रों में पेयजल किल्लत स्वत: समाप्त हो जाएगी। फिलहाल इस महत्त्वाकांक्षी पेयजल योजना का स्वरूप तैयार किया जा चुका है। योजना के तहत कार्य जल्द शुरू होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। यदि योजना सिरे चढ़ी, तो बड़सर उपमंडल के क्षेत्रों में पानी को लेकर समस्या पेश नहीं आएगी। जानकारी के अनुसार ब्यास नदी से बड़सर क्षेत्र की विभिन्न पेयजल योजनाओं के स्रोतों का संवर्धन किया जाएगा।

इस योजना की कुल अनुमानित लागत 137 करोड़ 57 लाख रुपए बताई जा रही है। करोड़ों रुपए की इस योजना के पूरे होते हुए ही बड़सर के पेयजल स्रोत में पानी की किसी तरह की कमी नहीं होगी। इस योजना से बड़सर की ज्यादातर पंचायतों को लाभ मिलने वाला है। पेयजल योजना का रूट ब्यास नदी से शुरू होकर बसातर, पीपलू, पथल्यार, सिंघवीं से होता हुआ दियोटसिद्ध तक बताया जा रहा है। योजना के पूरा होने से क्षेत्र में चल रही पुरानी पेयजल योजनाओं को जहां संजीवनी मिलेगी वहीं क्षेत्रों को बड़ी राहत महसूस होगी। अकसर गर्मियों के सीजन में पेयजल की हाहाकार मची रहती है। कारण नदी-नालों का जलस्तर गिरने के कारण पर्याप्त मात्रा में पानी अपलिफ्ट नहीं हो पाता। इस कारण भंडारण टैंक भी पूरे नहीं भर पाते तथा इनके अधीन क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा जाता है। समस्या के समाधान के लिए ही अब बड़े स्तर की योजना का खाका तैयार किया गया है। अगर विभाग इस योजना को चरणबद्ध तरीके व सुचारू रूप से कम समय अवधि में पूरा करता है, तो निश्चित ही लोगों को काफी लाभ मिलेगा। (एचडीएम)